Poetry by Ashif Khan

सुनिए एक ऐसे शख़्स का कलाम
जो ख़ुद को शायर तो नहीं कहता है
पर जो वो लिखता है बाकमाल लिखता है
बेमिसाल लिखता है दिल का हाल लिखता है

#AshKPoetry @ashifkhan_1111

उसने झगड़ा किया, फिर ख़ुद माफ़ी भी मांगी
लगता है जल्द ही मुझे ज़हर पिलाने में है…
👇👇🎙🎙👆👆
https://youtu.be/W5M9GFS0-Ik

Dr. Kumar Vishwas presents Yuvaaz KV Studio

डॉ कुमार विश्वास लेकर आए हैं
‘युवाज़’, द प्लेटफार्म टू वॉइस यॉर ड्रीम्स।
KV स्टूडियो आपकी परफॉर्मेंस का वीडियो शूट करेगा, एडिट करेगा, लॉन्च करेगा और प्रमोट भी करेगा।
यदि आप कवि/शायर/गायक/वादक/स्टैंडअप कॉमेडियन हैं तो अपने बेस्ट वीडियो की लिंक या ऑडियो या टेक्स्ट या वर्ड फ़ाइल या वॉइस सैंपल thekvstudio@gmail.com पर भेजें।

Shah Aamada Hai Riyasat Mitane par

देखिए कैसे एक शायर ने शाह की नींद उड़ा दी

किस से करे शिकायत अब अवाम यहां
शाह आमादा है ख़ुद रियासत मिटाने पर

रॉकशायर इरफ़ान अली ख़ान
👇👇🎙🎙🎙🤘🤘

Grand Mushaira Jaipur

ध्यान से पंछियों को देते हो दाना-पानी इतने अच्छे हो तो पिंजरे से रिहा कर दो ना دھیان سے پنچھیوں کو دیتے ہو دانہ پانی اتنے اچھّے ہو تو پنجرے سے رہا کر دو ناں

Zubair Ali Tabish bhai

ये तो मौत में भी एक रस्म तलाशते हैं

हर शख़्स में अपना अक्स तलाशते हैं
बड़ी ख़ामोशी से लब लफ़्ज़ तलाशते हैं

ये दुनिया वाले हैं इन्हें क्या फर्क़ पड़ता हैं
ये तो मौत में भी एक रस्म तलाशते हैं

Save Birds

परिंदो से उनका खुला जहान मत छीनिए
ज़मीन तो छीन ली आसमान मत छीनिए

दिल बहुत रोता है जब कोई बेघर होता है
कभी किसी से उसका मक़ान मत छीनिए

@rockshayar

Fund Raise for Blog

Hello guys, My bank account details given here. You can donate any amount. God bless you all.

ICICI A/C No. – 677501555706
Name – IRFAN ALI KHAN
Branch – ICICI Bank, Prakrit Bharti Academy, Gurunanak Road, Malviya Nagar, Jaipur, Rajasthan, India
IFSC Code – ICIC0006775
Type – Savings Account

बेबसी

कभी-कभी ख़ुद को इतना बेबस पाता हूं
के बहुत कुछ सोचकर भी कुछ नहीं लिख पाता हूं

जाने कैसी बेबसी होती है उस वक़्त मैं नहीं जानता
वो मुझे निगलती रहती है मैं उसे उगलता रहता हूं

काग़ज़ को बहुत दर्द होता है इस दौरान
वो अपनी चीखे मेरी चीखों के नीचे दबाता चला जाता है

गर बच जाएं कोई आह तो उसे जलाता चला जाता है
उस राख को अपने जिस्म पर लगाता चला जाता है
देखते ही देखते हर ख़याल मुझसे दूर चला जाता है
गर जबरदस्ती करूं तो लफ़्ज़ों से नूर चला जाता है

कभी-कभी ख़ुद को इतना बेबस पाता हूं
के सब कुछ सोचकर भी कुछ नहीं लिख पाता हूं