अब्र की आँखों से दर्द छलकने को है

अब्र की आँखों से दर्द छलकने को है
सब्र कर ऐ ज़मीं बारिश होने को है

अभी प्यास लगना लाज़िम है तुझे
बस थोड़ी देर और इफ़्तार होने को है

तैयारी रख तू पूरी अपनी, ऐ ज़ख़्म देने वाले
ज़ख़्म मेरे वो सारे अब भरने को है

उसे सोचना इतना सोचना, के हर ख़याल खरोंचना
काम एक यही तो अब करने को है

बस यही लिखा था वसीयत में शायर ने ‘इरफ़ान’
शेर सुनाओ हम अब मरने को है।

Jpeg


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अब तक याद है मुझे

वो मुस्कुराकर मुझे देखना तेरा
वो नज़रों से हर बात कहना तेरा
वो फूलों की तरह महकना तेरा
वो हँसी की तरह चहकना तेरा
वो आँखें तेरी, वो चेहरा तेरा
अब तक याद है मुझे, अब तक याद है मुझे।

वो बिन जताएं मुझे चाहना तेरा
मैं क्या हूँ मुझको ये बताना तेरा
हर मुश्किल में साथ निभाना तेरा
ये ज़िन्दगी जीना सिखाना तेरा
वो चाहत तेरी, इनायत तेरी
अब तक याद है मुझे, अब तक याद है मुझे.

वो जानबूझकर देर से आना तेरा
मुझे सताने का अच्छा बहाना तेरा
वो शरमाकर पलकें झुकाना तेरा
चंद लम्हे हसीं साथ बिताना तेरा
वो बातें तेरी, मुलाक़ातें तेरी
अब तक याद है मुझे, अब तक याद है मुझे।

वो दिल तोड़कर जाना तेरा
वो लौटकर फिर न आना तेरा
वो यादों से मुझे मिटाना तेरा
वो तन्हा छोड़कर जाना तेरा
वो बेरुख़ी तेरी वो बद्दुआ तेरी
अब तक याद है मुझे, अब तक याद है मुझे।

7th Birthday Of RockShayar


7th Happy Birthday of RockShayar….(02/05/2013)


छह साल हो गए हैं शायर तुझे पैदा हुए
छह साल हो गए हैं मुझे मुझसे ज़ुदा हुए


तू चट्टानों सा मज़बूत क़िला है
तुझी से मुझको ये वज़ूद मिला है
मुझे शिकायत खुद से है
तुझसे न कोई शिकवा गिला है


एक अर्सा हो चला है शायर तुझे पैदा हुए
एक अर्सा हो चला है मुझे ख़ुद से ज़ुदा हुए


तूने ही तो दर्द में सहारा दिया था
डूबती कश्ती को किनारा दिया था
साज़िशों के उस दौर में
रंज़िशों के शोर में
कायनात का मुझे इशारा दिया था


छह साल हो गए हैं शायर तुझे पैदा हुए
छह साल हो गए हैं मुझे मुझसे ज़ुदा हुए


न तू बदला न मैं बदला
बदला तो बस नज़रिया बदला
क़लम का असर कुछ यूं हुआ
लेना नहीं अब किसी से बदला


तभी तो तू रॉकशायर है
तभी तो मैं इरफ़ान हूं
साये हैं इक दूजे के हम
जिस्म मैं और जान तू


छह साल हो गए हैं शायर तुझे पैदा हुए
छह साल हो गए हैं मुझे ख़ुद से ज़ुदा हुए।


#7thHappyBirthdayofRockShayar



लुत्फ़ मिलता है उनके दर्दभरे इनाम से

वो याद भी करते है तो किसी काम से

दिल दुखाते है हमारा बड़े ही आराम से

उफ्फ तक नहीं करता है ये कैसा पागल दिल है

लुत्फ़ मिलता है शायद इसे उनके दर्दभरे इनाम से

ऐ दिल तुझे दर्द की हौसला अफ़्ज़ाई मुबारक

हमें फ़क़ीरी पसंद है तुम्हें तुम्हारी मीरज़ाई मुबारक
ये भीड़ तुम रख लो हमें हमारी तन्हाई मुबारक

भले ही टूट गया है, तू खुद से रूठ गया है
ऐ दिल तुझे दर्द की हौसला अफ़्ज़ाई मुबारक

“मैं वो मुसाफ़िर हूँ मंज़िल की जिसे कोई चाहत नहीं”

थोड़ी काफ़ी हैं ज्यादा खुशियों की मुझे आदत नहीं
उसे हो गई होगी पर मुझे अब उससे मोहब्बत नहीं

जब तक थी, बेशक थी बेहद थी बेनज़ीर थी चाहत
अब आलम ये है के मुझे खुद अपनी ही चाहत नहीं

एक अर्से तक रोया हूँ, एक लम्हा भी ना सोया हूँ
उनींदी इन आँखों में अब नींद जैसी कोई हसरत नहीं

रिश्तों में राजनीति न खेलना, इस बार माफ़ी नहीं मौत मिलेगी
क्योंकि माफ़ करने की अब वो मेरी पहले सी फ़ितरत नहीं

मंज़िल-मंज़िल करने वालों, अब ज़रा ये भी सुनो
मैं वो मुसाफ़िर हूँ मंज़िल की जिसे कोई चाहत नहीं।

Fankaarz Mahfil

शानदार लोगों की जानदार महफ़िल
आ ही जाएगा किसी न किसी पर ये दिल

फ़नकार तो बहुत देखे
मगर आज पहली बार Real फ़नकार्ज़ से मुलाक़ात हुई
क़लमकार तो बहुत सुने
मगर आज पहली बार क़लम से जज़्बात की बरसात हुई

किसी ने किताबों की दुनिया से अपने पहाड़ों का तआरुफ़ कराया
तो किसी ने बर्फ़ीली वादियों में सुलगती हुई ठंड को महसूस कराया

किसी ने अब भी उसके शहर जाने की वज़ह बताकर जज़्बाती किया
तो किसी ने गिटार और ढपली के संग इश्क़ की बदली को तारी किया

किसी ने ख़ुद को ज़िंदा मज़ार बताया
तो किसी ने लफ़्ज़ों का जादू दिखाया

किसी ने बेटियों की आवाज़ बनकर अपनी क़लम को चलाया
तो किसी ने अय्यो वाली कहानी से पहले हँसाया फिर रुलाया

और तो और महफ़िल को सरफ़राज़ करने के लिए
एक नहीं बल्कि दो-दो फ़राज़ मौजूद थे

एक ने बड़े ही बेख़ौफ़ होकर एक ख़ौफ़नाक सी Story सुनाई
तो दूसरे ने बातों ही बातों में अपने मन के रंगमंच की सैर कराई

किसी ने पलक झपकते ही बल्ले-बल्ले वाला माहौल बना दिया
तो किसी ने उम्दा ग़ज़ल सुनाकर अपना किरदार उज्जवल किया

और भी कई सितारे चमके सुहानी इस शाम में
और भी कई नज़ारे दिखे दिलों के रोशन क़लाम में

ऐसे में गर Hosting का ज़िक्र न हो तो ये बहुत ही बड़ी नाइंसाफी होगी
आवाज़ और अंदाज़ दोनों ही बाकमाल बाज़माल उनकी ये तारीफ़ भी नाकाफ़ी होगी

फ़नकार तो बहुत देखे
मगर आज पहली बार Real फ़नकार्ज़ से मुलाक़ात हुई
अशआर तो बहुत सुने
मगर आज पहली बार लबों से एहसास की बरसात हुई

#Fankaarz

मंच संचालन की जिम्मेदारी…..असल में है बहुत ही भारी

मंच संचालन की जिम्मेदारी…..असल में है बहुत ही भारी
दूसरी बार भी भाई Saumitra Narayan Sharma ने 
बिना किसी पूर्वसूचना के हमें आखिरी Overs में मैदान में उतार दिया
हमने भी Agaastyaa के 3rd Open Mic में टूटी-फूटी Hosting कर ही ली…

ज्यादा कुछ नहीं बस एक बात कहूंगा
दिल की आवाज़ में चंद अल्फ़ाज़ कहूंगा

इतना तो यक़ीन है अपने अंदाज़ पर
के आज से मैं आप सबके दिल में रहूंगा…

देखकर जिसे खुद मायूसी भी मुस्कुराएं

YourQuote Open Mic Jaipur

कई दिन हो गए हैं चलो ना थोड़ा जिया जाएं
नहीं किया जो अब तक आज वही किया जाएं

क़िरदार हो तो कुछ ऐसा हो, वरना ना हो
के देखकर जिसे खुद मायूसी भी मुस्कुराएं

MFC Open Mic Jaipur

होश गंवाने को तैयार हुए बैठे है
खानाबदोश मन का शिकार हुए बैठे है

चादर चढ़ाने ही सही पर आओ कभी
इंतज़ार में आपके मज़ार हुए बैठे है

गुज़रा हुआ वक़्त नहीं हूँ जो लौटकर नहीं आऊँगा

गुज़रा हुआ वक़्त नहीं हूँ जो लौटकर नहीं आऊँगा
जब भी आऊँगा सबसे ज्यादा तुम को ही चौकाऊँगा

याद रखना ये बात ये तारीख़ तुम
इस बार पहले से ज्यादा खुद को पाऊँगा

Ek waqt

हम सबकी ज़िंदगी में एक वक़्त आता है
एक वक़्त जो हमें हमारा एहसास कराता है

एक वक़्त
एक वक़्त जब हम कमज़ोर पड़ने लगते हैं
एक वक़्त जब हम कोई और बनने लगते हैं
एक वक़्त जब सब हम पे हँसने लगते हैं
एक वक़्त जब हम ख़ुद पे शक करने लगते हैं
एक वक़्त
एक वक़्त जब अपने ताने कसने लगते हैं
एक वक़्त जब यार पुराने ज़माने लगने लगते हैं

उस वक़्त
उस वक़्त जो एक दर्द भीतर कहीं बाक़ी रह जाता है
बस ज़िंदगी भर वही दर्द हमें सही राह दिखाता है

हम सबकी ज़िंदगी में एक वक़्त आता है
एक वक़्त जो हमें हमारा एहसास कराता है

अभी टूटा नहीं है ख़्वाब मेरा

अभी टूटा नहीं है ख़्वाब मेरा
नींद के साये अभी जगे हुए हैं

ज़रा देर से देना धोखा मुझे तुम
हाल ही में दिल के सौ टुकड़े हुए हैं

घर बार बसाने में हर बार वक़्त तो लगता ही है
वक़्त है या सज़ा-ए-सख़्त
हम अब तक उजड़े हुए हैं

रिश्ते बनाने से ज्यादा थे निभाने ज़रूरी
निभाए नहीं रिश्ते तभी तो उलझे हुए हैं

एक उम्र गुज़र जाती है अपनों को मनाने में
गुज़र गई एक उम्र वो अब तक रूठे हुए हैं

न उन्हें कुछ मिला, न हमें कुछ गिला
तमाशाई हैं के तमाशे की ज़िद पे अड़े हुए हैं।

मेरी नादानी को नादानी समझने की नादानी कर रहे हैं

मेरी नादानी को नादानी समझने की नादानी कर रहे हैं
कैसे बेवकूफ़ हैं ये जो राख से छेड़खानी कर रहे हैं

क्या इन्हें नहीं मालूम? के कुछ शोले अभी बुझे नहीं हैं
शायद आदत से मज़बूर हैं तभी गलती वही पुरानी कर रहे हैं

अब ऐसे नादानों को हर बार क्या माफ़ ही करते रहेंगे
जो माफ़ी मांगकर फिर से वही शैतानी कर रहे है

चलो इनकी हरकतों से कुछ तो फ़ायदा हुआ
हम इनके बीच रह के अब अपनी मनमानी कर रहे हैं

अफ़सोस के ख़ुदा ने इन्हें अफ़सोस तक ना होने दिया
के ये नामुराद आख़िर कौनसी नादानी कर रहे हैं।

#CoffeeAmerica

दोस्तों अब तक आपने कई अलग-अलग जगह कॉफ़ी पीने का लुत्फ़ उठाया होगा
लेकिन क्या आपने कभी कॉफ़ी की उस क़ैफ़ियत को महसूस किया है?

जो उसे पल भर में इतना ख़ास बना देती है
के वो पलक झपकते ही आपका मूड बना देती है

अगर आपने अब तक ये तिलिस्मी तज़ुर्बा हासिल नहीं किया तो दोस्तों डू नॉट फ़िक़र
क्योंकि हाज़िर हैं हम आपकी वाली Special कॉफ़ी लेकर with Extra Sugar

जी हाँ दोस्तों, क्योंकि साड्डे Coffee America की तो बात ही कुछ और है
अपनी टैगलाइन Nobody Makes It Better के बारे में ये 100% Sure है

जयपुर के सीतापुरा इंडस्ट्रियल एरिया में इसकी अलग छाप है
या यूँ कहे के इंजीनियरिंग छात्रों के बीच इसकी तगड़ी धाक है

रोज़ाना कई भावी इंजीनियर्स यहाँ अपना Future Discuss करते हैं
Apex Poornima Regional Kautilya वालेे सब के सब यही मिलते हैं

केवल Coffee ही नहीं और भी कई तरह के Fast Food Available हैं यहाँ
और तो और जनाब हर एक Item की Rate भी Reasonable हैं यहाँ

तो फिर यारों कब आ रहे हो साड्डे कॉफ़ी अमेरिका दी गली
जिस रोज़ भी आओगे मच जाएगी अक्खे Area में खलबली

आधुनिक इस दौर में बाक़ियों से थोड़ा अलग है कॉफ़ी अमेरिका
ज़िंदगी के हसीन लम्हों से लबरेज़ कॉफ़ी मग है कॉफ़ी अमेरिका

जहाँ आप ना केवल ख़्वाबों ख़यालों जैसी कॉफ़ी पियेंगे
बल्कि उस कॉफ़ी की क़ैफ़ियत को भी महसूस कर पाएंगे।

http://www.rockshayar.com

आँखें उसकी भी नम थीं

फ़क़त मेरी ही नहीं आँखें उसकी भी नम थीं
अलविदा कहने वाली ज़ुबाँ बड़ी बेरहम थी

वो अपनी बेगुनाही साबित करता भी तो कैसे?
अदालत ने जो दी थी मोहलत बहुत कम थीं

पहली दफ़ा जब सुना उसे तो कुछ यूँ लगा
मानों शोर से परे वो लहराती हुई सरगम थीं

वो जानती थी जीना, रोज़ मुझे सिखाती थी
दौड़ती इस ज़िंदगी में चाल उसकी मद्धम थीं

उसकी तारीफ़ में बस इतना ही कहना चाहूँगा
के वो साथ मेरे हरक़दम हरदम हमदम थीं

गुज़र गई जब ज़िंदगी तो पता ये चला इरफ़ान
के जो मिली थी वो सितम ज्यादा मरहम कम थीं।

ज़िंदगी लटकता हुआ इक आम है

आज तू जिसके पीछे भाग रहा है
कल तू उससे दूर भागेगा

ज़िंदगी इसी दौड़ का नाम है
ज़िंदगी छलकता हुआ इक जाम है

ज़िंदगी को मुश्किल बनाने की क्या ज़रूरत
ज़िंदगी तो है खूबसूरत इसे चाहिए थोड़ी मोहब्बत

आज तू जिसे पाना चाह रहा है
कल तू उससे पीछा छुड़ायेगा

ज़िंदगी इसी हौड़ का नाम है
ज़िंदगी चलता हुआ क़याम है

ज़िंदगी को भला समझने की क्या ज़रूरत
ज़िंदगी को तो है बस थोड़ा जीने की ज़रूरत

मगर ये बात हमें मौत के वक़्त समझ आएगी
ज़िंदगी तो ज़िंदगी है आख़िर एक दिन गुज़र जाएगी

आज तू जिसका होना चाह रहा है
कल तू उससे निज़ात चाहेगा

ज़िंदगी इसी हड़बड़ी का नाम है
ज़िंदगी लटकता हुआ इक आम है।

ज़िंदगी लटकता हुआ इक आम है

आज तू जिसके पीछे भाग रहा है
कल तू उससे दूर भागेगा

ज़िंदगी इसी दौड़ का नाम है
ज़िंदगी छलकता हुआ इक जाम है

ज़िंदगी को मुश्किल बनाने की क्या ज़रूरत
ज़िंदगी तो है खूबसूरत इसे चाहिए थोड़ी मोहब्बत

आज तू जिसे पाना चाह रहा है
कल तू उससे पीछा छुड़ायेगा

ज़िंदगी इसी हौड़ का नाम है
ज़िंदगी चलता हुआ क़याम है

ज़िंदगी को भला समझने की क्या ज़रूरत
ज़िंदगी को तो है बस थोड़ा जीने की ज़रूरत

मगर ये बात हमें मौत के वक़्त समझ आएगी
ज़िंदगी तो ज़िंदगी है आख़िर एक दिन गुज़र जाएगी

आज तू जिसका होना चाह रहा है
कल तू उससे निज़ात चाहेगा

ज़िंदगी इसी हड़बड़ी का नाम है
ज़िंदगी लटकता हुआ इक आम है।

“लौटकर आई सदा”

पहले तो अपनी क़िस्मत सँवारता हूँ
फिर गले लगने को बाहें पसारता हूँ
शिकारे से गीले पानी को निहारता हूँ
मैं अपनी आँखों में तुमको उतारता हूँ
चिनार के बगीचों में वक़्त गुज़ारता हूँ
बर्फ़ीले पहाड़ों पे तुमको पुकारता हूँ

और तुम हो कि कभी आती ही नहीं
हाँ लौटकर ये सदा ज़रूर आती है

के किसे तलाश रहे हो मुसाफ़िर?
तुम किस से हो रहे हो मुतासिर?

वो जिसे तुम ढूँढ रहे हो
वो खोयी ही कब थी?
वो जिसे तुम पुकार रहे हो
दूर गई ही कब थी?

ग़ौर से देखो वो हर जगह है
करती वो इश्क़ तुमसे बेपनाह है

उसे कहाँ तुम इन वादियों में ढूँढ रहे हो
वो तो तुम्हारे तसव्वुर की मलिका है
उसे कहाँ तुम इन पहाड़ों पे खोज रहे हो
वो तो तुम्हारे मुक़द्दर की लैला है

तुम्हारा और उसका साथ तो सदियों से तय है
इस बात की गवाह कायनात की हर शै है

छोड़ तू सारी फ़िक्रे अपनी
तोड़ दे दिल के वहम
तब जाकर मिलेगी तुझे वो तेरी लैला
वो तेरी सनम
और फिर तू जी भरके उससे खूब बातें करना
जिसका ज़िक्र तू अक्सर तन्हाई से करता है

क्योंकि इस बार लौटकर आने वाली सदा
उसे अपने साथ लेकर आई है
खुश हो जा
उसे अपने साथ लेकर आई है।

तुम आओ तो बात बने

कहती है तन्हाई अक्सर ये मुझसे के तुम आओ तो बात बने
थक गई निगाहें राह तकते-तकते तुम आओ तो बात बने

तेरी परछाई का नामोनिशां नज़र तक नहीं आता कहीं अब
इंतज़ार में है इंतज़ार जो मिलने तुम आओ तो बात बने

रुख़्सत के वक़्त भले ही अपना सब कुछ वापस ले जाना
पर अलविदा से पहले इक़रार करने तुम आओ तो बात बने

मेरे नसीब में क्या है ये तो मैं नहीं जानता
मगर हबीब मेरे गर नसीब में मेरे तुम आओ तो बात बने

एक अर्से से दिल ये मेरा टूटा हुआ आईना है
गर इस आईने में अक्स देखने तुम आओ तो बात बने

दूरियों ने बहुत कोशिश की हैं हमें दूर-दूर करने की
जो अब दिल से दूरियां मिटाने तुम आओ तो बात बने

ये ज़िंदगी तो ख़ैर यूँही तन्हा गुज़र गई इरफ़ान
गर फ़िरदौस में साथ मेरा देने तुम आओ तो बात बने।

मैं काग़ज़ पर दिल की बेचैनियाँ उड़ेलता हूँ

जो कह नहीं पाता उसे लिख देता हूँ
मैं काग़ज़ पर दिल की बेचैनियाँ उड़ेलता हूँ

मुझे भला किसी सितमगर की क्या ज़रूरत
मैं अपने ज़ख़्म यहाँ ख़ुद कुरेदता हूँ

उसने बड़ी चालाकी से पीठ पर वार किया
इसीलिए तो धोखे से इतना डरता हूँ

सुना है लोग मुझको मजनूँ बुलाते हैं
बुलाएंगे ही सही हर वक़्त लैला-लैला करता हूँ

तुमने आने में ज़रा देरी कर दी
अलविदा ओ मेरी लैला अब मैं चलता हूँ।

सर्दियों में मुँह से निकलते धुएं की मानिंद है ये ज़िंदगी

सर्दियों में मुँह से निकलते धुएं की मानिंद है ये ज़िंदगी
वज़ूद जिसका बस कुछ देर तक ही कायम रहता है
बाद उसके वो हवा हो जाता है
ना जाने कहाँ खो जाता है
या यूँ कहे के फ़ना हो जाता है

मगर जितनी देर भी वो कायम रहता है
कई तरह के अलग-अलग नज़ारे दिखाता है

कभी वो हँसी का छल्ला बन जाता है
तो कभी ग़मों का मोहल्ला सजाता है
कभी वो खुशियों का मल्लाह बन जाता है
तो कभी ख़ाहिशों का दुमछल्ला कहलाता है

सर्दियों में मुँह से निकलते धुएं की मानिंद है ये ज़िंदगी
वज़ूद जिसका बस एक उम्र तक ही कायम रहता है
बाद उसके वो हवा हो जाता है
गहरी वाली नींद में सो जाता है
या यूँ कहे के धुँआ हो जाता है।

#poetry #rockshayar #shayari #nazm

तुम्हारा हँसना बारिश से कम नहीं लगता मुझे

तुम्हारे चेहरे पर ये ग़म नहीं जचता मुझे
तुम्हारा हँसना बारिश से कम नहीं लगता मुझे

पहली दफ़ा जब मिली थी मेरे लिए अजनबी थी
चेहरा ये तेरा अजनबी हाँ अब नहीं लगता मुझे

डर लगता है आज भी फिर से टूट जाने का
पर साथ तुम्हारे जब होता हूँ डर तब नहीं लगता मुझे

सुना है मुझे ग़म देने वाले आजकल ख़ुद ग़मज़दा हैं
अफ़सोस के ग़म भी अब तो ग़म नहीं लगता मुझे

बेशक मौजूद हैं यहाँ एक से बढ़कर एक फ़नक़ार
पर अपना क़िरदार किसी से कम नहीं लगता मुझे।

My Rock Style

मेरा लहजा समझने वाले खुद को भूल जाते हैं
कई दिनों तक खुद में वो मुझको ही पाते हैं

हालांकि मैं ये सब जानबूझकर नहीं करता हूं
मैं उनका दिल बहलाता हूं वो मेरे ज़ख़्म सहलाते हैं

“दहशतगर्दो के नाम मेरा ये पैग़ाम”

यूँ तो नाम से मैं भी एक ख़ान हूँ,
दीन-ओ-मज़हब से मुसलमान हूँ

कुरआन-ओ-हदीस की रौशनी में,
अल्लाह रसूल पर रखता ईमान हूँ

हलाल-हराम में फर्क़ समझकर,
इस्लाम को मानने वाला इंसान हूँ

नबी के तरीके ज़िन्दगी में लाकर,
नेकी की राहों पर गतिमान हूँ

मुल्क़ में अम्न-ओ-चैन के लिए,
इंसानियत की ख़ातिर क़ुर्बान हूँ

जो भी हूँ मैं जैसा भी हूँ इरफ़ान
नहीं मगर तुम्हारी तरह हैवान हूँ

© RockShayar Irfan Ali Khan

जय हिंद

सुन बे नापाक पड़ोसी तुझे हम अब और मौका नहीं देंगे
खत्म हुई मोहलत तेरी अब तो बस घर में घुसकर मारेंगे

सालों से तू हमारे सब्र को कमज़ोरी समझता रहा
खुल्लमखुल्ला हमेशा चोरी करके सीनाजोरी करता रहा

अपने हालात के लिए तू खुद जिम्मेदार है
दहशत का गढ़ तू पूरे इस्लाम का गद्दार है

ना तो तुझे मासूम बच्चों की चीखें सुनाई देती हैं
ना ही अपनी आवाम की बदहाली दिखाई देती हैं

सत्तर सालों से एक पागल कुत्ते की तरह भौंक रहा है
साड्डी जनता को भुखमरी व दहशतगर्दी में झोंक रहा है

नित नये राग बदलकर जंग की गीदड़ भभकी देता है
हर बार हाथ मिलाने के बहाने पीठ में छुरा भोकता है

कुत्ते की पूँछ न तो कभी सीधी हुई न ही कभी होगी
अब तो बस तेरी हालत कुछ इसी तरह पतली होगी

सुन बे नामुराद पड़ोसी अब तुझे हम और मौका नहीं देंगे
सब्र हमारा खल्लास हुआ अब तो यूँही घर में घुसकर मारेंगे

#RockShayar

सोचते-सोचते

कहाँ से कहाँ पहुँच जाता है मनवा सोचते-सोचते
के कहीं कोई नज़र नहीं आता हैं रस्ता देखते-देखते

अब और क्या तोड़ोगे हमारे दिल को सनम
पत्थर हो चुका है दिल भी तो ये सज़ा सहते-सहते

दर्द की वो इंतहा आकर गुज़र भी गयी
आंसू भी हंसने लगे हैं अब तो यहाँ बहते-बहते

कुछ तो तक़्दीर के तिलिस्म,
और कुछ ख़ाहिश-ए-जिस्म
क्या से क्या बन जाता है इंसान यहाँ देखते-देखते

ग़ैरों से शिकवा भला, करना ही क्या इरफ़ान यहाँ
एक उम्र गुज़र जाती हैं यहाँ अपना पता पूछते-पूछते।

आईने से बातें

आईने से आख़िर क्या बातें करते हो
बताओ कभी
तुम दोनों के बीच हुई वो अनकही बातें
जो न बता सको तो जताओ कभी
तुम दोनों के दरमियां वो अधूरी मुलाक़ातें
जो न जता सको तो सुनाओ कभी
तुम दोनों के भीतर दबी वो अनसुनी आहें
जो न सुना सको तो दिखाओ कभी
तुम दोनों की आँखों में ठहरी वो गीली यादें

आईने से आख़िर क्या बातें करते हो
बताओ कभी
यूं देर तलक आलम-ए-तन्हाई में
आईने के भीतर किसे निहारते रहते हो
अनगिनत अक्स के बीच
आख़िर किसे तलाशते रहते हो
बताओ कभी
चलो अब बता भी दो