क्यों चाहता हूं तुम्हें मैं ?

खुद मुझको भी नहीं पता, क्यों चाहता हूं तुम्हें मैं
हां जानना भी नहीं चाहता, क्यों सोचता हूं तुम्हें मैं

तुमको सोचने से ज़ेहन को ताज़गी मिलती है
तुम्हारी सादगी देखकर मेरी ज़िंदगी खिलती है

तुमने अपनी हंसी में कई अनमोल मोती छुपा रखे हैं
जब भी हंसती हो, ये दिल की ज़मी पे गिरने लगते हैं

उठाने को जब झुकता हूं, तुम्हारी झुकी हुई नज़रें नज़र आती हैं
हर बार ये सुरमई निगाहें तेरी, पहले से ज्यादा अपना बनाती हैं

कई बार तेरे नाम को अपनी हथेली पे लिखकर मिटा चुका हूं
कई बार तेरे चेहरे को अपनी पलकों पे रखकर सहला चुका हूं

कई बार सपने और दिल टूट चुके हैं, सो आदत हो चली है
घाव वो सारेे भर चुके हैं, दर्द से दिल को राहत हो चली है

ये मोहब्बत नहीं तो और क्या है? क्या है आखिर?
पता चले तो बताने ही सही, पर चली आना कभी

खुद मुझको भी नहीं पता, क्यों चाहता हूं तुम्हें मैं
हां जानना भी नहीं चाहता, बस चाहता हूं तुम्हें मैं

वो पूछती है, मेरे लिए क्यों लिखते हो तुम?

वो पूछती है, मेरे लिए क्यों लिखते हो तुम?
हर जगह आजकल इतने क्यों दिखते हो तुम

उसे क्या बताऊं, ये मन मेरा उसके मन से जुड़ गया
बैठा था कई दिनों से डाली पे जो, वो परिंदा उड़ गया

गर अब भी ना समझ पाए वो, तो अब और मैं क्या करूं
अब तक किया है जितना, प्यार उससे कहीं ज्यादा करूं

मुझको लगता है शायद, ख़बर है उसे भी मेरे दिल की
वरना यूं कोई क्यों पूछता हैं, राहों से डगर मंज़िल की

वो पूछती है मुझे इतना क्यों सोचते हो तुम
हर पल आजकल साथ मेरे क्यों होते हो तुम

उसे क्या बताऊं, ये दिल मेरा उसकी आस में बेचैन है
ना दिन का पता है इसे, ना होती इन दिनों कोई रैन है

गर अब भी ना समझ पाए वो, तो अब और मैं क्या करूं
अब तक किया है जितना, इश्क़ उससे कहीं ज्यादा करूं

मुझको लगता है शायद, ख़बर है उसे भी मेरे दिल की
वरना यूं कोई क्यों पूछता हैं, तूफ़ा से ख़बर साहिल की

बहुत मन था मेरा तुझसे मिलने का

बहुत मन था मेरा तुझसे मिलने का
जिस रोज़ तूने मिलने से मना कर दिया
मैं तो फिर कहीं नहीं गया उस रोज़ 
मगर ये बावरा मन मेरा मिलने तेरे घर गया

हवाओं के संग-संग आया था, सो पता कैसे चलता
पता पूछते पूछते आखिर इसका भी दिल भर आया
लौट आया फौरन, ना रुक पाया ज़रा भी देर वहां
इसे मालूम था, बेचैनी मेरी सता रही होगी मुझेे
आखिर अकेला छोड़कर मुझे, ये कहां रह पाता है
जहां भी जाता है, थोड़ी देर में लौट आता है

आकर जो इसने तुम्हारा हाल सुनाया
है वो अब तक मेरी सांसों में समाया

सुबह से उस रोज़, की थी तुमसे मिलने की तैयारी
इन आँखों में बस चुकी थी, तुम्हें देखने की बेक़रारी

और तुम हो, कि अपने आशिक को यूं तड़पा रही हो
हर रोज़ बेवज़ह बस इंतज़ार के तोहफ़े दिए जा रही हो

ख़ैर कोई बात नहीं, किसी दिन तो तुम्हें एहसास हो ही जाएगा
के जितनी शिद्दत से मैंने चाहा है तुम्हें, ना कोई और चाहेगा

बस इतना याद रखना, मेहरबानी नहीं मोहब्बत का मुंतज़िर हूं
जो ग़ौर करोगे कभी तो पता चलेगा, मैं भटकता हुआ एक दिल हूं…

 


			

वही पूछ बैठी मुझसे यूं देते हो किसे तुम सदाएं

मैं लिखता रहा जिसके लिए शामों सहर वफ़ाएं
वही पूछ बैठी मुझसे यूं देते हो किसे तुम सदाएं

अब मैं उसे समझाऊं, या अपने नादान दिल को
के तुम दोनों ने ही तो दी है मुझे जीने की अताएं..

तुमसे बात करके दिल को सुकून मिलता है

तुमसे बात करके दिल को सुकून मिलता है
तुम्हें याद करके चेहरा मेरा ख़ूब खिलता है

चोट तुमको लगती है और दर्द मुझको होता है
तेरी आँखें याद करके दिल सपने नए संजोता हैं

मिलने को बेताब हूं, बेचैन बेहिसाब हूं
आहिस्ता पढ़ना मुझेे, मैं एक बंद किताब हूं

पल दो पल की मुलाक़ात भी प्यारी लगती है
तुम्हारे बिन साँसें अब बोझिल सारी लगती हैं

तुमने तो बड़ी आसानी से एक रोज़ अलविदा कह दिया
पर तु्मको क्या ख़बर हमने दिल अपना वहीं रख दिया

वादा है मेरा, तुम्हारे हर दर्द को अपना बना लूंगा
लफ़्ज़ों की ही तरह दिल की बातें तुमको बता दूंगा

अब और दूर रहके, इस तरह तो ना सताओ जानाँ
ख़ातिरदारी करेंगे खूब, दिल के दर पे आओ जानाँ

तो फिर कब मिल रही हो जानाँ, ठीक उसी जगह पे आना
जहां छोड़के गया था मैं वो दिल अपना, हां वो दिल अपना

तेरे तो नाम में ही सुर है…

तेरे तो नाम में ही सुर है
जब भी लेता हूँ, आस-पास कई साज बजने लगते हैं
बेहद दिलकश है तेरी आवाज़, अंदाज़, और एहसास
तेरे बारे में जब लिखता हूँ, शहद से मीठे लगते हैं अल्फ़ाज़
इस बात का ख़ास ख्याल रखता हूँ
के ज़िक्र तेरा तन्हाई में करता हूँ
ताकि पहचान तुम्हारी और एहसास मेरे महफ़ूज़ रह पाएं
तुमने कहा था इक रोज़ मुझसे, के पता ना चले किसी को
बस इसी वादे के चलते मुझे भी अब जाकर ये मालूम हुआ
के कुछ तो है तेरे मेरे दरमियां, एक रूहानी सा राब्ता
जो सुकून देता है मुझे, हर पल हर घड़ी यूं गहरा।

तेरी तो बातों में ही धुन है
जब भी सुनता हूँ, पांव मेरे खुद बखुद थिरकने लगते हैं
तेरी शहनाई पर एहसास मेरे, बाहें खोले यूं नचने लगते हैं
बहुत ख़ास है, ये प्यास, सांस, और एहसास
तेरे बारे में जब सोचता हूँ, हक़ीक़त से ज्यादा अच्छे लगते हैं ख़याल
इस बात का ख़ास ख्याल रखता हूँ
के मोहब्बत तुमसे छुप छुपके करता हूँ
ताकि पहचान तुम्हारी और जज़्बात मेरे महफ़ूज़ रह पाएं
मगर अब और ज्यादा दिनों तक मैं छुपा नहीं पाऊंगा
इतना प्यार करता हूँ तुमसे, के कभी बता नहीं पाऊंगा
अब तो समझ जाओ, पास मेरे आ जाओ
लफ़्ज़ों को पढ़के मेरे, संग मेरे मुस्कुराओ…

Happy birthday Aamir bhai..(Rj Aamir)

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है मखमली आवाज़ का जादूगर वो
या कहूं के अंदाज़े बयां का कारीगर वो

गुलों की तरह महकता है, वो सावन की तरह बरसता है
या कहूं के दिलों को जीतने वाला बाज़ीगर वो

रातों को ज़िंदा करता है एहसास के पुर्ज़े वो
आंखों से बयां करता है अल्फ़ाज़ के क़तरे वो

ज़ुबां तो जैसे शहद से लिपटा हुआ एक लिबास है
वो एक शख़्स नहीं यकीनन मुकम्मल एहसास है

है मखमली आवाज़ का जादूगर वो
या कहूं के अंदाज़े बयां का कारीगर वो

है आमिर वो, दिलकश आवाज़ का साहिर वो
नूरानी क़ैफ़ियत से करता सबको मुतासिर वो…

 


			

मुझे तुमसे मोहब्बत हो गई

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एक बात कहूँ
मुझे तुमसे मोहब्बत हो गई
दिल को दिल की आदत हो गई
ज़िंदगी जीने की इज़ाज़त हो गई
तन से मन की बग़ावत हो गई
ख़्वाबों में ही सही, ज़ियारत हो गई
एक बात कहूँ
मुझे तुमसे मोहब्बत हो गई
दिल को दिल की आदत हो गई

लबों पे आके लफ़्ज़ ठहर जाते हैं
आँखों में अधूरे अक्स नज़र आते हैं
काग़ज़ पे इश्क़ के फ़साने उतर आते हैं
पलकों के पुराने आशियाने महक जाते हैं
यूँही तो नहीं, हम दीवाने कहलाते हैं
एक बात कहूँ
मुझे तुमसे मोहब्बत हो गई
दिल को दिल की आदत हो गई

दर्द से रूह को राहत हो गई
चाहा था जिसे वही चाहत हो गई
ना छूटे कभी जो वो आदत हो गई
ना टूटे कभी जो वो इमारत हो गई
ज़िंदगी आजकल इबादत हो गई
एक बात कहूँ
मुझे तुमसे मोहब्बत हो गई
दिल को दिल की आदत हो गई…


			

फिर कहने को भले ही वो मुझसे दूर है…

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कोई बात तो उसके किरदार में ज़रूर है
लबों पे दुआ, चेहरे पे हया का नूर है

मुझसे ज्यादा मेरे दिल के क़रीब है, हबीब है, ज़ेहनसीब है
फिर कहने को भले ही वो मुझसे दूर है...

			

काँच के गिलास में मिलने वाली चाय हो तुम…

काँच के गिलास में मिलने वाली चाय हो तुम
पीकर जिसे बारिश में दिल ये खुश हो जाता है
या फिर कहूँ के बंजारे के लिेए वो सराय हो तुम
ठहरकर जिसमें बंजारे को घर का एहसास होता है
कभी कभी तो यूँ लगता है बारिश की वो बौछार हो तुम
भीगकर जिसमें बेसबर इस रूह को राहत मिल जाती है
हाँ अगर कहूँ के धूप में साया देता शजर हो तुम
पाकर जिसकी छाव सुकून वाला सुकून मिलता है

बेरोज़गार दिल को बाद महीने के मिली सैलेरी हो तुम
पाकर जिसे ख़यालों का खाता खुशियां क्रेडिट करता है
या फिर कहूँ के गर्मी की वो छुट्टियां हो तुम
मनाकर जिन्हें स्टूडेंट यह मन फिर से खिल उठता है
कभी कभी तो यूँ लगता है शायर की वो क़लम हो तुम
डूबकर जो हर दिन कुछ नया अनकहा लिख जाती है
हाँ अगर कहूँ के मीर की वो ग़ज़ल हो तुम
पढ़कर जिसे दिल में दबे अरमां जगने लगते हैं

हफ़्ते भर की थकन उतारने वाला वो इतवार हो तुम
पाकर जिसे पूरे वीक की वीकनैस छूमंतर हो जाती है
या फिर कहूँ के सफ़र-ए-हयात में वो विंडो सीट हो तुम
बैठकर जहां पे हर मुश्किल सफ़र आसां लगने लगता है
कभी कभी तो यूँ लगता है राइटर का वो थॉट हो तुम
बोट पे जिसकी सवार होके हर रोज नया वो नोट लिख देता है
हाँ अगर कहूँ के मेरे ख़यालों की मलिका हो तुम
सोचकर तुम्हें हर बार प्यार से प्यार होने लगता है

अब तक तो तुम यह बात बहुत अच्छी तरह समझ चुकी होंगी
के मेरे दिल के साथ साथ मेरे लफ़्जों पर भी हुकूमत चलती है तेरी
जो ना लिखूं तु्म्हारे बारे में ज़रा भी
तो ये सारे अल्फ़ाज़ बाग़ी होकर गीला कर देते हैं हर वो काग़ज़
जिस पर लिखने की खातिर अपने जज़्बात उड़ेला करता हूँ
और फिर इसी नमी के चलते गुम हो जाते हैं वो सारे अल्फ़ाज और एहसास
जिनमें छुपाकर रखता हूँ हर रोज़ मैं एक तस्वीर तुम्हारी

काँच के गिलास में मिलने वाली चाय हो तुम
पीकर जिसे बारिश में दिल ये खुश हो जाता है
या फिर कहूँ के बंजारे के लिेए वो सराय हो तुम
ठहरकर जिसमें बंजारे को घर का एहसास होता है….RockShayar

 


			

वो जो हो चुके हैं खुद अपने लिए भी पराये

नज़रों पे चाहतों का चश्मा चढ़ाएं
तक रहे हैं कब से आवारगी के हमसाये

खुदगर्ज़ी की तोहमत क्या लगाएं उन पे
वो जो हो चुके हैं खुद अपने लिए भी पराये

पूरा एक महीना हो गया है तुमको देखे हुए….Miss You…

पूरा एक महीना हो गया है तुमको देखे हुए
अब तो आँखों ने भी यादों से सांठगांठ कर ली हैं
तभी तो इन दिनों ज्यादातर बहती ही रहती हैं
आजकल तो इन्हें केवल ख़्वाबों पर ही यक़ीन रह गया हैं
हक़ीक़त वाला दीदार भी तो महज एक ख़्वाब ही हो चुका है
बस इसी डर से बंद रखता हूँ मैं अपनी आँखेंं
के कहीं चला ना जाए ख़्वाब तेरा बुरा मानके
गर खुली रहेंगी ये आँखें, तो धुंधली हो जाएगी वो फोटू
दिलो दिमाग पे जिसने मेरे, किया है ऐसा खूबसूरत जादू
के अब तो हर जगह तुम ही तुम नज़र आती हो
बंजर में भी बारिश वाला वो एहसास दे जाती हो
पाकर जिसे मैं फिर से वो वाला मैं हो जाता हूँ
जीना जिसे अच्छा लगता है, हाँ बहुत ही अच्छा लगता है
महीने भर से भी ज्यादा हो गया है तुमको देखे हुए
अब तो पलकों ने भी यादों से सांठगांठ कर ली हैं
तभी तो इन दिनों ज्यादातर गीली ही रहती हैं
क्या पता इन्हीं अश्क़ों के सदक़े में तू मिल जाएं कहीं
और मैं जीने लगूं फिर से 
सोहबत में तेरी
मोहब्बत में तेरी
चाहत तू मेरी
आदत तू मेरी...

तुम इन दिनों ईद का चांद हो गई हो

तुम भले ही इन दिनों ईद का चांद हो गई हो
पर मैंने तुम्हारे हिस्से की वो सेवइयां 
संभालकर रखी हैं अब तक
मिलो कभी, तो अपने हाथों से खिलाऊं तुम्हें
हाँ पास बैठो कभी, तो जी भरके हंसाऊं तुम्हें
क्योंकि तुम जब हंसती हो 
तो हवाओं में हर तरफ खुशी की एक लहर फैल जाती है
और तुम जब ख़ामोश होती हो 
तो कायनात का हर ज़र्रा तुम्हारी धड़कन बनके धड़कने लगता हैं
हाँ तुम जब धीरे से शरमाती हो
तो काले घने बादल उमड़ आते हैं
फिर जब यूं हौले से दिल चुराती हो 
तो वो बारिश के तोहफ़े मुझे हज़ार दे जाते हैं
इस बारिश में भीगने से ज़ुकाम नहीं होता है
इस बारिश में भीगनेे से तो आराम मिलता है
मिलो कभी इत्तेफ़ाकन ही ऐसी बारिश में, तो बताऊं तुम्हें 
अब तक जितना पाया है, हाँ उससे कहीं ज्यादा पाऊं तुम्हें
तुम भले ही इन दिनों ईद का चांद हो चुकी हो
पर मैंने तुम्हारे हिस्से की वो सेवइयां 
सहेजकर रखी हैं अब तक
मिलो कभी, तो अपने हाथों से खिलाऊं तुम्हें
हाँ पास बैठो कभी, तो जी भरके हंसाऊं तुम्हें
क्योंकि तुम जब हंसती हो तो फिर से ज़िंदा हो जाता हूँ मैं
यूं हर बार बार-बार फिर से जी उठना अच्छा लगता है मुझे
तन्हाई की बजाए तुम्हारे साथ जीना अच्छा लगता है मुझे...
 


			

सच में यार, बहुत प्यार करता हूँ तुम्हें

तुम्हारे माथे पे ज़ुल्फ़ की वो इक लट प्यारी लगती है मुझे
कई बार मैंने तुम्हें इस बारे में बताने का भी सोचा है
सच में यार, बहुत प्यार करता हूँ तुम्हें मैं
बस कहने को लफ़्ज़ ही नहीं मिल पाते कभी
हालांकि लोग कहते हैं, मैं एक शायर हूँ
लफ़्ज़ों से रिश्ता बहुत गहरा है मेरा
मगर जब भी दिल की बात कहने की बारी आती है
लफ़्ज़ों से रिश्ता मेरा एक अजनबी की तरह हो जाता है
कल तक जिस क़लम को हमदम कहा करता था
आज वही क़लम साथ देने से इंकार कर देती है
मुझे लगता है ये सब जज़्बातों का तिलिस्म हैं
बिना रूह के इस जहान में बेजान हर जिस्म हैं
तुम वही गुमशुदा रूह हो मेरी, जो बरसों पहले बिछुड़ गई थी
अब जाकर मिली हो, इस बार तो छोड़कर नहीं जाओगी ना…

दिल ने ये पैग़ाम लिखा है

मेरे दिल के हर हिस्से पे तेरा नाम लिखा है
जो पढ़ सको तो पढ़ लेना, दिल ने ये पैग़ाम लिखा है

बहुत हो गया, यूं चोरी छुपे देखना, जज़्बात पलकों पे सहेजना
इस बार तो दिल ने फ़रमान ये सरेआम लिखा है

दूरियां भले ही मुझे तुमसे, दूर कर दे पर ऐ सनम
ज़ेहन ने तसव्वुर पे तेरे बेशकीमती ईनाम रखा है

शायर हूँ तो ग़ज़ल में बात करता हूँ, ग़ज़ल में बात कहता हूँ
मोहब्बत का ये पहला ख़त मैंने तेरे नाम लिखा है

नज़रें मिली जिस रोज़ तुमसे, तेरा हो गया मैं तो ओ जानाँ 
कभी ग़ौर से पढ़ना ये ग़ज़ल, प्यार का पयाम लिखा है

बहुत ग़म सह चुके हैं, बहुत तन्हा रह चुके हैं
पढ़ो कभी निगाहें, निगाहों में किस्सा तमाम लिखा है

पहुंचा सकूं तुम तक, अपने दिल की हर इक सदा
बस इसीलिए तो जानाँ, मैंने यह क़लाम लिखा है…

 
 
 

तुम्हें तो पता भी नहीं, कितना चाहता हूँ तुम्हें

तुम्हें तो पता भी नहीं, कितना चाहता हूँ तुम्हें
पता चले भी तो कैसे, बेअल्फ़ाज़ ख़त लिखता हूँ तुम्हें

पहली बार जिस रोज़ तुमको देखा था, बस देखता ही रह गया
बाद उसके अब हर जगह बेवज़ह देखता हूँ तुम्हेंं

तुम्हारा चेहरा किसी की याद दिलाता है, पता नहीं किसकी
सोच भी खुद पड़ जाएं सोच में, इतना सोचता हूँ तुम्हें

तु्म्हारी हंसी का वो इक क़तरा, संभालकर रखा है दिल में
जब भी दिल करता है, बेतहाशा जीता हूँ तु्म्हें

आँखें तुम्हारी हैं ग़ज़ल, चेहरा जैसे कोई किताब
जी भरके देखता हूँ पहले, फिर धीरे-धीरे पढ़ता हूँ तुम्हें

पता नहीं तुम कौन हो, हाँ दिल-ए-नादान का चैन हो
दरगाह पे धागे बांधकर, मन्नतों में मांगता हूँ तुम्हें

मैं ज्यादा तो कुछ नहीं जानता, ये क्या हो रहा हैं, ये क्यों हो रहा हैं
बस अपनी हर इक साँस में महसूस करता हूँ तु्म्हें…

तुम्हारी तस्वीर देखने के बाद ही आजकल मुझे नींद आती है 

तुम्हारी तस्वीर देखने के बाद ही आजकल मुझे नींद आती है 
जो ना देखू तुम्हारा नक़्श तो नींद कोसों दूर चली जाती है
लगता है तुमने सुकून भरी नींद को सुरमे की तरह अपनी आँखों में लगा लिया है
और जो बाक़ी बचा कुचा चैन-ओ-सुकूं था वो तुमने अपने आँचल में छुपा दिया है
हालाँकि तुम्हें यह बखूबी पता चल जाता है 
कि मैं देर रात तक तुम्हारी तस्वीरें देखता रहता हूँ
देर रात तक तुम्हें यूं तकने के लिए माफ़ी चाहता हूँ
मगर मैं करूँ भी तो क्या करूँ आखिर
मोहब्बत का मारा दिल ये बेचारा
इज़हार-ए-मोहब्बत करने से डरता है बहुत
इसीलिए तो अक्सर रात रात भर
तुम्हारी तस्वीरों के ज़रिए तुम्हें अपने आसपास महसूस कर लेता है

अब तक तुम्हारी कई तस्वीरें देख चुका हूँ मैं
हर तस्वीर में तुम बेनज़ीर बेहद हसीन लगती हो
किसी में माहज़बीं तो किसी में नाज़नीन लगती हो
कभी चश्मिश बन जाती हो, तो कभी बिना चश्मे के चैन चुराती हो
कभी ख़्वाहिश बन जाती हो, तो कभी बारिश बनके ख़ूब भिगाती हो
कभी फसल की तरह लहराती हो, तो कभी मासूम परी सी शर्माती हो
कई अलबेले से रंग नज़र आते हैं तुम्हारी तस्वीरों में
जीने के बेहतर ढंग नज़र आते हैं तु्म्हारी तस्वीरों में
तु्म्हारी हर एक तस्वीर मेरे लिए बहुत अनमोल हैं
नज़रों से देखकर इन्हें अपने दिल में सहेज लेता हूँ

तस्वीरों के इस तोहफ़े के लिए बेहद शुक्रिया
उम्मीद करता हूँ अगली बार जब भी तुम्हारी तस्वीर देखूंगा
तो तुम उस तस्वीर से बाहर निकलकर मेरे सामने आ जाओगी
और तब बताऊंगा यूं तुम्हें 
के कितना चाहता हूँ तुम्हें…

तो अच्छा लगता है…

तुम जब बात करती हो तो अच्छा लगता है

तुम जब पास रहती हो तो अच्छा लगता है
 
तुमसे दूर जाना, मुमकिन नहीं है जाँना
तुम जब साथ रहती हो तो अच्छा लगता है
 
पाकर यह सोहबत तेरी, मुकम्मल हो गई मोहब्बत मेरी
तुम जब साथ चलती हो तो अच्छा लगता है
 
पल भर की जुदाई, सदियों से लंबी लगती है
तुम जब पास बैठती हो तो अच्छा लगता है
 
आज़ाद हवा सी उड़ती रहो, हरदम ओ हमदम
तुम जब खुलके बहती हो तो अच्छा लगता है
 
चेहरा यह तुम्हारा, है सावन की पहली बारिश
तुम जब अल्हड़ हँसती हो तो अच्छा लगता है
 
वैसे तो नक़ाबपोश चेहरा मेरा, इज़ाज़त नहीं देता किसी को

पर जब तुम मुझे यूं देखती हो तो अच्छा लगता है।

जब कई दिन हो जाते हैं तुमको देखे गए

जब कई दिन हो जाते हैं तुमको देखे गए

तो नज़रों को अपनी काबिलियत पे शक होने लगता है
 
निगाहों का अपनी निगाह पर यूं शक करना
उस वक़्त और भी पुख़्ता हो जाता है
जब ख़्वाब में भी तुम कहीं नज़र नहीं आती हो
हरज़ाई सी हकीकत बनकर ज़ेहन से उतर जाती हो
हर बार दूरियों का दामन थामकर दूर कहीं निकल जाती हो
 
इस बार सोच रहा हूँ
कि उस सोच को ही दबोच लू
जिस सोच में तेरा एहसास बसता है
गर नहीं हुआ जिस सोच में तेरा एहसास
तो उस सोच को ही नज़रों से खरोंच दूंगा
वैसे भी दिल को आजकल दर्द सहने का शऊर आ गया है
अजनबी राहों पर तन्हा चलने का यह फ़ितूर भा गया है
 
जब कई दिन हो जाते हैं तुमको सोचे हुए
तो ख़यालों को अपनी क़ैफ़ियत पे शक होने लगता है
इस शक को दूर करने का अब एक ही तरीका है

हमें मिलकर कुछ यादें सहेज लेनी चाहिए…

रोज़ाना तुमपे कुछ लिखने की सोचता हूँ….

रोज़ाना तुमसे बात करने की सोचता हूँ

रोज़ाना तुमपे कुछ लिखने की सोचता हूँ
 
रोज़ाना मगर उन अल्फ़ाज़ों की तलाश अधूरी रह जाती हैं
जिन अल्फ़ाज़ो के ज़रिए मैं तुम तक वो एहसास पहुंचा सकूँ
 
रोज़़ाना मगर उस एहसास की प्यास अधूरी ही रह जाती हैं
जिस एहसास के ज़रिए मैं तुम्हें अपने दिल की आवाज़ सुना सकूँ
 
जिन अल्फ़ाज़ों के साये तले मैं अपने वो ज़ख़्म सी रहा हूँ
जिस एहसास के साये तले मैं आजकल दोबारा जी रहा हूँ
 
हां वही मखमली अल्फ़ाज़, पढ़कर जिन्हें दिल की बेचैनियां दूर हो जाती हैं
हां वही सुरमई एहसास, महसूस कर जिसे जिन्दगी नूर से तर हो जाती है
 
हां वही अजनबी आवाज़, सुनकर जिसे मेरी धड़कनें तेज़ होने लगती हैं
हां वही मयकशी अंदाज़, देखकर जिसे पलकें नए सपने बुनने लगती हैं
 
रोज़ाना तुमसे बात करने की सोचता हूँ
रोज़ाना तुमपे कुछ लिखने की सोचता हूँ
 
रोज़ाना मगर ना तो वो अल्फ़ाज़ मिलते हैं, ना ही वो एहसास
अब तो बस दिल में बस चुकी है, पूरी तरह से एक ऐसी प्यास
 
जिसको अब भी है, तेरे लौट आने की आस
जिसको अब भी है, तेरे मिल जाने की आस
 
इसी आस ने तो अब तक ज़िंदा रखा है मुझे
वरना वक़्त ने तो कई साज़िशें की थी मौत की
 
मगर मैंने इन सांसों से किया था, सौदा एक सच्चा

मुझे यक़ीं था है और रहेगा, यह इश्क़ मेरा है सच्चा।

तुम बस एक ख़याल नहीं हो…

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तुम बस एक ख़याल नहीं हो, जो ज़ेहन की तश्तरी से भाप बनकर उड़ जाएं

तुम तो दरअसल एक ऐसा सवाल हो, जो कई सदियों से मन में उठ रहा है
 
कई बार मैंने अपने बावरे मन की प्याजनुमा परतों को खोलने की कोशिश की हैं
लेकिन हर बार खुद को उन्ही परतों के दरमियाँ बेसाख़्ता सा लिपटा हुआ पाता हूँ
 
खुद को पाने की मेरी वो कोशिशें आखिर तक दम नहीं तोड़ती हैं
मंज़िल की तलब नहीं हैं इन्हें, ये तो बस बरसों से यूँही बेख़बर हैं
 
जब भी ख़्वाबों का जहान हक़ीक़त के बेहद क़रीब पहुंचता है
फिर से वही एक नया सपनों का शहर बसना शुरू हो जाता है
 
तुम कोई शबनम की बूँद नहीं हो, जो सूरज निकलते ही गुम हो जाएं
तुम तो दरअसल एक ऐसा खुमार हो जो कई सालों से दिल पे छा रहा है
 
कई बार मैंने अपने नादान दिल की सहमी हुई आंखें टटोलने की कोशिश की हैं
लेकिन हर बार खुद को उन्ही नज़रों के दरमियाँ नाबीना सा ठहरा हुआ पाता हूँ
 
वज़ूद को बचाने की मेरी वो कोशिशें आखिर तक दम नहीं तोड़ती हैं
मंज़िल की तलब नहीं हैं रूह को, यह तो बस बरसों से यूँही बेसबर हैं
 
जब भी ख़्वाबों का जहान हक़ीक़त के बेहद क़रीब पहुंचता है
फिर से वही एक एक करके ख़्वाबों का टूटना शुरू हो जाता है
और यह सिलसिला कभी रुकता नहीं है,
बस चलता रहता है

बिना रुके बस चलता रहता है…

तुम्हारे जाने के बाद मुझको ये एहसास हुआ

तुम्हारे जाने के बाद मुझको ये एहसास हुआ
 के तुम्हें रोकने की कोशिश क्यों नहीं की मैंने

हालांकि जाते वक्त तुमने मुझे अपना पता बताया था
 लेेकिन तुम्हारा पता सुुुुनते वक्त मैं लापता हो चुका था

अब जो भी हो जानाँ, तुमसे मोहब्बत हो गई है
 तुम्हारी याद में जलना, यूं मेरी आदत हो गई है

हर वक्त तुम्हारी बातें करना, दफ्तर की नौकरी से बेहतर है
 हर घड़ी तुम्हारी आँखें पढ़ना, आईआईटी की तैयारी से बेटर है

आजकल तो इस नींद ने भी निगाहों से रिश्वत ले रखी है
 तुम्हारी तस्वीर देखे बिना ये स्लीप मोड में जाती ही नहीं

मुझे और मेरे जज़्बातों को समझने के बजाए महसूस करना
 तब तुम्हें पता चलेगा, ज़िंदगी हम पे क्यूँ मेहरबान हो रही है

गर फुर्सत मिले कभी, तो एक फोन कर देना यूंही कहीं
 कुछ बातें करनी हैं, वो जो कब से लबों पे आके ठहरी हैं

तुम्हें खोने के बाद मुझको ये एहसास हुआ
 के तुम्हें पाने की कोशिश क्यों नहीं की मैंने।
 

पिछले कुछ दिनों से बहुत ज्यादा याद आ रही हो

पिछले कुछ दिनों से बहुत ज्यादा याद आ रही हो
ऐसा लगता है मानो तुम मेरे और पास आ रही हो

वैसे इतने दिनों से पास ही तो हो तुम, दूर कब गई तुम
यह वहम तो नज़रों को क़दमों के निशां देखकर हुआ है

बहुत मुश्किल हो जाता है कभी-कभी दिल को संभाल पाना
दिल तो बच्चा है ना, अक्सर अपनी ज़िद पर अड़ जाता है

हालांकि अक़्ल भी कभी-कभी नादान होने की नक़्ल कर लेती है
लेकिन आखिर में यह भी अपनी समझदारी पर उतर आती है

और बना देती है मुझे हर बार, पहले से और ज्यादा सख़्त
ज़ेहन की वादी में फिर भी, पनपता रहता है वो यादों का दरख़्त

हरे पत्तों पे जिसके नज़र आता है तु्म्हारी ही नक्श
उसी नक्श की तलब ने तो बना दिया है मुझे, कोई और ही शख़्स

एक ऐसा शख़्स, जो ढूंढ रहा है खुद अपना ही अक्स 
आईना जिसकी आँखों में है, फिर भी नाबीना सा कर रहा है रक्स

इस बार तो अलविदा को भी अलविदा कहना है
अब और नहीं सहा जाता इन दूरियों का सितम

पिछले कुछ दिनों से बहुत ज्यादा याद आ रही हो
ऐसा लगता है मानो तुम मुझमें घर बना रही हो।

तुम्हारी याद जब आती है, मैं वो तस्वीर देख लेता हूूँ

तुम्हारी याद जब आती है, मैं वो तस्वीर देख लेता हूूँ
जिस तस्वीर मेंं तुम मुझ को मेरी तक़दीर लगती हो

कुछ ही तो तस्वीरें हैं तुम्हारी मेरे पास, सो किश्तों मेें देखा करता हूँ
कोई नहीं चाह सकता तुम्हें इस तरह, जिस तरह मैं तुम्हें चाहता हूँ

तुमसे जुड़ी हर चीज मुझे अब अपनी लगती हैं
तुम्हारी बातें वो यादें बहुत ही अच्छी लगती हैं

दूर जाकर भी हर वक़्त मेरे पास रहती हो
ऐसा लगता है मानो आसपास कहीं बैठी हो

याद है मुझे वो मुस्कुराकर मिलना तेरा
उसी मुस्कुराहट से तो बनता था दिन मेरा

कई बार तुमने ही तो जी भरके हँसाया मुझे
दर्द के दरिया से सौ बार बाहर निकाला मुझे

हालांकि तुमसे बात करने को, जी तो बहुत करता है मेरा
मगर मोहब्बत का मारा ये दिल बेचारा बहुत डरता है मेरा

रोज़ तुम्हारे नंबर मोबाइल में टाइप करके मिटा देता हूँ
मुझमें है तू कहीं, यही सोचकर खुद को तसल्ली देता हूँ

तुम्हारी याद जब आती है, मैं वो पल याद कर लेता हूूँ
जिस एक पल मेंं तुम मुझ को मेरी तक़दीर लगती हो

ज्योंही तुमने जाने की कहा, और मेरा यह चेहरा उतर गया

ज्योंही तुमने जाने की कहा, और मेरा यह चेहरा उतर गया
हालांकि ज्यादा कुछ हुआ नहीं, बस वक़्त वहीं पे ठहर गया

इस थोड़े से वक़्त में ही तुमने मुझे कई यादें दी हैं
याद हैं मुझे वो सब, बिन कहे जो हमने बातें की हैं

दिल ठहरा नादान, सो बिना सोचे समझे अपनी करता रहा
दिल ही दिल में चाहत पाल ली, कहने से मगर ये डरता रहा

तुम्हें तो शायद पता भी नहीं, के कितना चाहता हूँ तु्म्हें 
हर जगह नज़र आती हो, इतना ज्यादा सोचता हूँ तुम्हें

हर रोज़ दिन ढलने का इंतज़ार पसंद था मुझे
वही इंतज़ार, जिसने यूं बेक़रार किया था मुझे

तुम्हारे साथ बिताया हर एक लम्हा, पूरी सदी की तरह लगता है
अल्हड़ अलमस्त किरदार तुम्हारा, किसी नदी की तरह लगता है

हो सकता है…यह मोहब्बत मेरी एकतरफ़ा हो
मगर इतना ज़रूर कहूंगा, के तुम नेक वफ़ा हो

इतनी ख़ूबसूरत यादें देने के लिए शुक्रिया
पहली ही नज़र में अपना बनाने के लिए शुक्रिया

ज्योंही तुमने अलविदा कहा, और मेरा यह दिल टूट गया
हालांकि ज्यादा कुछ हुआ नहीं, बस यह फिर से बंजर हो गया।

 

ये ज़िंदगी नंबर से नहीं अंदर की आवाज़ से बनती है

सबने यही कहा कि दसवीं में अच्छे नंबर ले आओ तो ज़िंदगी बन जाएगी

पर किसी ने नहीं कहा ये ज़िंदगी नंबर से नहीं अंदर की आवाज़ से बनती है

मेरे दिल के दफ़्तर में एक लड़की काम करती है…

मेरे दिल के दफ़्तर में एक लड़की काम करती है
आसपास जिसके होने से यह ज़िन्दगी महकती है
 
जिस रोज़ वो नहीं आती है, उस रोज़ मेरा मन नहीं लगता है
जिस रोज़ वो नहीं दिखती है, उस रोज़ ये दिल बहुत डरता है
 
ना कोई बिन बुलायी मेहमान है, ना कोई पुरानी जान पहचान है
फिर भी ऐसा लगता है मानो, गुज़री यादों में उसके ही निशान है
 
उसकी एक मुस्कुराहट से दिन भर की थकान उतर जाती है
उसके क़दमों की आहट सुनते ही ख़ामोशी भी मचल जाती है
 
क़लम की तरह सीधे दिल पे वार करती है
आँखों ही आँखों में बेनज़ीर इक़रार करती है
 
मेरे दिल के दफ़्तर में एक लड़की काम करती है
आसपास जिसके होने से बंजर में भी बारिश होती है
 
जिस रोज़ वो नहीं आती है, उस रोज़ मेरा मन नहीं लगता है
उस रोज उसकी याद में हर एक पल मानो सदी सा गुज़रता है
 
ना कोई मुंतज़िर मेजबान है, ना कोई पुरानी जान पहचान है
फिर भी ऐसा लगता है मानो, उसी में बस गई मेरी जान है।

When a science student become poet….

फिजिक्स सब फेल है, तुम्हारी आँखों के आगे
मैथ्स डब्बा गोल है, तुम्हारी बातों के आगे
केमिस्ट्री कोई झोल है, तुम्हारी यादों के आगे
बायो डावांडोल है, तुम्हारी साँसों के आगे

सारे subject सारे concept, बदल के रख दिए तुमने
सारे principle सारे object, पलट के रख दिए तुमने

science की समझ से बाहर, एक अजूबा हो तुम
science student रह चुके शायर की महबूबा हो तुम

तुम्हारी चमकती हुई नज़रों ने ही तो मुझे reflection का पाठ पढ़ाया
तुम्हारी झुकती हुई पलकों ने ही तो मुझे gravity का गुर सिखाया

तुम्हारी महकती हुई खुशबू ने ही तो मुझे oxygen का एहसास कराया
तुम्हारी सुलगती हुई आरज़ू ने ही तो मुझे जला-जलाके carbon बनाया

तुम्हारे मखमली एहसास ने ही तो मुझे बिना दिल के जीना सिखाया
तुम्हारे अजनबी उस अक्स ने ही तो मुझे चट्टानों सा मज़बूत बनाया

तुम्हारे लहराते गेसुओं ने ही तो मुझे newton के नियम बताये
तुम्हारे बलखाते बाजुओं ने ही तो मुझे वायु के सिद्धांत समझाये

तुम्हारी बेहिसाब वफाओं ने ही तो मुझे हिसाब करना सिखाया
तुम्हारी बेनज़ीर सी बातों ने ही तो मुझे सवाल पूछना सिखाया

सारे नियम सारी theories पलट के रख दी तुमने
सारे किरदार सारी stories बदल के रख दी तुमने

विज्ञान के वज़ूद से दूर बस एक सपना हो तुम
विज्ञान छात्र रह चुके कवि की कल्पना हो तुम...

#RockShayar

ख़ुद को खोकर शख़्स कोई बेगाना ढूंढता हूँ…

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तुमसे बात करने का बहाना ढूंढता हूँ

तुम्हारी आँखों में गुज़रा ज़माना ढूंढता हूँ

न जाने कैसा सफ़र है नज़रों से नज़रों का

ख़ुद को खोकर शख़्स कोई बेगाना ढूंढता हूँ…

तुम्हारे पश्मीना पहलु की छांव

तुम्हारे पश्मीना पहलु की छांव मुझे ज़िंदगी की धूप से बचाती है
निगाहों की चादर बेचैनियां दूर करके अपने आगोश में सुलाती है

बहुत दिन हो गए हैं, बर्फ की उस ठिठुरती हुई बारिश में भीगे हुए
वादियों की सदा ख़्वाबों के ज़रिए आजकल अपने पास बुलाती है

हालाँकि तुम्हारे घर का पता, अब भी मेरे लिए है लापता
जब भी याद करने की कोशिश करता हूँ आँखें सब कुछ बहा देती है

तुम्हारा ज़िक़्र जब भी करता हूँ, ख़यालों से खुशबू आती है
रूह मेरी वो तुमसे जुड़कर मोहब्बत के तराने गुनगुनाती है

कई बार बहुत ज्यादा याद आती हो, रात भर पलकें भिगाती हो
लेकिन जब सुबह होती है, ओस की बूंदों की तरह गुम हो जाती हो

गर इत्तेफ़ाक़न ही मुलाक़ात हो जाएं तो उसे कुदरत का इशारा समझ लेना
इस दफ़ा अलविदा को अलविदा कहके दूर-दूर नहीं, हमें पास-पास है रहना

आज भी सोने से पहले तकिये के नीचे तुम्हारी तस्वीर रखता हूँ
क्या मालूम फिर से वही सुनहरे तुम्हारे ख़्वाब आने शुरू हो जाये

बेनज़ीर सी वो बातें ना सही मगर कभी तो हालचाल पूछने ही चली आओ
इंतज़ार को भी इंतज़ार करते हुए एक अर्सा हो गया है अब तो चली आओ…

पलकों के पीछे कई गहरे राज़ छुपे हैं

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पलकों के पीछे कई गहरे राज़ छुपे हैं
ज़िंदगी के ज़िंदा कुछ एहसास छुपे हैं।

अधजगी आँखों के अफ़साने बस इतना समझ लीजिए
ना लिख पाया जिन्हें वो अल्फ़ाज़ छुपे हैं।। 

6th Birth Anniversary of RockShayar

आज फिर दिल बहुत रो रहा है
आज फिर यूं सीने में दर्द हो रहा है
आज फिर वो चैन-ओ-सुकूं सब खो रहा है
आज फिर वही खौफ़नाक एहसास हो रहा है
आज फिर दिल बहुत रो रहा है।

आज फिर ये अश्क़ों का बोझ ढो रहा है
आज फिर ये नफ़रत के बीज बो रहा है
आज फिर वही दर्दनाक एहसास हो रहा है
आज फिर दिल बहुत रो रहा है।

आज फिर ये होश-ओ-हवास खो रहा है
आज फिर ये शदीद गहरी नींद सो रहा है
आज फिर वही अजनबी एहसास हो रहा है
आज फिर दिल बहुत रो रहा है
आज फिर दिल बहुत रो रहा है।।

 

पता नहीं क्या-क्या अंदर लिए बैठा है

नज़रो में अश्क़ों का समंदर लिए बैठा है

पलकों पे यादों का बवंडर लिए बैठा है।

एक अर्से से बहुत कुछ तलाश रहा है

पता नहीं क्या-क्या अंदर लिए बैठा है।।

 

 
 

बचके रहना ज़रा, मेैं दिल चुरा लेता हूँ

बातें ही नहीं, आँखें भी घुमा लेता हूँ
बचके रहना ज़रा, मेैं दिल चुरा लेता हूँ

नज़र न आ जाए कहीं, अश्क़ों में छुपा वो दर्द कभी
दिल की बेचैनी अक्सर, लफ़्ज़ों में छुपा देता हूँ

इससे बेहतर ख़ैरात, और कहाँ मिलेगी यहाँ
मुसीबत के मारे हुए, लोगों की दुआ लेता हूँ

और कुछ तो आता नहीं, इस दिल को कोई भाता नहीं
कच्ची पक्की सच्ची, जैसी भी हो यारी निभा लेता हूँ

जिस शख़्स से एहसास का अक्स जुड़ जाएं
उस शख़्स की पलकों पे अपनी पलकें सजा लेता हूँ

जुनून कहो हालात कहो, या कहो ज़िद कोई
बेदर्द ज़िंदगी से अपने हर दर्द की दवा लेता हूँ

मेरी ग़रीबी का मज़ाक उड़ाने वाले, बस इतना समझ ले 
पैसे तो नहीं, पर आजकल इंसान कमा लेता हूँ।

#RockShayar

 

“पड़ोस में रहने की बात कर के दूर चली जाती हो”

पड़ोस में रहने की बात कर के दूर चली जाती हो
लगता है तुम भी मेरी तरह खुद को आज़्माती हो

नज़रों के ख़त पढ़ना तुम्हें भी तो आता है
नादान ये दिल मेरा, इक़रार करने से घबराता है

सब जानकर भी, यूं अनजान बनती हो
तुम्हें पता है, तुम मेरे दिल में रहती हो

जब भी मुझसे बात करती हो, ये साफ़ पता चलता है
के मेरी तरह तुम्हारा भी दिल ये, जोरो से धड़कता है

मोहब्बत हो गयी है, इस बात को छुपाना क्यों
जज़्बात गर छुपा भी लो, तो आँखों में नज़र आ जाते हैं

जिस दिन तुम नहीं दिखती हो, आँखें बंद कर लेता हूँ
बंद आँखों से हर बार सामने तुमको ही पाता हूँ

बार-बार खुद को बस यही यक़ीन दिलाता हूँ
के इस बार तो यह ख़्वाब सुबह का ख़्वाब निकले

नींद खुलने से पहले जी भर के देखता हूँ तुम्हें
क्या पता फिर यह ख़्वाब ख़्वाब ही ना रह जाए

पलकों पे रहने की बात कह के गुम हो जाती हो
लगता है तुम भी मेरी तरह खुद को सताती हो।

सुन कभी तो तू मेरे दिल की आवाज़ भी…

21.jpgसुर भी हैं साज़ भी, अजनबी एहसास भी
सुन कभी तो तू मेरे दिल की आवाज़ भी

तुम्हें देखते ही दिल, सफ़र पर निकल पड़ता है
तुम्हारी नज़रों के क़दमों का, ये पीछा करता है

और तब तक वापस नहीं लौटता है
जब तक ये खुद तसल्ली न कर ले
के वो खुशबू लौटकर फिर आ चुकी है
ख़्वाबों के महकते आशियाँ में
पलकों के पहरे देते कारवाँ में

तुम साथ नहीं हो तो क्या हुआ
तुम्हारी परछाई तो अब भी मेरे साथ है
जब भी दिल करता है
धूप में निकल पड़ता हूँ
कभी वो मुझे कुछ किस्से सुनाती है
कभी मैं उसे अपना हिस्सा बनाता हूँ

बस इसी तरह कट रहा है ज़िंदगी का सफ़र
बस इसी तरह महक रहा है यादों का शहर
बस इसी तरह एक दिन राहों में मिल जाओ कहीं
बस इसी तरह एक दिन निगाहों में रहने आओ कभी

बस एक खुशबू…

बस एक खुशबू की तलाश में क़दम चलते-चलते इतनी दूर चले आए

वरना ज़िंदगी ने तो चंद क़दमों के बाद ही रुकने की ज़िद पकड़ ली थी

 

“गर तुम साथ हो”

तुम्हें देखते ही दिल का शहर आबाद हो जाता है

गर तुम साथ हो तो हर पल मेरे लिए ख़ास हो जाता है

नज़रों के DSLR से मैंने बिन बताये तुम्हारी कई तस्वीरें ली हैं

आँखों से फिसलती नमी की तस्वीरें

गालों पे मचलती ज़िंदगी की तस्वीरें

बातों से झलकती ख़ुशी की तस्वीरें

होंठो से छलकती हँसी की तस्वीरें

वो सारी तस्वीरें, हैं मेरी साँसों की तक़दीरें

तुम्हें देखते ही सीने की ख़लिश खुद बखुद ख़त्म हो जाती है

गर तुम पास हो तो ज़िंदगी मेरे लिए उम्दा नज़्म हो जाती है

लम्हों के Lens से मैंने बिन बताये तुम्हारे कई हसीं पल Zoom किये हैं

आईने के सामने खुद को निहारने का पल

लहराती हुई ज़ुल्फ़ों को संवारने का पल

सुबह-सुबह अंगड़ाई लेने का पल

मुलाक़ात के वक़्त शर्माने का पल

वो सारे पल, हैं मेरी मुश्किलों के हल

तुम्हें देखते ही दुबारा जीने की ख़्वाहिश होती है

गर तुम साथ हो तो हर जगह बारिश होती है

पलकों के Panorama से मैंने बिन बताये तुम्हारे कई Shots लिए हैं

बारिश में बेफ़िक्र होकर झूमने का Shot

मोहब्बत से माथे को चूमने का Shot

आँखों से अक्सर बात करने का Shot

चेहरे को हिज़ाब से ढकने का Shot

वो सारे शॉट, हैं मेरी Thought की Boat

तुम्हें देखते ही हर सफ़र सुनहरी एक याद हो जाता है

गर तुम साथ हो तो हर पल मेरे लिए ख़ास हो जाता है।

#RockShayar

ख़लिश – सूनापन
उम्दा नज़्म – बेहतरीन कविता
हिज़ाब – आवरण