“आओ चलें फिर इरफ़ान की गली”

 

लफ़्ज़ों को हँसते मुस्कुराते ग़मगीन हो आंसू बहाते 
किसी ने देखा है कभी 
गर ना देखा तो चलो मेरे यार की गली 
आओ चलें फिर इरफ़ान की गली।

समंदर से वसीह दिल में लहरों की तरह जज़्बात उठते 
उन लहरों से उठते जज़्बातों को] लफ़्ज़ों में तब्दील करते
किसी को देखा है कभी 
गर ना देखा तो चलो मेरे यार की गली 
आओ चलें फिर इरफ़ान की गली।

रूहानियत की क़लम में स्याही शिद्दत की भरकर
इक कोरे काग़ज़ को अनमोल बनाते 
किसी को देखा है कभी 
गर ना देखा तो चलो मेरे यार की गली 
आओ चलें फिर इरफ़ान की गली।

एक शख़्स में छुपी हज़ार शख्सियतें
एक इंसां को एलियन में तब्दील होते
उम्र गुज़ार खुद में अंदाज़ अलहदा पाते
किसी को देखा है कभी 
गर ना देखा तो चलो मेरे यार की गली 
आओ चलें फिर इरफ़ान की गली।

गर्दिशों के सियाह अंधेरों में चश्मा-ए-नूर बहाते 
हादसों में खुद ही को खुद का हौसला बढ़ाते
हर ग़म की खुशी मनाकर ग़म को कन्फ्यूज करते
किसी को देखा है कभी 
गर ना देखा तो चलो मेरे यार की गली 
आओ चलें फिर इरफ़ान की गली।।

“एक दोस्त है मेरा, सबसे अलग सबसे जुदा”

एक दोस्त है मेरा, सबसे अलग सबसे जुदा
एक यार है मेरा, सब यारों से अलहदा

पता नहीं हम में से बड़ा कौन है
मैं उम्र में बड़ा हूँ और वो दिल से

बचपन से ही जिसे खतरनाक समझकर दूर रहा
खतरनाक वक़्त में मेरे वहीं तो आख़िर साथ रहा

एक रोज जब मिला मुझे, उसकी डायरी का एक अधूरा हिस्सा
तब कहीं वो जाकर मालूम हुआ, यार की ज़िन्दगी का किस्सा

बाद उसके तो एक अलग ही बॉन्डिंग हो गई
क्रेज़ी बंदे स्टार्टअप में शेयर होल्डिंग हो गई

अब तो फुल टू राॅक ऑन करने की तैयारी है
संग जो अपने यह लाइफटाइम वाली यारी है

एक दोस्त है मेरा, सबसे अलग सबसे जुदा
एक यार है मेरा, सब यारों से अलहदा

पता नहीं हम में से बड़ा कौन है
मैं उम्र में बड़ा हूँ और वो दिल से ।

“यारों की यारी”

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ख़्वाबों के बादल पर, रखते है ये दुनिया सारी
इरादों में महके जिनके, ज़िंदा सी कोई ख़ुमारी
दोस्ती निभाये सदा, भूलकर सब दुनियादारी
हर रिश्ते पर यहाँ, रिश्ता है जो सबसे भारी
नाम है उसी रिश्ते का प्यारे, यारों की यारी ….

दर्द-ओ-ग़म की टांगो को, पल पल यूँ खींचे
ज़िन्दगी की क्यारी को, लम्हा लम्हा सींचे
वादे निभाये सदा, भूलकर वो सब राज़दारी
हर ख़ुशी पर यहाँ, ख़ुशी है जो सबसे भारी
नाम है उसी ख़ुशी का प्यारे, यारों की यारी ।।

© रॉकशायर

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