ग़मों का साथ है अपना ख़ुशी का पल पराया है

नहीं कोई मेरा अपना ये साया भी पराया है
बता ऐ ज़िंदगी तूने ये क्या रिश्ता निभाया है

यक़ीं होता नहीं अब भी मुझे इस बात पे यारों
जिसे घर को बचाना था उसी ने घर जलाया है

समझ आया यही आख़िर सफ़र के आख़िरी पल में
ग़मों का साथ है अपना ख़ुशी का पल पराया है

लगी हैं ख़ुद ही दीवारें इमारत को गिराने में

ज़रा सा वक़्त लगता है किसी का दिल दुखाने में
सदी इक बीत जाती है नया रिश्ता बनाने में

दरारें रोज़ भरता हूँ मगर बढ़ती ही जाती हैं
लगी हैं ख़ुद ही दीवारें इमारत को गिराने में

परिंदे चीखते रहते नहीं सुनता कोई इनकी
यहाँ तो पेड़ कट जाते नई सड़कें बनाने में

ख़ुद को अकेला कर लिया मैंने

बिना सोचे बिना समझे भरोसा कर लिया मैंने
यक़ीं उस पर न जाने क्यूँ दुबारा कर लिया मैंने

कि जिसको याद करने से अकेलापन नहीं खलता
उसी की याद में ख़ुद को अकेला कर लिया मैंने


यौवन हाला 😍

अधरों पर है उसके यौवन हाला
मृगनयनी सी वो एक मधुशाला

अंग अंग से आये मादक सुगंध
मन मलंग में बस गई वो प्रेम गंध

काम जगाये वो कामायनी सदा
मन महकाये वो मनमोहिनी यहाँ

रूप की माया तन को जलाती है
कूप सी काया अगन वो लगाती है

आलिंगन जिसका कर दे मदहोश
यौवन की परिभाषा वो मधुकोश

Feel

तेरी गीली ज़ुल्फ़ें मेरे सुलगते सीने पर जब गिरती हैं
अंदर की तपिश कसकती कशिश बनकर धड़कती हैं


Voice of Heart ❤

या ख़ुदा अलहदा क्यूँ बनाया मुझे
जान लेकर मेरी फिर बचाया मुझे

रोज़ देता है दिल ये सदा या ख़ुदा
तोड़ना ही था फिर क्यूँ बनाया मुझे

Burning🔥 Desire

समा जाती है वो मुझमें, लिपट जाता हूँ मैं उससे
बिना बोले गिरह खोले, इशारों ही इशारों में


 

Romantic Verse

माथे पे तेरे उभरी हुई हैं, मेरी छुअन की वो सलवटें
सितारों के पार ले जाती हैं, तेरे बदन की वो करवटें

मदहोश करे खुशबू तेरी, रातभर जलाएं आरज़ू तेरी
कैसा असर है वस्ल का, आबरू तेरी है आबरू मेरी

महके-महके से लगते हैं, मोहब्बत भरे मुख़्तसर लम्हे
बहके-बहके से लगते हैं, शरारत भरे ये बेसबर लम्हे

बलखाती कमर पर बारिश की बेईमान बूँदें जब गिरती हैं
लरज़ते लबों की तिश्नगी मदमस्त मंज़र देखते ही बढ़ती हैं



















फ़साना क्या लिखूँ अपना

मुझे महसूस होता है, छुरा है पुश्त में मेरी
हुई है मौत सौ बारी, हुई है किश्त में मेरी

फ़साना क्या लिखूँ अपना, नसीबा है यही इरफ़ान
बहारों की सभी उम्रे, कटी हैं दश्त में मेरी


पुश्त – Back, पीठ
दश्त – Desert, रेगिस्तान

“जुनूनी इक बार हो जा”

नींद से बेदार हो जा, रूहानी किरदार हो जा
सोने का अब वक्त नहीं है, जुनूनी इक बार हो जा

बहुत जी लिया मर मर कर,
लहू के आंसू भर भर कर
रोने का अब वक्त नहीं है, जुनूनी इक बार हो जा

नींद से बेदार हो जा, रूहानी किरदार हो जा
सोने का अब वक्त नहीं है, जुनूनी इक बार हो जा

साया तेरा तुझसे कहे, पलकों से ना ये अश्क़ बहे
नुमायाँ तुझमें तू रहे, अब और ना यह सितम सहे

बहुत खोया है तूने खुदको, आबाद इस बार हो जा
रोने का अब वक्त नहीं है, जुनूनी इक बार हो जा

नींद से बेदार हो जा, रूहानी किरदार हो जा
सोने का अब वक्त नहीं है, जुनूनी इक बार हो जा

यूँही नहीं तू पैदा हुआ, यूँही नहीं तेरी ज़िन्दगी
कर्ज़ चुका इन साँसों का, तुझसे कहे ये ज़िन्दगी

बहुत रोका है तूने खुदको, आज़ाद इस बार हो जा
रोने का अब वक्त नहीं है, जुनूनी इक बार हो जा

नींद से बेदार हो जा, रूहानी किरदार हो जा
सोने का अब वक्त नहीं है, जुनूनी इक बार हो जा

वज़ूद तेरा पूछे तुझसे, कहाँ हूँ मैं बता ज़रा
जुनून तेरा कहे तुझसे, कर ले यक़ीं खुद पे ज़रा

बहुत टोका है तूने खुदको, हिम्मती इस बार हो जा
रोने का अब वक्त नहीं है, जुनूनी इक बार हो जा

नींद से बेदार हो जा, रूहानी किरदार हो जा
सोने का अब वक्त नहीं है, जुनूनी इक बार हो जा

बहुत जी लिया मर मर कर,
लहू के आंसू भर भर कर
सोने का अब वक्त नहीं है, जुनूनी इक बार हो जा ।।

“सज़ा को ही मज़ा बना ले”

सज़ा को ही मज़ा बना ले
जीने की तू वजह बना ले
दर्द ही लगने लगे हमदर्द
खुद को इस तरह बना ले
सज़ा को ही मज़ा बना ले
जीने की तू वजह बना ले

ज़िंदगी इम्तिहान लेती है
रोज नई पहचान देती है
मैले ये तेरे क़रम धोकर
कुव्वत और ईमान देती है
आह ही लगने लगे जो वाह
खुद को इस तरह बना ले
सज़ा को ही मज़ा बना ले
जीने की तू वजह बना ले

हर दिन लगे कुछ बेहतर
हर रात कटे खुश रहकर
हर पल जियो कुछ ऐसे कि
याद आए वो रह रहकर
घाव ही लगने लगे छाँव
रूह को इस तरह बना ले

सज़ा को ही मज़ा बना ले
जीने की तू वजह बना ले
दर्द ही लगने लगे हमदर्द
खुद को इस तरह बना ले
सज़ा को ही मज़ा बना ले
जीने की तू वजह बना ले ।।

Haal e Dil

नहीं मालूम हाले दिल, नहीं मासूम अब ये दिल
कभी ग़म ये कभी ग़म वो, नहीं महरूम अब ये दिल

सुना था कांच है दिल ये, हमीं ने ही नहीं माना
किसी ने चोट जो मारी, हुआ मरहूम अब ये दिल

” सिमटी हुई तेरी पलकें “

 

 

सिमटी हुई तेरी पलकें 
कुछ कह रही है मुझसे 
आहिस्ता से यूँ दबे पांव 
हौले हौले दिल के आशियाँ में
अपना असर छोड़ती हुई 
जब भी ये उठती है 
मेरी नींद साथ में चल देती
ख्वाबो के जहाँ में दोनों ही 
बस चलती जा रही
शायद किसी मोड़ पर मिले तुझसे 
हसरत के इक जहाँ में 
सही गलत के पार 
जब कभी ये पलके भारी हुई 
तेरे अकस को मेने पाया इन पर 
अश्क़ो से भीगकर वही ठहर गया है 
इसका तो रंग भी कबका उड़ चुका
अब तो बस ख़ुशबू सी तैर रही 
इन पलकों के शामियाने में
मेने कई लफ्ज़ो के ताने बुने
रेशमी उस एहसास से भरे हुए 
जो पहली नज़र में रहता है 
भीगी हुई तेरी पलके 
कुछ कह रही है मुझसे
इन्हे शायद अभी हुआ है यकीं 
मेरी भी पलके आज नम है

Shajar se pathhar

ज़ुदा जब से यारों, हुआ ज़िंदगी से
शजर से यूँ पत्थर, बना मैं तभी से

यही राज़ मेरा, यही सच है सुन लो
सभी यार लगते, लड़ाई सभी से

मेरी मौत पर तुम, न आंसू बहाओ
रिहाई ये मुझको, मिली है मुझी से

Manzar jo the khanjar

कभी आंसू कभी है ख़ूं, मेरी आँखें हमेशा नम
नहीं मरहम सितम हरदम, है दिल में बस सिसकता ग़म
फ़साना है यही मेरा, सुनोगे क्या पढ़ोगे क्या
कई मंज़र थे जो खंजर, हुआ मैं क़त्ल निकला दम

Tanhayee ke sannate

मेरी  आँखों  में  आँसू  हैं  दिखाई  जो  नहीं  देते
है   तन्हाई    के   सन्नाटे    सुनाई  जो  नहीं  देते।

करो  महसूस  इनको तुम  निगाहो  से परे जो  है
ये  साये  हैं  ख़लाओ  के  दिखाई  जो  नहीं  देते

मुहब्बत क्या है मत पूछो

कोई कहता सदा दिल की, कोई कहता ख़ता दिल की
मुहब्बत क्या है मत पूछो, है इक दिलकश अदा दिल की

नहीं है इल्म मुझको हाँ, यही मालूम है इरफ़ान
जिसे हर बेज़ुबाँ समझे, वही सच्ची ज़ुबाँ दिल की

तन्हा क्यूँ भरी महफ़िल के बीचों बीच रहता हूँ

के माज़ी और मुस्तक़बिल के बीचों बीच रहता हूँ
सभी से दूर टूटे दिल के बीचों बीच रहता हूँ

बता दे ये कोई मुझको कि आख़िर माजरा है क्या
यूँ तन्हा क्यूँ भरी महफ़िल के बीचों बीच रहता हूँ

My Birthday 🎂🎂

रोज रोज कोई अपना बर्थ डे थोड़े ही आता है
रोज रोज कोई इतना थोड़े ही मुस्कुराता है

साल में एक दिन तो हम एज लाइक किंग जैसा फील करते हैं
लाइफ के बिजी शेड्यूल से चंद हैप्पीनुमा लम्हों की डील करते हैं

फर्स्ट ऑफ ऑल तो केक कटता है, ऑफ्टर देट वो सब में बंटता है
और वैसे देखा जाए तो, हमारी ज़िन्दगी का एक पूरा साल घटता है

दिल की दीवारों पर, यादों के कलरफुल बैलून टंगे होते हैं
समटाइम ब्लैक एंड व्हाइट, वो समटाइम रंग बिरंगे होते हैं

स्टार्टअप सेलिब्रेशन के बाद, मस्तवाली पार्टी तो बनती है
धूम धड़ाका एंड डांसिंग धमाल, साड्डे यारों दी क्रेजीपंती है

गिफ्ट्स एंड विशेज का सिलसिला तो दिन भर चलता है
माइंड ब्लोइंग मैसेज पढ़कर ही सबका चेहरा खिलता है

नेक्स्ट ईयर यह फिर से आएगा, जमकर खूब खुशियाँ लाएगा
हर शख़्स बर्थ डे बाॅय के लिए फिर, हैप्पी बर्थ डे टू यू गाएगा।








Muqaddar of Musafir

कभी आंधी कभी तूफ़ां, मुसाफ़िर के मुक़द्दर में
ख़ुदाया और क्या क्या हैं, मुहाजिर के मुक़द्दर में

सदा दर दर भटकना यूँ, सुकूँ है के नहीं मिलता
यही सच है नहीं है घर, मुसाफ़िर के मुक़द्दर में

मुहाजिर – शरणार्थी, Refugee, Emigrant

Ideal Inspirational Blogger Award

This is my first “Ideal Inspirational Blogger Award”. Anushree Srivastava nominated me for this award….

You are amazing writer…..Anushree. I love to read your each and every post on your blog site

👉 ashree2412blogspot.wordpress.com

Make sure you all bloggers go check out her blogs and read their work….

The Rules of this award are:

1. Thank the person who have nominated you and provide a link back to his/her blog.

2. Answer their questions.

3. Nominate up to 9 other bloggers and ask them 5 new questions.

4. Notify the nominees through their blog by visiting and commenting on their blog.

5. List the rules and display the “Ideal Inspiration Blogger Award” logo.

6. Provide the link of the Award creator of ideal inspiration blogger award as Rising Star from https://idealinspiration.blog

Questions asked by Anushree……😇

1-Which post of your own is your favorite?
☆ My post entitled “ज़िन्दगी तुझपे मेरा इख़्तियार” is my favourite.

2-If you would write a book, what would it be about?
☆ It’s about My Journey
“Shajar Se Patthar Ka Safar” 😊.

3-If you’re asked to suggest a book, which one will you prefer ?
☆ Ingnited Minds by Dr. APJ Abdul Kalam Sahab

4-If everything will be okay..someday, will you be thankful to the lockdown . If it is yes, or no accordingly, then Why ?
☆ Of course I am very thankful to destiny for realizing me what I am in this duration. Solitude taught me lesson of life. Self believe. So thank god for mercy on us.

5-What motivates you to survive or live your life ?
☆ My existance, My best friend Ashif n also passion for poetry.

My nominees are :

1. Tara Pant
2. Ritu Jain
3. Rahat Jahan
4. SaniaaSparkle
5. Shelendra Shukla ‘Haldauna’

Thank you again for all the love, support and nomination…..

Happy Blogging 🙂


बिना दिल के भी कुछ बंदे, ज़माने में यूँ जीते हैं

बिना दिल के भी कुछ बंदे, ज़माने में यूँ जीते हैं
किसी से कुछ नहीं कहते, ग़मों के घूंट पीते हैं

यही कहती है हर इक रूह अपने जिस्म से इरफ़ान
के इस ज़िन्दान में दिन ये, बड़ी मुश्किल से बीते हैं
  
ज़िन्दान – जेल, Prison

“खुद से भी कभी कुछ बात की जाए”

खुद से भी कभी कुछ बात की जाए
कौन है भीतर ? चलो मुलाकात की जाए
खुद को ही आज खुद से यूँ मात दी जाए
कौन है भीतर ? चलो मुलाकात की जाए ।

हटा दो अक्ल के पहरे तुम सब
हटा दो शक्ल सुनहरे तुम अब
देखो ग़ौर से, दिल की कोर से
हटा दो नक्ल के चेहरे तुम सब

दिखावे की मालो दौलत ख़ैरात की जाए
कौन है भीतर ? चलो मुलाकात की जाए
खुद से भी कभी कुछ बात की जाए
कौन है भीतर ? चलो मुलाकात की जाए ।

ख़ामोशी की आवाज़ सुनो ना तुम
ख़यालों पर अल्फ़ाज़ बुनो ना तुम
ग़ैरों को ना देखो, मन के पासे फेंको
खुद ही अपने अंदाज़ चुनो ना तुम

ज़ेहन से आओ अपने ख़ुराफ़ात की जाए
कौन है भीतर ? चलो मुलाकात की जाए
खुद से भी कभी कुछ बात की जाए
कौन है भीतर ? चलो मुलाकात की जाए ।।

Ajnabi Ladki

मिली इक अजनबी लड़की, कहूँ के दिलनशीं लड़की
नहीं सानी कोई उसका, ख़ुदाया माह-जबीं लड़की

जिसे पाने में मेरी जां, कभी भी जा भी सकती है
मुझे क्यूँ जान लगती है, वही ज़ोहरा-जबीं लड़की

“मुहब्बत के वोह ज़माने”

 

 

मुहब्बत के वोह ज़माने, फिर से याद आने लगे
ठहरे थे दिल में कही, ज़ेहन पर अब छाने लगे

नीले आसमां के तले, परिंदे से उड़ रहे है ख्वाब
झूमती हवाओ के संग, बादल बन बरसने लगे 

महकती हुई फ़िज़ा ने, खोला जो आँचल अपना 
नन्हे नन्हे अंकुर, दिल कि ज़मीं पर उगने लगे

मौसम का मिज़ाज़, रूमानी हर दिन होता नहीं
इश्क़ के चमन में यहाँ, फूल हजार खिलने लगे

गुजरते वक़्त कि नदी में, तैर रहे है कई लम्हे
यादों कि कश्तियों में, अब वो सवार होने लगे

उठती गिरती लहरे जहाँ, यूँ बाहें खोले मिलती
तसव्वुर के निशान भी, अब रूह पर छपने लगे

निगाहो के वो फ़साने, मुझे फिर आजमाने लगे 
पलकों से छलक कर, रूख पर अश्क़ बहने लगे 

मुहब्बत के वोह ज़माने, फिर से याद आने लगे
ठहरे थे दिल में कही, ज़ेहन पर अब छाने लगे

Alvida Mahi

दर्द होता बहुत अलविदा कहने में
दिल जुड़ा हो उसे ही ज़ुदा कहने में       

Aie Watan

अमन की बात करता हूँ वतन से प्यार करता हूँ
इसी मिट्टी में मिलना है दुआ हर बार करता हूँ

शहादत पर सियासत मत करो प्यारे वतन वालों
सुपुर्द-ए-ख़ाक होकर मैं चमन गुलज़ार करता हूँ

Jashn e Aazaadi

जश्न ए आज़ादी कुछ ऐसे मनाये हम
सरफ़रोशी की शमां दिल में जलाये हम

अपना फ़र्ज़ ईमान से अदा करते हुए
हिंद को दुनिया का सरताज बनाये हम

मुल्क़ में फैली बुराइयों के ख़िलाफ
इन्क़िलाब का बिगुल फिर से बजाये हम

शहीदों की क़ुर्बानी याद करते हुए
मुक़द्दस तिरंगा शान से फहराये हम

वतन की मोहब्बत का जज़्बा लिए
अपनी प्रतिभा जमाने को दिखाये हम

सरहद की हिफ़ाजत में डटें हुए है जो
उन रणबाँकुरों को सर आँखों पर बिठाये हम

देश के लिए जानो तन लुटाकर
मिट्टी का क़र्ज़ अब लहू से चुकाये हम

हँसते हँसते जां निसार कर गए वो
शहादत के किस्से फ़ख्र से सुनाये हम

सबको बराबरी का हक़ दिलाते हुए
आज़ादी के सही मायने सिखलाये हम

मेहनत और लगन से आगे बढ़ते हुए
हर सूबे में अपना परचम लहराये हम

मज़हब, ज़ुबां, नस्ल से ऊपर उठकर
तराना-ए-हिंद आज गुनगुनाये हम

यौम-ए-आज़ादी कुछ ऐसे मनाये हम
गुल है हिंदोस्ताँ आओ इसे सजाये हम ।।

**** राॅकशायर ‘इरफ़ान’ अली ख़ान ****

“दिल दे घार विच, बता इन्ना अंधेरा क्यूं है”

दिल दे घार विच, बता इन्ना अंधेरा क्यूं है
दर्द देवे जे तेनू, उण यादां दा बसेरा क्यूं है

सोचण दी बात है, कदे ते बंदया ग़ौर कर
एहसास दी ज़मीनां पर, डर दा डेरा क्यूं है

सफ़र दे हमसफ़र, ज़िन्दड़ी नु ऐंवई छडकर
कल्ला लबदा फिरे, ऐसा साया तेरा क्यूं है

खुद ने पाण दी, ऐत्थे होड़ मची है हर तरफ
ग़म दी चादर ओढ़ के, सो रहा सवेरा क्यूं है

होर कुछ नहीं, बस इक गल्ला दसो मेनू वी
मुझ पर मुझसे ज्यादा, बता हक़ तेरा क्यूँ है

लिख चावे सौ हरफ़, देख अपणी वी तरफ
तू खुद अपणे दिल दे, सुकूं दा लुटेरा क्यूं है

ग़ज़ल लिखदा ही रवा, पता न कभी जे चला
सुफ़ेद रूहा दे नाल, ऐ परछाई दा घेरा क्यूं है ।।
‪#‎RockShayar‬

“मलिका-ए-फ़िरदौस”

 

फ़िरदौस से आई हो या उस ओर से
जहां बर्फीले पहाड़ आसमां को चूमते हैं
नदियाँ इठलाती हैं, और झरने झूमते हैं

वादी में जब कभी वो बर्फ पिघलती है
ज़िन्दगी मुस्कुराने को फिर मचलती है

हर सू जहां पर चिनार की खुशबू आती है
और हवाएँ मोहब्बत के गीत गुनगुनाती है

दरिया-ए-झेलम भी तुम्हारे संग बहता है
चाँदनी रातों में मन के किस्से कहता है

तेरे इश्क़ का कहवा मैं हर शब पीता हूँ
एक तसव्वुर के सहारे सदियाँ जीता हूँ

दहशतगर्दी भी तुझे बेशक बदल नहीं पाई है
नफ़रत की हवा तुझमें कभी पल नहीं पाई है

फ़िरदौस से आई हो या उस ओर से
जहां झील में दो शिकारे गुफ्तगू करते रहते हैं
फिर से हमारे मिलने की आरज़ू करते रहते हैं ।।

@RockShayar

We Miss You Rahat Sahab

अगर  सच  को  लिखने  की  ताकत  नहीं  है
तो   लिखने   की   तुझको   ज़रूरत  नहीं  है।

इबादत   का  बदला   तो  जन्नत  है यारों
इबादत  का  मकसद  तो  जन्नत  नहीं   है।

ये दौलत  ये शोहरत  ज़मीं  की  ये  हसरत
हूँ  दरवेश  मेरी  ये   ज़रूरत    नहीं    है।

Nominated for Liebster Award

बेहद शुक्रगुज़ार हूँ मैं श्रीमती तारा पंत जी का, जिन्होंने मुझ नाचीज़ को इस सम्मान के क़ाबिल समझा.

It really means a lot to me. Mrs. Tara Pant Ji.
You are such a amazing writer and poetess.
I wish you best of luck for future.
May you always keep writing and exploring yourself. Keep blogging.

Dear bloggers…. Please do check Mrs. Tara Pant’s blog:
https://tarapant.com

Rules for this award :-

1- Thanks the blogger who has nominated you and provide the link of their blog.

2- Answer the 11 questions given to you.

3- Nominate 11 other blogger and ask your nominees 11 question.

4- Notify your nominees once you have uploaded your post.

My answers :-

1. Who named you and what is it’s meaning ?
Ans. My Name is Irfan. My Uncle gives this name to me which means Knowledgeable, The spiritual person. I love my name

2. What is your skill or hobby ?
Ans. My skill is hindi and urdu poetry. My hobby is to solve crossword and puzzles.

3. Do you feel the presence of God ?
Ans. Yes, everyday I feel the presence of Almighty in my soul. Specially when I am in trouble, I feel divine powers.

4. What is some thing that you afraid of ?
Ans. I am afraid from swimming. I think under water situation is main phobia for me.

5. Sweet memory of your childhood ?
Ans. When I got highest marks in the school and got bicycle as a reward.

6. Why do you get angry ?
Ans. When someone hurt me and break my trust. When someone trying to make prank of my honesty and simplicity.

7. Which flower do you like most ?
Ans. I like roses.

8. If you are crossing a land during a hot summer , you see a tree and sit under it What will you say to that tree ?
Ans. I will talk to tree and say some soulful verses which I wrote earlier. As a poet I always believe that my role is like a tree in journey of life.

9. If you could meet any poet or writer dead or alive ,who would he/ she be and why ?
Ans. He would be Mirza Ghalib Sahab. Because as a poet I am so connects with Ghalib sahab. It’s my very honest wish.

10. What lesson has COVID 19 Locked down given to you ?
Ans. Always nature lover. Care yourself before you have less time. Always do charity and savings for good society and future. Never ignore anyone for just money, power or anything else. Materialistic world is not a truth. So be kind with each other. Always thankful to God.

11. What are you thankful for ?
Ans. I am thankful to Almighty for all kindness and mercy on me. I always believe in humanity and love. So I am thankful to Allah Rabbul Izzat for giving me such a kind heart n peaceful soul.

☆ Questions are for the every nominees as below 

1- Introvert or extrovert? Reason?

2- Which is your favourite movie and why?

3- When is your birthday?

4- Who is your favourite blogger?

5- Describe yourself in 5 words.

6- what’s your ambition?

7- What’s special about the country you live in?

8- Favourite destination outside your country?

9- Best advice by your best friend.

10 -Your best way of passing time.

11- Tell one of your good memory.

Note :- I will separately nominate eleven , each and every blogger on their respective blogs !!


Thank you so much bloggers, For reading this

Thanks again to Mrs. Tara Pant ji for supporting my work especially for the nomination. I look forward to reading more your post in future also. Thanks.

Ready to Fight

जिन बेचैनियों को तूने अपने अंदर कहीं सुला रखा है
उन बेचैनियों को फिर से जगाने का वक़्त आ गया है।

अब जो कोई उड़ने से रोके, तो और ज्यादा उड़
इतना उड़ इतना उड़, के जाकर आसमां से जुड़।

बहुत जी ली तूने महफूज़ ज़िंदगी
अब है तेरी बारी कुछ कर दिखाने की।

इस बार ऐसी तरक़ीब लगा, ऐसा कोई दाव चल
के मुश्किल के लिये खुद, खड़ी हो जाये मुश्किल।

अब जो कोई रस्ता रोके, रस्ता नहीं खुद को बदल
अब जो कोई तुझको टोके, मंज़िल नहीं मंज़र बदल।

जिन आँसुओं को तूने अपनी आँखों में बचाये रखा है
उन आँसुओं को शोलों में बदलने का वक़्त आ गया है।

अब जो कोई जीने से रोके, तो और ज्यादा जी
इतना जी इतना जी, के पहले जैसे ज़िंदगी न जी।

बहुत कर ली तूने ग़ैरों की ग़ुलामी
अब है तेरी बारी तुझको हराने की।।

तुमसे बात करके दिल को सुकून मिलता है

तुमसे बात करके दिल को सुकून मिलता है
तुम्हें याद करके चेहरा मेरा ख़ूब खिलता है

चोट तुमको लगती है और दर्द मुझको होता है
तेरी आँखें याद करके दिल सपने नए संजोता हैं

मिलने को बेताब हूं, बेचैन बेहिसाब हूं
आहिस्ता पढ़ना मुझेे, मैं एक बंद किताब हूं

पल दो पल की मुलाक़ात भी प्यारी लगती है
तुम्हारे बिन साँसें अब बोझिल सारी लगती हैं

तुमने तो बड़ी आसानी से एक रोज़ अलविदा कह दिया
पर तु्मको क्या ख़बर हमने दिल अपना वहीं रख दिया

वादा है मेरा, तुम्हारे हर दर्द को अपना बना लूंगा
लफ़्ज़ों की ही तरह दिल की बातें तुमको बता दूंगा

अब और दूर रहके, इस तरह तो ना सताओ जानाँ
ख़ातिरदारी करेंगे खूब, दिल के दर पे आओ जानाँ

तो फिर कब मिल रही हो जानाँ, ठीक उसी जगह पे आना
जहां छोड़के गया था मैं वो दिल अपना, हां वो दिल अपना

Aansoo Aur Insan KaMuqaddar

कभी रहते हैं आंखों में, कभी गिरते हैं आंखों से
कि आंसू और इंसां का, मुक़द्दर एक जैसा है

Kabhi Rehte Hain Aankhon Mein
Kabhi Girte Hain Aankhon Se

Ki Aansoo Aur Insan Ka
Muqaddar Aik Jaisa Hai

“इंसान”

क्या ख़ूब तरक्की कर रहा हैं इंसान
हर सू हर जगह, बस मर रहा हैं इंसान ।

उजङी बस्तियां, बिखरी लाशें, जलते मक़ान 
हैवानियत को भी शर्मसार, कर रहा हैं इंसान ।

ज़मीन को फाङकर, आसमान को चीरकर
फ़ज़ाओ में ये कैसा ज़हर, भर रहा हैं इंसान ।

जिस्म के बाज़ार की तो बात ही छोङिए,
रुह तक अब अपनी, फ़रोश कर रहा हैं इंसान ।

मिट्टी से बना हैं जो, गुनाहों में सना हैं जो 
इंसानियत के, वो कोरे दावे कर रहा हैं इंसान ।

हक़ीक़त बस इतनी, जान ले ‘इरफ़ान’ तू
इंसान के हाथों ही यहाँ, मर रहा हैं इंसान ।।

तुम्हारी तस्वीर देखने के बाद ही आजकल मुझे नींद आती है 

तुम्हारी तस्वीर देखने के बाद ही आजकल मुझे नींद आती है 
जो ना देखू तुम्हारा नक़्श तो नींद कोसों दूर चली जाती है
लगता है तुमने सुकून भरी नींद को सुरमे की तरह अपनी आँखों में लगा लिया है
और जो बाक़ी बचा कुचा चैन-ओ-सुकूं था वो तुमने अपने आँचल में छुपा दिया है
हालाँकि तुम्हें यह बखूबी पता चल जाता है 
कि मैं देर रात तक तुम्हारी तस्वीरें देखता रहता हूँ
देर रात तक तुम्हें यूं तकने के लिए माफ़ी चाहता हूँ
मगर मैं करूँ भी तो क्या करूँ आखिर
मोहब्बत का मारा दिल ये बेचारा
इज़हार-ए-मोहब्बत करने से डरता है बहुत
इसीलिए तो अक्सर रात रात भर
तुम्हारी तस्वीरों के ज़रिए तुम्हें अपने आसपास महसूस कर लेता है

अब तक तुम्हारी कई तस्वीरें देख चुका हूँ मैं
हर तस्वीर में तुम बेनज़ीर बेहद हसीन लगती हो
किसी में माहज़बीं तो किसी में नाज़नीन लगती हो
कभी चश्मिश बन जाती हो, तो कभी बिना चश्मे के चैन चुराती हो
कभी ख़्वाहिश बन जाती हो, तो कभी बारिश बनके ख़ूब भिगाती हो
कभी फसल की तरह लहराती हो, तो कभी मासूम परी सी शर्माती हो
कई अलबेले से रंग नज़र आते हैं तुम्हारी तस्वीरों में
जीने के बेहतर ढंग नज़र आते हैं तु्म्हारी तस्वीरों में
तु्म्हारी हर एक तस्वीर मेरे लिए बहुत अनमोल हैं
नज़रों से देखकर इन्हें अपने दिल में सहेज लेता हूँ

तस्वीरों के इस तोहफ़े के लिए बेहद शुक्रिया
उम्मीद करता हूँ अगली बार जब भी तुम्हारी तस्वीर देखूंगा
तो तुम उस तस्वीर से बाहर निकलकर मेरे सामने आ जाओगी
और तब बताऊंगा यूं तुम्हें 
के कितना चाहता हूँ तुम्हें…

“My Rajasthan”

रंग रंगीलो राजस्थान, रंगीले सब रूप और भेस
मेहमान को हम कहते जहाँ, पधारो नी म्हारे देस

पन्ना-मीरा की धरती यह, बलिदान से मांग भरती है
रणबाँकुरों की जननी यह, वीर रस स्वांग रचती है

मिसरी सी मीठी बोली, प्रेम की पावन परिभाषा
हर चार कोस के बाद जहाँ, बदल जाती हैं भाषा

रेतीले धोरों के दरमियां, ज़िन्दगी मुस्कुराती है
मिट्टी की खुशबू लिए, लोकगीत गुनगुनाती हैं

फौलादी किलों की तरह, मज़बूत हैं इरादे यहाँ
मासूम दिलों की तरह, लोग हैं सीधे सादे यहाँ

सहनशीलता और कर्मठता, मिट्टी में इसकी घुली
त्याग ओज़ वचनबद्धता, विरासत में इसको मिली

इतिहास के पन्नों पर, दर्ज़ हैं जितनी कहानियां
वीरों की वो अमर गाथाएं, शौर्य की निशानियां

राजपूताना की यह आन बान, रखे सदा सबका मान
रण हो चाहे कृषि विज्ञान, बढ़ाई हमेशा हिंद की शान

विकास विद हैरिटेज की, नई डगर पर चल निकला है
बीमारू स्टेट की इमेज से, अब जाकर यह निकला है

सतरंगी जय राजस्थान, अतरंगी अंचल परिवेश
मेहमान को सब कहते जहाँ, पधारो नी म्हारे देस

सर्वाधिकार सुरक्षित © 2016
राॅकशायर इरफ़ान अली ख़ान
‪#‎विषयवस्तुआधारितकविताएं‬(विआक)

बारिश में अक्सर तुम याद आती हो

बारिश में अक्सर तुम याद आती हो
बूँदों के संग-संग मिलने चली आती हो
हवाओं से पुरानी यारी है मेरी
समझती है सारी बेक़रारी ये मेरी
तभी तो घने बादलों को नचाती है वो
बारिश में अक्सर तुम याद आती हो

अंदर के समंदर की बेचैनी जब भाप बनकर उठती है
घनघोर घटाओं का ताना-बाना ये फौरन बुन लेती है
पहाड़ों की दीवार से जब टकराती है वो
ठंडक मिले जहाँ वहीं बरस जाती है वो
बंजर को गुलशन हरदम बनाती है वो
बारिश में अक्सर तुम याद आती हो

मगर इन दिनों ना घटा है, ना हवा है, ना दुआ है
तभी तो ना बारिश होती है, ना ही तुम नज़र आती हो
और ना ही मुझको वो सुर, राग मल्हार आता है
गाकर जिसे मैं जब चाहूँ बुला लूं तुझे पास अपने
हाँ आता है तो बस बरसती हुई बारिश में भीग जाना
नज़र आता है तो बस बारिश में भीगा हुआ तेरा चेहरा
बारिश में अक्सर तुम याद आती हो
बूँदों के संग संग मिलने चली आती हो

दर्द महसूस भी होता है, दिल आज भी तड़पता है

दर्द महसूस भी होता है, दिल आज भी तड़पता है
तेरी एक झलक के लिए दिल आज भी तरसता है

बहुत ढ़ूंढा मैंने तुझको, ना मिली तू मुझको
तेरे इंतज़ार में बेक़रार दिल आज भी धड़कता है

दफ्तर की वो लड़की याद है अब तक

दफ्तर की वो लड़की याद है अब तक
उसकी इक मुस्कान साथ है अब तक

उसने तो पलभर में दूूरियों का दामन थाम लिया
दूर होकर भी मेरे वो पास है अब तक

उसका चेहरा किसी की याद दिलाता है मुझे
वो चेहरा मेरे लिए ख़ास है अब तक

क़िस्मत ने मिलवाया, ज़रूरत उसे बनाया
उसका मिलना एक राज़ है अब तक

सागर भी सारा पी लिया, नदियां भी समेट ली
फिर भी लबों पे इक प्यास है अब तक

जिस रोज़ उसे देखा था, देखता ही रह गया
उसकी आँखों का नूर याद है अब तक

कई बरस हो गए हैं, मनाते हुए रोते हुए
न जाने क्यों ज़िंदगी नाराज़ है अब तक।

Toh Baat Bane

कहती है तन्हाई अक्सर ये मुझसे के तुम आओ तो बात बने
थक गई निगाहें राह तकते-तकते तुम आओ तो बात बने

तेरी परछाई का नामोनिशां नज़र तक नहीं आता कहीं अब
इंतज़ार में है इंतज़ार जो मिलने तुम आओ तो बात बने

रुख़्सत के वक़्त भले ही अपना सब कुछ वापस ले जाना
पर अलविदा से पहले इक़रार करने तुम आओ तो बात बने

मेरे नसीब में क्या है ये तो मैं नहीं जानता
मगर हबीब मेरे गर नसीब में मेरे तुम आओ तो बात बने

एक अर्से से दिल ये मेरा टूटा हुआ आईना है
गर इस आईने में अक्स देखने तुम आओ तो बात बने

दूरियों ने बहुत कोशिश की हैं हमें दूर-दूर करने की
जो अब दिल से दूरियां मिटाने तुम आओ तो बात बने

ये ज़िंदगी तो ख़ैर यूँही तन्हा गुज़र गई इरफ़ान
गर फ़िरदौस में मेरा साथ देने तुम आओ तो बात बने।

उसने पलटकर देखना भी मुनासिब ना समझा

उसने पलटकर देखना भी मुनासिब ना समझा
अपनी ज़िंदगी में हमें कभी शामिल ना समझा

कैसे चलते भला ज़िंदगी की अजनबी राहों पर
जब ज़िंदगी ने ही हमको मुसाफ़िर ना समझा

“प्यारे नबी”

जिनके सदक़े में बनी है ये पूरी क़ायनात
ज़िक्र होता है जिनका सदा ख़ुदा के साथ

अज़ीम पाकीज़ा शख्सियत है प्यारे नबी
मुक़म्मल बंदगी का अकस है प्यारे नबी

सुन्नते जो सिखलाती बेहतरीन अख़लाक़
अमल करे जो उनपे, सँवरते है दोनों जहाँ

सादगी से अपनी जीता है दिलो को उन्होंने
ज़िंदगी से पेश की इंसां के लिए इक मिसाल

बुलंद ये मर्तबा ज़मीन-ओ-आसमाँ भी झुकते
सरकार-ऐ-मदीना का जलवा यूँ आफ़ताबी है

मगफिरत होगी कर ले हुजूर से जो मुहब्बत
दिल में जिसके रवां हो हसरत बस रसूल की

लिखना तो बहुत है लफ्ज़ो में वो क़ुव्वत कहा
सरवर-ऐ-आलम की तारीफ जो कर पाये बयां

जिनके लिए ही कायम है यह पूरी क़ायनात
ज़िक्र होता रहेगा उनका सदा ख़ुदा के साथ

ऐसी अज़ीम पाकीज़ा शख्सियत है प्यारे नबी
इक मुक़म्मल बंदगी का अकस है प्यारे नबी ………इरफ़ान

“यादें”

       

 

  ………यादें……..

आज फिर पुरानी यादें सामने आई है
दिल कह रहा ये तो बस इक तन्हाई है

वो लम्हा जिसे यूँही भूल आया था
बरसो पहले तू कही छोड़ आया था

यादें लहरों की तरह होती है
कब तक इनसे दूर भागेगा
इक दिन तो वो भी आयेगा
हक़ीक़त से जब रूबरू हो जायेगा

दिल कहता है काश वो दिन वापस आ जाये
मगर यादे समंदर किनारे रेत की मानिंद है
जो वक़्त के दरिया में बस घुलती जा रही है……इरफ़ान

Happy birthday Ashif

Ashif
सबसे जिगरी वो मेरा, लाखों दिलों की है वो जान
बंदा एक बिंदास है, देट इज मिस्टर आशिफ़ ख़ान
एपिक एटीट्यूड और, राॅकस्टार सी पर्सनैलिटी है
यारों में दिलफरियाद सबसे, ये कूल डूड स्मार्टी है
घर में सबसे छोटा है, पर काम करता हैं बड़े बड़े
प्रॉब्लम का करे सॉल्यूशन, चुटकी में यूँ खड़े खड़े
बचपन से ही अव्वल दर्ज़ा, हाइली हरफ़नमौला है
हर रिश्ते को इसने हमेशा, इन्सानियत से तोला है

यूँ तो इंजीनियर है मगर हर फील्ड का बादशाह है
याद रखे कायनात जिसे ऐसा कर जाने की चाह है
परिवार में हमेशा मोहब्बत के रंग भरना चाहता है
पापा के हर ख़्वाब को ये मुक़म्मल करना चाहता है
अम्मी की आँखों का तारा, फैमिली का है ये सितारा
मुश्किल हो चाहे जितनी भी, यह कभी नहीं है हारा
डांस में यह एक्सपर्ट और म्यूजिक इसका पैशन है
इंटेलिजेंस एंड इमोशन का परफेक्ट काॅम्बिनेशन है
इल्ज़ाम लगाते हैं सब इस पर, तुनक मिजाजी का
खर्चीला होने का, और रिएक्शन में जल्दबाजी का
गर्लफ्रेंड हो या ज़िंदगी, सबने इसे जमकर लूटा है
भटको की मदद करने का, रब ने इसे हुनर बख़्शा है
जितना डिजर्व करता है, उतना प्यार नहीं मिला है
जुनून की तलाश है इसे, फ़क़त क़रार नहीं मिला है
सही मायने में दिल के आइने में, सच्चा दोस्त है ये
हर रिश्ते से बढ़कर सदा सबसे अच्छा दोस्त है ये
जब कभी मैं लड़खड़ाया, इसने मुझे हौसला दिया
बेघर किया जब लोगों ने, इसने मुझे घोंसला दिया
हर साल सात जून को इसका हैप्पी बर्थडे आता है
मस्ती फन व धमाल का एक्सट्रीम ऑफर लाता है
बेस्टेस्ट बड्डी वो मेरा, फ्रेंडशिप पर है जो कुर्बान
बंदा ये बिंदास है, हिज नेम मिस्टर आशिफ़ ख़ान