तुमसे बात करके दिल को सुकून मिलता है

तुमसे बात करके दिल को सुकून मिलता है
तुम्हें याद करके चेहरा मेरा ख़ूब खिलता है

चोट तुमको लगती है और दर्द मुझको होता है
तेरी आँखें याद करके दिल सपने नए संजोता हैं

मिलने को बेताब हूं, बेचैन बेहिसाब हूं
आहिस्ता पढ़ना मुझेे, मैं एक बंद किताब हूं

पल दो पल की मुलाक़ात भी प्यारी लगती है
तुम्हारे बिन साँसें अब बोझिल सारी लगती हैं

तुमने तो बड़ी आसानी से एक रोज़ अलविदा कह दिया
पर तु्मको क्या ख़बर हमने दिल अपना वहीं रख दिया

वादा है मेरा, तुम्हारे हर दर्द को अपना बना लूंगा
लफ़्ज़ों की ही तरह दिल की बातें तुमको बता दूंगा

अब और दूर रहके, इस तरह तो ना सताओ जानाँ
ख़ातिरदारी करेंगे खूब, दिल के दर पे आओ जानाँ

तो फिर कब मिल रही हो जानाँ, ठीक उसी जगह पे आना
जहां छोड़के गया था मैं वो दिल अपना, हां वो दिल अपना