तुम्हारी तस्वीर देखने के बाद ही आजकल मुझे नींद आती है 

तुम्हारी तस्वीर देखने के बाद ही आजकल मुझे नींद आती है 
जो ना देखू तुम्हारा नक़्श तो नींद कोसों दूर चली जाती है
लगता है तुमने सुकून भरी नींद को सुरमे की तरह अपनी आँखों में लगा लिया है
और जो बाक़ी बचा कुचा चैन-ओ-सुकूं था वो तुमने अपने आँचल में छुपा दिया है
हालाँकि तुम्हें यह बखूबी पता चल जाता है 
कि मैं देर रात तक तुम्हारी तस्वीरें देखता रहता हूँ
देर रात तक तुम्हें यूं तकने के लिए माफ़ी चाहता हूँ
मगर मैं करूँ भी तो क्या करूँ आखिर
मोहब्बत का मारा दिल ये बेचारा
इज़हार-ए-मोहब्बत करने से डरता है बहुत
इसीलिए तो अक्सर रात रात भर
तुम्हारी तस्वीरों के ज़रिए तुम्हें अपने आसपास महसूस कर लेता है

अब तक तुम्हारी कई तस्वीरें देख चुका हूँ मैं
हर तस्वीर में तुम बेनज़ीर बेहद हसीन लगती हो
किसी में माहज़बीं तो किसी में नाज़नीन लगती हो
कभी चश्मिश बन जाती हो, तो कभी बिना चश्मे के चैन चुराती हो
कभी ख़्वाहिश बन जाती हो, तो कभी बारिश बनके ख़ूब भिगाती हो
कभी फसल की तरह लहराती हो, तो कभी मासूम परी सी शर्माती हो
कई अलबेले से रंग नज़र आते हैं तुम्हारी तस्वीरों में
जीने के बेहतर ढंग नज़र आते हैं तु्म्हारी तस्वीरों में
तु्म्हारी हर एक तस्वीर मेरे लिए बहुत अनमोल हैं
नज़रों से देखकर इन्हें अपने दिल में सहेज लेता हूँ

तस्वीरों के इस तोहफ़े के लिए बेहद शुक्रिया
उम्मीद करता हूँ अगली बार जब भी तुम्हारी तस्वीर देखूंगा
तो तुम उस तस्वीर से बाहर निकलकर मेरे सामने आ जाओगी
और तब बताऊंगा यूं तुम्हें 
के कितना चाहता हूँ तुम्हें…