“My Rajasthan”

रंग रंगीलो राजस्थान, रंगीले सब रूप और भेस
मेहमान को हम कहते जहाँ, पधारो नी म्हारे देस

पन्ना-मीरा की धरती यह, बलिदान से मांग भरती है
रणबाँकुरों की जननी यह, वीर रस स्वांग रचती है

मिसरी सी मीठी बोली, प्रेम की पावन परिभाषा
हर चार कोस के बाद जहाँ, बदल जाती हैं भाषा

रेतीले धोरों के दरमियां, ज़िन्दगी मुस्कुराती है
मिट्टी की खुशबू लिए, लोकगीत गुनगुनाती हैं

फौलादी किलों की तरह, मज़बूत हैं इरादे यहाँ
मासूम दिलों की तरह, लोग हैं सीधे सादे यहाँ

सहनशीलता और कर्मठता, मिट्टी में इसकी घुली
त्याग ओज़ वचनबद्धता, विरासत में इसको मिली

इतिहास के पन्नों पर, दर्ज़ हैं जितनी कहानियां
वीरों की वो अमर गाथाएं, शौर्य की निशानियां

राजपूताना की यह आन बान, रखे सदा सबका मान
रण हो चाहे कृषि विज्ञान, बढ़ाई हमेशा हिंद की शान

विकास विद हैरिटेज की, नई डगर पर चल निकला है
बीमारू स्टेट की इमेज से, अब जाकर यह निकला है

सतरंगी जय राजस्थान, अतरंगी अंचल परिवेश
मेहमान को सब कहते जहाँ, पधारो नी म्हारे देस

सर्वाधिकार सुरक्षित © 2016
राॅकशायर इरफ़ान अली ख़ान
‪#‎विषयवस्तुआधारितकविताएं‬(विआक)

बारिश में अक्सर तुम याद आती हो

बारिश में अक्सर तुम याद आती हो
बूँदों के संग-संग मिलने चली आती हो
हवाओं से पुरानी यारी है मेरी
समझती है सारी बेक़रारी ये मेरी
तभी तो घने बादलों को नचाती है वो
बारिश में अक्सर तुम याद आती हो

अंदर के समंदर की बेचैनी जब भाप बनकर उठती है
घनघोर घटाओं का ताना-बाना ये फौरन बुन लेती है
पहाड़ों की दीवार से जब टकराती है वो
ठंडक मिले जहाँ वहीं बरस जाती है वो
बंजर को गुलशन हरदम बनाती है वो
बारिश में अक्सर तुम याद आती हो

मगर इन दिनों ना घटा है, ना हवा है, ना दुआ है
तभी तो ना बारिश होती है, ना ही तुम नज़र आती हो
और ना ही मुझको वो सुर, राग मल्हार आता है
गाकर जिसे मैं जब चाहूँ बुला लूं तुझे पास अपने
हाँ आता है तो बस बरसती हुई बारिश में भीग जाना
नज़र आता है तो बस बारिश में भीगा हुआ तेरा चेहरा
बारिश में अक्सर तुम याद आती हो
बूँदों के संग संग मिलने चली आती हो

दर्द महसूस भी होता है, दिल आज भी तड़पता है

दर्द महसूस भी होता है, दिल आज भी तड़पता है
तेरी एक झलक के लिए दिल आज भी तरसता है

बहुत ढ़ूंढा मैंने तुझको, ना मिली तू मुझको
तेरे इंतज़ार में बेक़रार दिल आज भी धड़कता है

दफ्तर की वो लड़की याद है अब तक

दफ्तर की वो लड़की याद है अब तक
उसकी इक मुस्कान साथ है अब तक

उसने तो पलभर में दूूरियों का दामन थाम लिया
दूर होकर भी मेरे वो पास है अब तक

उसका चेहरा किसी की याद दिलाता है मुझे
वो चेहरा मेरे लिए ख़ास है अब तक

क़िस्मत ने मिलवाया, ज़रूरत उसे बनाया
उसका मिलना एक राज़ है अब तक

सागर भी सारा पी लिया, नदियां भी समेट ली
फिर भी लबों पे इक प्यास है अब तक

जिस रोज़ उसे देखा था, देखता ही रह गया
उसकी आँखों का नूर याद है अब तक

कई बरस हो गए हैं, मनाते हुए रोते हुए
न जाने क्यों ज़िंदगी नाराज़ है अब तक।

Toh Baat Bane

कहती है तन्हाई अक्सर ये मुझसे के तुम आओ तो बात बने
थक गई निगाहें राह तकते-तकते तुम आओ तो बात बने

तेरी परछाई का नामोनिशां नज़र तक नहीं आता कहीं अब
इंतज़ार में है इंतज़ार जो मिलने तुम आओ तो बात बने

रुख़्सत के वक़्त भले ही अपना सब कुछ वापस ले जाना
पर अलविदा से पहले इक़रार करने तुम आओ तो बात बने

मेरे नसीब में क्या है ये तो मैं नहीं जानता
मगर हबीब मेरे गर नसीब में मेरे तुम आओ तो बात बने

एक अर्से से दिल ये मेरा टूटा हुआ आईना है
गर इस आईने में अक्स देखने तुम आओ तो बात बने

दूरियों ने बहुत कोशिश की हैं हमें दूर-दूर करने की
जो अब दिल से दूरियां मिटाने तुम आओ तो बात बने

ये ज़िंदगी तो ख़ैर यूँही तन्हा गुज़र गई इरफ़ान
गर फ़िरदौस में मेरा साथ देने तुम आओ तो बात बने।

उसने पलटकर देखना भी मुनासिब ना समझा

उसने पलटकर देखना भी मुनासिब ना समझा
अपनी ज़िंदगी में हमें कभी शामिल ना समझा

कैसे चलते भला ज़िंदगी की अजनबी राहों पर
जब ज़िंदगी ने ही हमको मुसाफ़िर ना समझा

“प्यारे नबी”

जिनके सदक़े में बनी है ये पूरी क़ायनात
ज़िक्र होता है जिनका सदा ख़ुदा के साथ

अज़ीम पाकीज़ा शख्सियत है प्यारे नबी
मुक़म्मल बंदगी का अकस है प्यारे नबी

सुन्नते जो सिखलाती बेहतरीन अख़लाक़
अमल करे जो उनपे, सँवरते है दोनों जहाँ

सादगी से अपनी जीता है दिलो को उन्होंने
ज़िंदगी से पेश की इंसां के लिए इक मिसाल

बुलंद ये मर्तबा ज़मीन-ओ-आसमाँ भी झुकते
सरकार-ऐ-मदीना का जलवा यूँ आफ़ताबी है

मगफिरत होगी कर ले हुजूर से जो मुहब्बत
दिल में जिसके रवां हो हसरत बस रसूल की

लिखना तो बहुत है लफ्ज़ो में वो क़ुव्वत कहा
सरवर-ऐ-आलम की तारीफ जो कर पाये बयां

जिनके लिए ही कायम है यह पूरी क़ायनात
ज़िक्र होता रहेगा उनका सदा ख़ुदा के साथ

ऐसी अज़ीम पाकीज़ा शख्सियत है प्यारे नबी
इक मुक़म्मल बंदगी का अकस है प्यारे नबी ………इरफ़ान

“यादें”

       

 

  ………यादें……..

आज फिर पुरानी यादें सामने आई है
दिल कह रहा ये तो बस इक तन्हाई है

वो लम्हा जिसे यूँही भूल आया था
बरसो पहले तू कही छोड़ आया था

यादें लहरों की तरह होती है
कब तक इनसे दूर भागेगा
इक दिन तो वो भी आयेगा
हक़ीक़त से जब रूबरू हो जायेगा

दिल कहता है काश वो दिन वापस आ जाये
मगर यादे समंदर किनारे रेत की मानिंद है
जो वक़्त के दरिया में बस घुलती जा रही है……इरफ़ान