आईने से बातें

आईने से आख़िर क्या बातें करते हो
बताओ कभी
तुम दोनों के बीच हुई वो अनकही बातें
जो न बता सको तो जताओ कभी
तुम दोनों के दरमियां वो अधूरी मुलाक़ातें
जो न जता सको तो सुनाओ कभी
तुम दोनों के भीतर दबी वो अनसुनी आहें
जो न सुना सको तो दिखाओ कभी
तुम दोनों की आँखों में ठहरी वो गीली यादें

आईने से आख़िर क्या बातें करते हो
बताओ कभी
यूं देर तलक आलम-ए-तन्हाई में
आईने के भीतर किसे निहारते रहते हो
अनगिनत अक्स के बीच
आख़िर किसे तलाशते रहते हो
बताओ कभी
चलो अब बता भी दो

3 thoughts on “आईने से बातें

Leave a Reply to RockShayar Cancel reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s