मैं उनका दिल बहलाता हूं, वो मेरे ज़ख़्म सहलाते हैं

मेरा लहजा समझने वाले खुद को भूल जाते हैं
कई दिनों तक खुद में वो मुझको ही पाते हैं

हालांकि मैं ये सब जानबूझकर नहीं करता हूं
मैं उनका दिल बहलाता हूं, वो मेरे ज़ख़्म सहलाते हैं

“Brain/दिमाग़/मस्तिष्क/भेजा”

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इंसानी खोपड़ी भी क्या कमाल की चीज है
दिमाग को सुरक्षित रखती, ये वो चीज है

मात्र 29 हड्डियों से अपुन की खुपड़ियां बनी हैं
8 कपाल से, 14 चेहरे से, 6 कान से जुड़ी हैं

कपाल में ही तो छुपा असली माल है
साला 1400 ग्राम का दिमाग़, मचाता कितना बवाल है

खरबों न्यूरॉन्स थॉट वाली बोट चलाते हैं
बैकबॉन के ज़रिए ब्रेन को बाहुबली बनाते हैं

तीन मुख्य हिस्सों में बंटा हुआ है अपना भेजा
अगला, पिछला, मंझला, कुछ ऐसा है अपना भेजा

नर्वस सिस्टम है इसका कर्ता-धर्ता
दिमाग़ तो है बस भावनाओं का भर्ता

अगला भेजा अगेन तीन तिगाड़े में बंट जाता हैं
सेरीब्रम, थैलेमस, हाइपोथैलेमस कहलाता हैं

सोच का सागर सेरीब्रम से ही तो बहता है
थैलेमस तो बस ज़िंदगीभर दर्द ही सहता है

हाइपोथैलेमस में ही तो सब जज़्बात जवां होते हैं
गुस्सा, नफ़रत, इश्क़, मोहब्बत इसी में पनपते हैं

दिल तो बेचारा बरसों से, फोकट में ही बदनाम है
मज़नू, शायर, पागल, दीवाना, यहीं से पहचान हैं

मंझला हिस्सा हमें देखने-सुनने की शक्ति देता है
सेरीब्रल पेंडिकल दिमाग़ी तार स्पाइनल कॉर्ड से जोड़ता है

पिछले वाले हिस्से के, हैं जो दो अनमोल रतन
सेरीबेलम व मेड्यूला ऑब्लांगेटा, कहते जिन्हें सब जन

सेरीबेलम है वो खिलाड़ी, जो बॉडी का बैलेंस बनाता है
और मेड्यूला अपने इशारों पर दिल को धड़काता है

दारू पीने पर साड्डा सेरीबेलम बहक जाता है
इसी वज़ह से तो शराबी लड़खड़ाकर चलता है

सोडियम, पौटेशियम, और कैल्शियम की मदद से
इमोशन सब मोशन करते हैं इन तीनों की वज़ह से

ईईजी की मदद से दिमाग़ के तेवर पढ़े जाते हैं
ख़यालों में अक्सर ज़ेहन के ज़ेवर गढ़े जाते हैं

लाइफ का अक्खा लोचा चंद हॉर्मोंस की वज़ह से हैं
ऑक्सीटॉसिन ही तो रोमांस की रियल वज़ह है

ज़िंदगी में ज़ुनून का होना बहुत ही ज़रूरी है
साथ हो गर डोपामाइन का तो लक्ष्य से ना कोई दूरी है

कई सदमे सहता हैं, क्रेडिट जिनका के दिल लेता हैं
सदियों से बदनाम है दिमाग़, फिर भी खुश रहता है

तो बीड़ू कैसा लगा अपुन का माइंड ब्लोइंग माइंड
माइंड मत करना, क्योंकि ये है शायरी विद साइंस।

#ObjectOrientedPoems(OOPs)
#RockShayar

 

मैं लिखते वक़्त तड़पा था, तुम पढ़ते वक़्त तड़पना

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मेरी शायरी को समझने की कोशिश ना करना
ये एक समंदर है, इसमें अंदर तक उतरना

और ज्यादा कुछ नहीं बस इतना याद रखना
मैं लिखते वक़्त तड़पा था, तुम पढ़ते वक़्त तड़पना

“मैं अपने दिल को खुला आसमान समझता हूँ”

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बेज़ुबान परिंदों की ज़ुबान समझता हूँ
मैं अपने दिल को खुला आसमान समझता हूँ

जिस राह पर चलने से कतराते हैं सब
मैं उस राह को अपने लिए आसान समझता हूँ

“इंतज़ार में आपके मज़ार हुए बैठे है”

होश गंवाने को यूं बेक़रार हुए बैठे हैं
खानाबदोश मन का शिकार हुए बैठे है

चादर चढ़ाने ही सही, पर आओ कभी
इंतज़ार में आपके मज़ार हुए बैठे है

ये हुनर सीखना इतना आसान नहीं
बिन बादल देखो मल्हार हुए बैठे है

एक आप ही हो, जो क़रार के तलबगार हो
हम तो कब से यूं बेक़रार हुए बैठे है

वज़ह रही थी, इसकी भी बहुत बड़ी वज़ह
बेवज़ह तो नहीं हम ख़ुद्दार हुए बैठे है

तुमने शायद ग़ौर नहीं किया इस बारे में कभी
मुद्दत से मेरे यार इंतज़ार हुए बैठे है