“दिल की बात, हाँ सबके साथ”

 

है ये गए शनिवार की बात
जमके जिस रोज़ हुई बरसात
की नए दोस्तों से मुलाक़ात
कुछ हसीं बात हुई उस रात
ज़िन्दा हुए फिर से जज़्बात
हुई नए सफ़र की शुरुआत
"हस्ताक्षर" की ये है सौगात
दिल की बात, हाँ सबके साथ
दिल की बात, हाँ सबके साथ

क्या खूब रही वो हसीन शाम
था जिसका बड़ा ही प्यारा नाम
दिया सबने बस यही पैग़ाम
दिल जीतना अब अपना काम

Open Mind से Open Mic का 1st Chapter शुरू हुआ 
हर एक Performer ने जहां Audience के दिल को छुआ

किसी ने Music से Romantic माहौल बनाया
तो किसी ने Stand-up Comedy करके खूब हंसाया

किसी ने Flute और Guitar की जुगलबंदी की
तो किसी ने पंजाबी गानों की Parody बड़ी चंगी की

किसी ने हँसी-ठहाकों की फुलझड़ियां जलाई
तो किसी ने शायरी की रंगीन महफ़िल सजाई

किसी ने बड़े ही Feel के साथ प्यारवाली Poetry सुनाई
तो किसी ने अपनी Practical Life कविताओं में दिखाई

किसी ने सुर लगाके अपने हमसफ़र को आवाज़ लगाई
तो किसी ने अपने हमसफ़र के लिए गीतों की झड़ी लगाई

किसी ने वाह-वाह किया तो किसी ने ताली बजाई
आखिर में फिर मिलने के वादे पर हुई रस्म-ए-विदाई

है ये गए शनिवार की बात
जमके जिस रोज़ हुई बरसात
की नए दोस्तों से मुलाक़ात
कुछ हसीं बात हुई उस रात
ज़िन्दा हुए फिर से जज़्बात
हुई नए सफ़र की शुरुआत
"हस्ताक्षर" की ये है सौगात
दिल की बात, हाँ सबके साथ
दिल की बात, हाँ सबके साथ।

			

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