दोस्तों के दरमियां हिसाब नहीं होते हैं

कुछ सवालों के जवाब नहीं होते हैं
दिल के चेहरों पे नक़ाब नहीं होते हैं

बहुत कुछ बह जाता है, फिर भी बाक़ी रह जाता है
आँखों में हर वक़्त ख़्वाब नहीं होते हैं

बस एक रिश्ते ने ज़िंदगी का फ़लसफ़ा समझा दिया
दोस्तों के दरमियां हिसाब नहीं होते हैं

वक़्त की आंधी से भला, कौन बच पाया है यहां
बेवज़ह तो रिश्ते ख़राब नहीं होते हैं

भीतर से निखार देता है, बुरा वक़्त सुधार देता है
बिना काँटों के फूल गुलाब नहीं होते हैं

गर मोहब्बत गुनाह है, तो गुनाह ये क़ुबूल है
ऐसे गुनाहों के अज़ाब नहीं होते हैं

धोखा खाकर हमने तो यही सीखा है इरफ़ान
सब इंसान यहाँ खुली किताब नहीं होते हैं।

दफ्तर की वो लड़की याद है अब तक

दफ्तर की वो लड़की याद है अब तक
उसकी इक मुस्कान साथ है अब तक

उसने तो पलभर में दूूरियों का दामन थाम लिया
दूर होकर भी मेरे वो पास है अब तक

उसका चेहरा किसी की याद दिलाता है मुझे
वो चेहरा मेरे लिए ख़ास है अब तक

क़िस्मत ने मिलवाया, ज़रूरत उसे बनाया
उसका मिलना एक राज़ है अब तक

सागर भी सारा पी लिया, नदियां भी समेट ली
फिर भी लबों पे इक प्यास है अब तक

जिस रोज़ उसे देखा था, देखता ही रह गया
उसकी आँखों का नूर याद है अब तक

कई बरस हो गए हैं, मनाते हुए रोते हुए
न जाने क्यों ज़िंदगी नाराज़ है अब तक।

जो अलविदा कह दे कोई तो ज़िंदगी इंतज़ार हो जाती है

20140824_154408

आंसुओं को छुपाने की हर कोशिश बेकार हो जाती हैं
बेचैनियां जिस वक्त मेरे सिर पे सवार हो जाती हैं

लाख मनाओ इस दिल को, दिल है ये माने कहां
दिल को मनाने की ज़िद में ज़िंदगी मज़ार हो जाती है

बहुत वक़्त दिया मैंने, खुद को भी और उसको भी
फिर भी हर बार मेरी तन्हाई से तकरार हो जाती है

कोई क़लम से वार करता है, तो कोई सितम बेशुमार करता है
एक ख़बर में सिमटकर ये ज़िंदगी अख़बार हो जाती है

वैसे तो वैसा कोई मिला नहीं, जैसा मुझको मिला कभी
दिख जाए गर कोई वैसा तो ये आँखें बेक़रार हो जाती हैं

किसी से दिल मिलता नहीं, किसी से दिल भरता नहीं
पता नहीं क्यों मुझसे यही ख़़ता हर बार हो जाती है

एक अलविदा कहने में ये ज़ुबान बेज़ुबान हो जाती है
जो अलविदा कह दे कोई तो ज़िंदगी इंतज़ार हो जाती है।

दर्द महसूस भी होता है, दिल आज भी तड़पता है

दर्द महसूस भी होता है, दिल आज भी तड़पता है
तेरी एक झलक के लिए दिल आज भी तरसता है

बहुत ढ़ूंढा मैंने तुझको, ना मिली तू मुझको
तेरे इंतज़ार में बेक़रार दिल आज भी धड़कता है

कभी खुशबू तो कभी साये के पीछे भागता हूँ

बारिश में भीगकर भी मैं प्यासा रह जाता हूँ
कभी खुशबू तो कभी साये के पीछे भागता हूँ

मेरी नींद का फ़लसफ़ा बस इतना समझ लीजिए
पलकों के ऊपर सोता हूँ पलकों के नीचे जागता हूँ