जब कई दिन हो जाते हैं तुमको देखे गए

जब कई दिन हो जाते हैं तुमको देखे गए

तो नज़रों को अपनी काबिलियत पे शक होने लगता है
 
निगाहों का अपनी निगाह पर यूं शक करना
उस वक़्त और भी पुख़्ता हो जाता है
जब ख़्वाब में भी तुम कहीं नज़र नहीं आती हो
हरज़ाई सी हकीकत बनकर ज़ेहन से उतर जाती हो
हर बार दूरियों का दामन थामकर दूर कहीं निकल जाती हो
 
इस बार सोच रहा हूँ
कि उस सोच को ही दबोच लू
जिस सोच में तेरा एहसास बसता है
गर नहीं हुआ जिस सोच में तेरा एहसास
तो उस सोच को ही नज़रों से खरोंच दूंगा
वैसे भी दिल को आजकल दर्द सहने का शऊर आ गया है
अजनबी राहों पर तन्हा चलने का यह फ़ितूर भा गया है
 
जब कई दिन हो जाते हैं तुमको सोचे हुए
तो ख़यालों को अपनी क़ैफ़ियत पे शक होने लगता है
इस शक को दूर करने का अब एक ही तरीका है

हमें मिलकर कुछ यादें सहेज लेनी चाहिए…

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