मेरे दिल के दफ़्तर में एक लड़की काम करती है…

मेरे दिल के दफ़्तर में एक लड़की काम करती है
आसपास जिसके होने से यह ज़िन्दगी महकती है
 
जिस रोज़ वो नहीं आती है, उस रोज़ मेरा मन नहीं लगता है
जिस रोज़ वो नहीं दिखती है, उस रोज़ ये दिल बहुत डरता है
 
ना कोई बिन बुलायी मेहमान है, ना कोई पुरानी जान पहचान है
फिर भी ऐसा लगता है मानो, गुज़री यादों में उसके ही निशान है
 
उसकी एक मुस्कुराहट से दिन भर की थकान उतर जाती है
उसके क़दमों की आहट सुनते ही ख़ामोशी भी मचल जाती है
 
क़लम की तरह सीधे दिल पे वार करती है
आँखों ही आँखों में बेनज़ीर इक़रार करती है
 
मेरे दिल के दफ़्तर में एक लड़की काम करती है
आसपास जिसके होने से बंजर में भी बारिश होती है
 
जिस रोज़ वो नहीं आती है, उस रोज़ मेरा मन नहीं लगता है
उस रोज उसकी याद में हर एक पल मानो सदी सा गुज़रता है
 
ना कोई मुंतज़िर मेजबान है, ना कोई पुरानी जान पहचान है
फिर भी ऐसा लगता है मानो, उसी में बस गई मेरी जान है।

One thought on “मेरे दिल के दफ़्तर में एक लड़की काम करती है…

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