“पड़ोस में रहने की बात कर के दूर चली जाती हो”

पड़ोस में रहने की बात कर के दूर चली जाती हो
लगता है तुम भी मेरी तरह खुद को आज़्माती हो

नज़रों के ख़त पढ़ना तुम्हें भी तो आता है
नादान ये दिल मेरा, इक़रार करने से घबराता है

सब जानकर भी, यूं अनजान बनती हो
तुम्हें पता है, तुम मेरे दिल में रहती हो

जब भी मुझसे बात करती हो, ये साफ़ पता चलता है
के मेरी तरह तुम्हारा भी दिल ये, जोरो से धड़कता है

मोहब्बत हो गयी है, इस बात को छुपाना क्यों
जज़्बात गर छुपा भी लो, तो आँखों में नज़र आ जाते हैं

जिस दिन तुम नहीं दिखती हो, आँखें बंद कर लेता हूँ
बंद आँखों से हर बार सामने तुमको ही पाता हूँ

बार-बार खुद को बस यही यक़ीन दिलाता हूँ
के इस बार तो यह ख़्वाब सुबह का ख़्वाब निकले

नींद खुलने से पहले जी भर के देखता हूँ तुम्हें
क्या पता फिर यह ख़्वाब ख़्वाब ही ना रह जाए

पलकों पे रहने की बात कह के गुम हो जाती हो
लगता है तुम भी मेरी तरह खुद को सताती हो।

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