“तुम यहीं हो कहीं”

मैं अब भी उस बारिश का इंतज़ार कर रहा हूँ
जिसका होना हमारे मिलने का इशारा होता था

तुम्हें याद है एक दिन मैंने एक दीवानगी की थी
जिस दिन तुम बारिश में पूरी तरह भीग गयी थी
और मैं उस बरसती बारिश में तुम्हें बाइक पर लेने आया था
उन गीले कपड़ों को मैंने कई दिनों तक सूखने नहीं दिया था
जिनमें तुम्हारी खुशबू ठहर गयी थी
उस पल दिल में एक लहर उठी थी

मैं अब भी उस लहर का इंतज़ार कर रहा हूँ
जिसका उठना तुम्हारे आस-पास होने का इशारा होता था

तुम्हें याद है तुमने मुझे एक बार अपना स्कार्फ दिया था
जिसको छूने पर मुझे तुम्हारा वो चेहरा महसूस हुआ था
जिसके महीन रेशों में तुम्हारी ज़ुल्फ़ों का साया छुपा था
जिसके पश्मीना धागों में तुमने अपना एहसास बुना था
बाइक चलाते हुये अक्सर जिसे मैं मुँह पर बाँध लेता था
तब ऐसा लगता मानों तुम मुझे साँसें दे रही हो
और सर्दियों में जब उसे अपने गले में बाँधता
तब ऐसा लगता मानों तुमसे गले मिल रहा हूँ

मैं अब भी उस एहसास का इंतज़ार कर रहा हूँ 
जिसका होना फिर से मिलने का इशारा होता है

आज फिर वही बारिश हो रही है
फिर वही लहर उठ रही है
फिर वही एहसास हो रहा है
के तुम यहीं हो कहीं, मुझमें हो छुपी
तुम यहीं हो कहीं, मुझमें हो बसी।

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