“दिल को नये बहाने और लिखने को मौज़ू देती है”

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दिल को नये बहाने और लिखने को मौज़ू देती है
वो कौन है जो आरज़ू बनकर मेरे दिल में रहती है।

उसके बारे में क्या कहूँ, मैं बिन कहे कैसे रहूँ
वो जो होंठो से नहीं, आँखों से हर बात कहती है।

दिल से धड़कन का रिश्ता, कुछ ऐसा है हमारा रिश्ता
दिल के हर इक हिस्से में आजकल वही रहती है।

जब भी वो आती है, मेरी दुनिया महका जाती है
एक खुशबू है वो एक खुशबू, जो रूह में बसती है।

इक-दूसरे के बिना अधूरे हैं, हम साथ होकर ही पूरे हैं
मैं ठहरा आवारा बादल, वो हवाओं सी बहती है।

दिल चाहता है उसकी बातें, करता रहूँ बस करता रहूँ
वो जो ख़ामोश रहकर भी, अनकही हर बात कहती है।

ज़िंदगी में ज़िंदगी बनकर, जब से वो आयी इरफ़ान
सोहबत में उसकी यह ज़िंदगी, फूलों सी महकती है।।

मौज़ू – topic

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