“हर बार की तरह इस बार भी बहुत दूर हैं हम”

हर बार की तरह इस बार भी बहुत दूर हैं हम
हर बार की तरह इस बार भी बहुत मज़बूर हैं हम।

दूर जाने की चाहत, न तुम्हे है न मुझे है
पास न आने की हसरत, न तुम्हे है न मुझे है।

कोशिश ने भी अब तो कोशिश करना छोड़ दिया है
दिल के बेइरादा इरादे समझ चुकी है वो।

लेकिन हम हैं कि समझने को तैयार नहीं
आवारा मन हैं कि बदलने को तैयार नहीं।

हर बार की तरह इस बार भी वही गलती दोहरायेंगे हम
हर बार की तरह इस बार भी खुद को भूल जायेंगे हम।

गलती सुधारने की चाहत, न तुम्हे है न मुझे है
गलती न करने की हसरत, न तुम्हे है न मुझे है।

उम्मीद ने भी अब तो उम्मीद का साथ छोड़ दिया है
दिल के बेपरवाह इरादे समझ चुकी है वो।

लेकिन हम हैं कि समझने को तैयार नहीं
आवारापन हैं कि बदलने को तैयार नहीं।

हर बार की तरह इस बार भी वही भूल दोहरायेंगे हम
हर बार की तरह इस बार भी खुद को भूल जायेंगे हम।

यादों से मिटाने की चाहत, न तुम्हे है न मुझे है
दोबारा न मिलने की हसरत, न तुम्हे है न मुझे है।

किस्मत ने भी अब तो किस्मत का साथ छोड़ दिया है
दिल के बेमिसाल बहाने समझ चुकी है वो।

लेकिन हम हैं कि समझने को तैयार नहीं
बंजारापन हैं कि बदलने को तैयार नहीं।

मगर इस हर बार की तरह नहीं कुछ अलग होगा
मोहब्बत हो गयी है, सो दुश्मन ये सारा जग होगा।

अब जुदा-जुदा जीने की चाहत, न तुम्हे है न मुझे है
मोहब्बत में न लुटने की हसरत, न तुम्हे है न मुझे है।

ज़िंदगी ने भी अब तो ज़िंदगी का हाथ थाम लिया है
दिल के बेपनाह इरादे समझ चुकी है वो।

इसीलिए तो अब हम बहुत दूर रहने को तैयार नहीं
इसीलिए तो अब हम यह दूरी सहने को तैयार नहीं।।

@RockShayar⁠⁠⁠⁠

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