“अगर मैं तुमसे ये कहूँ”

अगर मैं तुमसे ये कहूँ
के तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो
तो इस बारे में तुम्हारा क्या कहना है
मुझे तो सनम संग तुम्हारे ही रहना है।

रहने को या कहने को तो हम दोनों तन्हा हैं
फिर भी साथ-साथ हर जगह हर लम्हा हैं
मेरा हर लफ़्ज़ तुम्हारी खुशबू से वाकिफ़ हैं
तुम्हारा हर लम्स मेरी आरज़ू के काबिल हैं।

अगर मैं तुमसे ये कहूँ
के तुम मुझे बहुत सच्ची लगती हो
तो इस बात पर तुम्हारा क्या कहना है
मुझे तो रोज़ आता तुम्हारा ही सपना है।

सपने में तुम और भी हसीन लगती हो
चाँदनी में नहाई हुई नाज़नीन लगती हो
ख़ामोशी की चादर ओढ़े हुये हैं लब तुम्हारे
नैनों के वो ढ़ेरों ख़त पढ़े हुये हैं सब तुम्हारे।

अगर मैं तुमसे ये कहूँ
के तुम मुझे बहुत प्यारी लगती हो
तो इस बारे में तुम्हारा क्या कहना है
मुझे तो सनम साथ तुम्हारा ही देना है।

साथ देने और साथ रहने में बहुत फर्क़ है
ज़िंदगी का क्या है, ये ज़िंदगी तो बेदर्द है
एहसास को तलाश के तराजू में ना तोलो
गर महसूस करो तो एहसास ही हमदर्द है।

अगर मैं तुमसे ये कहूँ
के तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो
तो इस बारे में तुम्हारा क्या कहना है
मुझे तो बेबाक संग तुम्हारे ही बहना है।

बहते-बहते जाने जहां, कहाँ आ गये हैं हम
नील समंदर फैला जहाँ, वहाँ आ गये हैं हम
एक आहट है जो सुकून-ओ-राहत देती है
दिल ने दस्तक देकर सब मिटा दिये हैं ग़म।

अगर मैं तुमसे ये कहूँ
के तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो
तो इस बारे में तुम्हारा क्या कहना है
मुझे तो सनम संग तुम्हारे ही रहना है
मेरे दिल का फ़क़त तुमसे यह कहना है
मुझे तो सनम संग तुम्हारे ही जीना है।।

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“मैं सोने से पहले हर रोज़ तुम्हारी तस्वीर देखता हूँ”

बेशक ये सच है कि तुमसे जुड़ी हर चीज देखता हूँ
मैं सोने से पहले हर रोज़ तुम्हारी तस्वीर देखता हूँ।

ख़्वाब आये तो सिर्फ तुम्हारा आये, वरना ना आये
इसलिये तो तकिये के नीचे रखी तस्वीर देखता हूँ।

ये वक़्त वो वक़्त, पता नहीं कौन ज्यादा सख़्त
हर वक़्त बेवक़्त बस वक़्त की तस्वीर देखता हूँ।

जब भी तेरी याद सताये, रूह मेरी यह फड़फड़ाये
दिल के बंद कमरे में टंगी तुम्हारी तस्वीर देखता हूँ।

नज़रों से क्या छुपा हैं, नज़रों में तो सब छुपा हैं
नज़रों के सफ़र में हमसफ़र तेरी तस्वीर देखता हूँ।

वैसे तो कई तस्वीरें हैं, देखने को इस जहान में
पर ना जाने क्यों मैं तुम्हारी ही तस्वीर देखता हूँ।

जब नींद ना आये इरफ़ान, बेचैनी करने लगे परेशान
तब तसव्वुर की आँखों से तेरी तस्वीर देखता हूँ।।

#RockShayar⁠⁠⁠⁠

“बदहवास ब्लू व्हेल”

जिस ज़िंदगी ने तकनीक को नई एक ज़िंदगी दी
वही तकनीक आज हमसे यह ज़िंदगी छीन रही।

ये तरक्कीपसंद इंसान न जाने किसे तरक्की कह रहा हैं
तमाशाई बनकर बस अपनी मौत का तमाशा देख रहा हैं।

कौन बुजदिल नामुराद है जो ऐसा जाल फेंक रहा है
ये कैसा खेल है जो मासूम बच्चों की जान ले रहा है।

बेचारी ब्लू व्हेल को तो पता तक नहीं
कि वो इतनी ज्यादा बदनाम हो गयी।

वर्चुअल टास्क को पूरा करने के चक्कर में
ज़िंदगी के बेहद ज़रूरी टास्क थम जाते हैं।

कोई हाथ पर ब्लेड से कट मार रहा हैं
तो कोई सुसाइड नोट तैयार कर रहा हैं
कोई रेल के आगे आ रहा हैं
तो कोई फिनाइल पी रहा हैं।

कोई फाँसी का फंदा चूम रहा हैं
तो कोई नशे में धुत झूम रहा हैं
कोई कलाई की नस काट रहा हैं
तो कोई अपना गला काट रहा हैं।

आज स्मार्टफोन चलाने वाले करोड़ों स्मार्ट यूजर्स को
ऐबदार एप्स और गड़बड़ गेम्स ने ग़ुलाम बना रखा हैं।

लानत है ऐसे तकनीकपरस्त समाज पर
जिसे डिजिटल नशे की बुरी लत लग गई।

राष्ट्रीयता का रोना रोने वालों
ज़रा इस पर भी तुम ग़ौर करो
इस ई-ग़ुलामी से आज़ादी का
अब ठोस प्रबंध कोई और करो।

जिस लाइफ ने टेक्नोलॉजी को एक न्यू लाइफ दी
वही टेक्नोलॉजी आज हमसे यह लाइफ छीन रही।।⁠⁠⁠⁠

“चट्टानों की तरह है वुज़ूद मेरा, लहरों की तरह है वुज़ूद तेरा”

चट्टानों की तरह है वुज़ूद मेरा
लहरों की तरह है वुज़ूद तेरा।

खुश्क़ सहराओं से कोसों दूर
समंदर किनारे अपना बसेरा।

चट्टानों पर खड़ी होकर खुद को निहारती हो
पानी को आईना बनाकर जुल्फ़ें संवारती हो।

चट्टानों की फ़ितरत हैं पथरीला बन जाना
लहरों की तो आदत हैं सब बहा ले जाना।

चट्टानों पर खड़ी होकर दरिया-ए-दिल देखती हो
पानी को स्याही समझकर हाल-ए-दिल लिखती हो।

चट्टानों की किस्मत हैं लहरों के मुस्लसल थपेड़ें सहना
लहरों की तो हसरत हैं चट्टानों के माथे पर बोसा लेना।

चट्टानों के पास आती हो और फिर दूर निकल जाती हो
पानी को हथेलियों में भरकर खुद को महसूस करती हो।

चट्टानों की चाहत हैं लहरों को ठहरना सिखाना
लहरों की तो आदत हैं चट्टानों से रोज टकराना।

चट्टानों पर खड़ी होकर जाने क्या सोचती हो
पानी को ख़त समझकर गीले पन्ने पलटती हो।

चट्टानों की फ़ितरत हैं लहरों को साहिल पर ही रोक देना
लहरों की तो आदत हैं चट्टानों को छूकर फिर लौट जाना।

चट्टानों की मोहब्बत हैं लहरें
लहरों की तो चाहत हैं चट्टानें।

एक दूसरे के बिना, किसी समंदर को न जाने ये दोनों
एक दूसरे से मिलकर, लगे हैं समंदर को पाने ये दोनों।

चट्टानों की तरह है वज़ूद मेरा
लहरों की तरह है वज़ूद तेरा।

इस बार जब मुलाक़ात होगी
दिल के साहिल पर होगा सवेरा।।

-राॅकशायर⁠⁠⁠⁠

“मुझको रोकने की कभी हिम्मत न करना”

मुझको रोकने की कभी हिम्मत न करना
गलती से भी टोकने की हिम्मत न करना।

दहकती आग हूँ मैं, मासूम मोम हो तुम
पास आने की कभी ज़ुर्रत न करना।

माफ़ कर देना, दिल को साफ़ कर लेना
रब से किसी की शिकायत न करना।

औरों के लिये, कोई और बनकर
खुद से कभी तुम बग़ावत न करना।

महसूस न कर पाओ जिसे खुद में तुम
उस शख़्स से कभी मोहब्बत न करना।

मौत भी तो एक मुकम्मल ज़िंदगी है
फिर ऐसी ज़िंदगी की चाहत क्या करना।

मरकर हमने तो इतना ही जाना इरफ़ान
के खुद से कभी तुम नफ़रत न करना।।

“हिन्दी केवल एक भाषा नहीं”

हिन्दी केवल एक भाषा नहीं
सृजन की यह आभा है
हिन्दी केवल एक गाना नहीं
जीवन की जयगाथा है।

हिन्दी केवल एक वर्ग नहीं
विविधताओं का भंडार है
हिन्दी केवल एक तर्क नहीं
समीक्षाओं का संसार है।

हिन्दी बहुत सरल है
प्रकृति जिसकी तरल है
संवेदनाओं की भूमि में
यह परिपक्व फसल है।

हिन्दी केवल मातृभाषा नहीं
संवैधानिक एक पर्व है
हिन्दी केवल राजभाषा नहीं
गणतांत्रिक यह गर्व है।

हिन्दी केवल एक बोली नहीं
चिंतन की यह उपमा है
हिन्दी केवल एक मोती नहीं
मंथन की यह महिमा है।

अभिव्यक्ति का अंश है
यह न कोई अपभ्रंश है
आदिकाल से भी आदि
सभ्यताओं का वंश है।

हिन्दी केवल एक भाषा नहीं
जीवन की यह ज्वाला है
हिन्दी केवल परिभाषा नहीं
सृजन का यह प्याला है।

हिन्दी केवल एक संकाय नहीं
ज्ञान की यह दृष्टि है
हिन्दी केवल एक पर्याय नहीं
सम्मान की यह सृष्टि है।

इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं
के साहित्यिक पतन रोकती यही
पठन-पाठन अतिसुंदर लेखन
लोक-लुभावनी लोकोक्ति यही।

हिन्दी केवल एक भाषा नहीं
जीवन की जिज्ञासा है
हिन्दी केवल एक आशा नहीं
मन की महत्वाकांक्षा है।

हिन्दी केवल एक मंत्र नहीं
आध्यात्मिक अनुनाद है
हिन्दी केवल एक छंद नहीं
यह आत्मिक अनुवाद है।

अनुदार नहीं बहुत उदार है यह
उद्वेलित मन का उपहार है यह
वैचारिक व्याकरण से सुसज्जित
हृदय का उद्दीप्त उद्गार है यह।

हिन्दी केवल एक भाषा नहीं
जीवन की जिजीविषा है
हिन्दी केवल अभिलाषा नहीं
सृजन की सही दिशा है।

हिन्दी केवल एक मुक्तक नहीं
मर्म की मधुशाला है
हिन्दी केवल एक पुस्तक नहीं
कर्म की पाठशाला है।

राष्ट्रीय गौरव है यह
शासकीय सौरव है यह
क्लिष्ट और कर्कश नहीं
मधुर कलरव है यह।

हिन्दी केवल एक पथ नहीं
चिंतन की उपमा है
हिन्दी केवल एक रथ नहीं
मंथन की महिमा है।

हिन्दी केवल चलचित्र नहीं
अभिव्यक्ति का संगीत है
हिन्दी केवल एक क्षेत्र नहीं
अनुभूति का यह गीत है।

हिन्दी केवल एक प्रदेश नहीं
बल्कि संपूर्ण भारत है
हिन्दी केवल राजआदेश नहीं
बौद्धिक अभिभावक है।

हिन्दी केवल शब्दकोश नहीं
विधाओं का विस्तार है
हिन्दी केवल ज्ञानकोश नहीं
मेधाओं का मल्हार है।

हिन्दी केवल एक भाषा नहीं
कवि की कविता है
हिन्दी केवल एक आशा नहीं
रवि की सविता है।

हिन्दी केवल एक अक्षर नहीं
यह विशिष्ट योग्य वर्ण है
हिन्दी केवल हस्ताक्षर नहीं
अपितु हृदय का दर्पण है।

हिन्दी केवल मातृभाषा नहीं
सृजन की यह आभा है
हिन्दी केवल राष्ट्रभाषा नहीं
जीवन की महागाथा है।।

-राॅकशायर इरफ़ान अली ख़ान⁠⁠⁠⁠

“काली-काली जुल्फ़ें तेरी आँखें भी हैं काली-काली”

काली-काली जुल्फ़ें तेरी आँखें भी हैं काली-काली
तेरी बातों के बिना मेरी बातें भी हैं ख़ाली-ख़ाली।

उठते-बैठते हर वक़्त तुम्हारी तस्वीर से बात करता हूँ
जागते-सोते हर वक़्त तुम्हें याद रखकर याद करता हूँ।

हालाँकि बेपनाह चाहता हूँ तुम्हें, लेकिन कभी नहीं बताता हूँ तुम्हें
गुस्से में और भी हसीन लगती हो, इसीलिये तो सताता हूँ तुम्हें।

काली-काली जुल्फ़ें तेरी आँखें भी हैं काली-काली
तेरी आँखों के बिना मेरी आँखें भी हैं ख़ाली-ख़ाली।

पता ही नहीं चला कब तुमसे मोहब्बत हो गई
पता ही नहीं चला कब तुम्हारी आदत हो गई।

तुम्हें तो शायद ये भी पता नहीं कि तुम्हें सोचता हूँ मैं
तुम्हें तो शायद ये भी मालूम नहीं कि तुम्हें लिखता हूँ मैं।

काली-काली जुल्फ़ें तेरी आँखें भी हैं काली-काली
तेरी साँसों के बिना मेरी साँसें भी हैं ख़ाली-ख़ाली।

तुम्हें मुझसे ही मोहब्बत करने की कोई बंदिश नहीं
तुम्हें मेरा ही साथ देने की मैं करता गुज़ारिश नहीं।

एक दिन तुम यह जान जाओगी कि तुम्हारा आशिक कौन था
एक दिन तुम यह मान जाओगी कि तुम्हारा साहिल कौन था।

काली-काली जुल्फ़ें तेरी आँखें भी हैं काली-काली
तेरी यादों के बिना मेरी यादें भी हैं ख़ाली-ख़ाली।।⁠⁠⁠⁠

“गुच्छे की आखिरी चाबी भी कभी-कभी ताला खोल देती हैं”

गुच्छे की आखिरी चाबी भी कभी-कभी ताला खोल देती हैं
ये सच है कि निगाहें दिल की अनकही हर बात बोल देती हैं।

नज़रों की बेनज़ीर शमशीर, जब किसी पर चलती है तो
कुछ बोलने से पहले नज़रों में छुपा हर डर खोल देती हैं।

गुनगुनाते हुये गीत की तरह, मुस्कुराते हुये संगीत की तरह
इतनी गहरी है तुम्हारी आँखें कि मेरा मन टटोल लेती हैं।

वैसे तो बेज़ुबां आँखें बोलती नहीं, राज़ कभी कोई खोलती नहीं
पर हो यक़ीं जिस पर, अपना हर राज़ उसे बोल देती हैं।

पढ़ने वाली और लिखने वाली, एक ही नज़र के कई हुनर
बिना तराजू और बाट के फट से वज़्नी हर्फ़ तोल देती हैं।

पहली नज़र का वो असर, नज़रों से कभी नज़र मिलाकर तो पूछो
बिना सोचे-समझे बिना पूछे-ताछे बस हाँ बोल देती हैं।

सारी ज़िंदगी गुज़र गयी, बस यही बात नज़र आयी
कि रोते वक़्त अमूमन आँखें अपना दिल खोल देती हैं।।

@RockShayar⁠⁠⁠⁠

“कश्मीर”

ख़ुदा ने जिस कश्मीर को जन्नत जैसा खूबसूरत बनाया
इंसान ने उसी कश्मीर को आज दोज़ख जैसा बना दिया।

एक अर्से से वादी में आज़ादी का खेल चल रहा है
कई बरसों से नफ़रत की आग में दिल जल रहा है।

ज़िहाद के नाम पर फ़साद करने वालों सुनो ज़रा
खुद अपने ही घरों को तुमने अपने हाथों जलाया।

जिन लोगों पर पागल होकर पत्थर फेंक रहे हो तुम
जब बाढ़ आई तब इन्हीं लोगों ने था तुमको बचाया।

सियासत के नाम पर हर जगह जो तिजारत हो रही हैं
मादर-ए-वतन से आज क्यों इतनी बग़ावत हो रही हैं।

नेता तो यही चाहते हैं ये बर्बादी यूँही चलती रहे
दहशतगर्दी के साये में यह वादी यूँही जलती रहे।

मज़हब के ठेकेदारों ने ख़ूब मोर्चा संभाल रखा है
मासूमियत के दिल में हैवानियत को पाल रखा है।

खिलौनों की जगह हाथों में बंदूक थमा दी जाती हैं
ज़ेहन में ज़हर भरकर मौत मंज़ूर करा ली जाती हैं।

अब तो ये पहाड़ भी कुछ बोलते नहीं
ख़ून के दाग़ धब्बे खुद पर टटोलते नहीं।

अब तो ये नदियाँ भी कुछ कहती नहीं
बहता ख़ून देखकर बहना बंद करती नहीं।

अब तो ये धुंध भी ज्यादा देर रुकती नहीं
सूरज की रौशनी से आजकल डरती नहीं।

अब तो झील पर शिकारे भी ख़ामोश चलते हैं
पानी पर चलते हैं, फिर भी जाने क्यों जलते हैं।

कोई कुछ नहीं बोलता अब, सबने जीना सीख लिया हैं
झूठी आज़ादी के लिये, समझौता करना सीख लिया हैं।

सब समझ चुके हैं यहाँ, जिसने भी अपना मुँह खोला
पहना दिया जाता हैं उसे, उसी पल फांसी का चोला।

ख़ुदा ने जिस कश्मीर को जन्नत जैसा हसीन बनाया
इंसान ने उसी कश्मीर को आज जहन्नुम बना दिया।

मुद्दत से वादी में आज़ादी का खेल चल रहा है
शिद्दत से नफ़रत की आग में दिल जल रहा है।

अफ़सोस, के अब तक कोई न समझ सका इस दर्द को
अफ़सोस, के अब तक कोई न पकड़ सका इस मर्ज़ को।

अपनी बदहाली पर कई बरसों से रो रहा है कश्मीर
अपने गुनाहों का बोझ सदियों से ढ़ो रहा है कश्मीर।।

@राॅकशायर⁠⁠⁠⁠

“बदलते-बदलते आखिरकार पूरी तरह बदल गयी”

बदलते-बदलते आखिरकार पूरी तरह बदल गयी
गिरते-पड़ते चलते-चलते ज़िंदगी खुद संभल गयी।

कल को आज समझ बैठे, पल में कई सदियाँ समेटे
ये उम्र भी आखिर उम्र निकली, एक रोज़ ढ़ल गयी।

पकड़ने की बहुत कोशिश की, पर नतीजा यह निकला
के ज़िंदगी की मछली वक़्त के हाथों फिसल गयी।

पता ही नहीं चला कभी, कब दिन ढ़ला कब रात हुई
चुपके-चुपके दबे पाँव, तन्हाई मुझको निगल गयी।

सुना है कि पत्थरदिल पिघलते नहीं, गलत सुना है
मरते-मरते मौत भी खुद मौत देखकर पिघल गयी।

जो चाहा वो पाया, जो सोचा वो कर दिखाया
और कुछ नहीं बस मेरी तन्हाई मुझको खल गयी।

अब भी महसूस करता हूँ, वो तपिश अपने अंदर
ऐसी आग लगाई उसने कि रूह तक जल गयी।।

@राॅकशायर⁠⁠⁠⁠

“वो हुस्न ही क्या जो सही सलामत छोड़ दे”

वो हुस्न ही क्या जो सही सलामत छोड़ दे
वो इश्क़ ही क्या जो बग़ावत करना छोड़ दे।

इंतक़ाम की हसरत, बड़ी क़ातिल और हसीन हसरत
वो नफ़रत ही क्या जो नफ़रत करना छोड़ दे।

मुहाफ़िज़ बन बैठे हैं सब मुज़रिम आजकल
वो अदालत ही क्या जो खुद अपना क़ानून तोड़ दे।

गुनाहों से सौ बार डरना, फिर भी हर बार गुनाह करना
वो शरीफ़ ही क्या जो शराफ़त का दामन छोड़ दे।

खेल-खेल में रेल चलाना, हर बात को खेल समझना
वो बचपन ही क्या जो शरारत करना छोड़ दे।

अंदर ही अंदर रहती है, सोच में कहीं बहती है
वो हसरत ही क्या जो अपनी हसरत करना छोड़ दे।

नसीब का यह अजीब पहिया, नसीब ही जाने भय्या
वो किस्मत ही क्या जो पल-पल बदलना छोड़ दे।

ज़िंदगी से मोहब्बत, क्या खाक़ मोहब्बत
वो मोहब्बत ही क्या जो हमें ज़िन्दा छोड़ दे।।

@RockShayar⁠⁠⁠⁠

“हर बार की तरह इस बार भी बहुत दूर हैं हम”

हर बार की तरह इस बार भी बहुत दूर हैं हम
हर बार की तरह इस बार भी बहुत मज़बूर हैं हम।

दूर जाने की चाहत, न तुम्हे है न मुझे है
पास न आने की हसरत, न तुम्हे है न मुझे है।

कोशिश ने भी अब तो कोशिश करना छोड़ दिया है
दिल के बेइरादा इरादे समझ चुकी है वो।

लेकिन हम हैं कि समझने को तैयार नहीं
आवारा मन हैं कि बदलने को तैयार नहीं।

हर बार की तरह इस बार भी वही गलती दोहरायेंगे हम
हर बार की तरह इस बार भी खुद को भूल जायेंगे हम।

गलती सुधारने की चाहत, न तुम्हे है न मुझे है
गलती न करने की हसरत, न तुम्हे है न मुझे है।

उम्मीद ने भी अब तो उम्मीद का साथ छोड़ दिया है
दिल के बेपरवाह इरादे समझ चुकी है वो।

लेकिन हम हैं कि समझने को तैयार नहीं
आवारापन हैं कि बदलने को तैयार नहीं।

हर बार की तरह इस बार भी वही भूल दोहरायेंगे हम
हर बार की तरह इस बार भी खुद को भूल जायेंगे हम।

यादों से मिटाने की चाहत, न तुम्हे है न मुझे है
दोबारा न मिलने की हसरत, न तुम्हे है न मुझे है।

किस्मत ने भी अब तो किस्मत का साथ छोड़ दिया है
दिल के बेमिसाल बहाने समझ चुकी है वो।

लेकिन हम हैं कि समझने को तैयार नहीं
बंजारापन हैं कि बदलने को तैयार नहीं।

मगर इस हर बार की तरह नहीं कुछ अलग होगा
मोहब्बत हो गयी है, सो दुश्मन ये सारा जग होगा।

अब जुदा-जुदा जीने की चाहत, न तुम्हे है न मुझे है
मोहब्बत में न लुटने की हसरत, न तुम्हे है न मुझे है।

ज़िंदगी ने भी अब तो ज़िंदगी का हाथ थाम लिया है
दिल के बेपनाह इरादे समझ चुकी है वो।

इसीलिए तो अब हम बहुत दूर रहने को तैयार नहीं
इसीलिए तो अब हम यह दूरी सहने को तैयार नहीं।।

@RockShayar⁠⁠⁠⁠

“कई दिनों से एक ख़याल अधूरा पड़ा था”

ज़ेहन के पुराने हिस्से में
कई दिनों से एक ख़याल अधूरा पड़ा था।

सोचा इसे आज पूरा कर दूँ
तुम कहो तो इसे तुम्हारे नाम कर दूँ।

इसी बहाने तुम्हारा ज़िक़्र भी हो जायेगा
ज़िक़्र के दरमियाँ कहीं ये दिल खो जायेगा।

याद है तुम्हे !
तुम्हारी यादों से पुराना रिश्ता है मेरा।

एक ऐसा रिश्ता जिसका कोई नाम नहीं
एक ऐसी सुबह जिसकी कोई शाम नहीं।

एक ऐसा शख़्स जिसका कोई मकसद नहीं
एक ऐसा लफ़्ज़ जिसका कोई मतलब नहीं।

एक ऐसी लहर जिसका कोई शोर नहीं
एक ऐसी नज़र जिसका कोई छोर नहीं।

ज़ेहन के पुराने हिस्से में
कई दिनों से एक ख़याल अधूरा पड़ा था।

सोचा इसे आज पूरा कर दूँ
तुम कहो तो इस दिल पे तुम्हारा नाम लिख दूँ।

इसी बहाने तुम्हारा एहसास भी हो जायेगा
एहसास करते-करते कहीं ये दिल खो जायेगा।

याद है तुम्हे !
तुम्हारी बातों में अपना हिस्सा है मेरा।

जो यक़ीन न आये मेरी बात पर
तो खुद से बात करके देख लेना
जवाब मिल जायेगा तुम्हे
और जवाब के साथ-साथ
मेरी साँसों का हिसाब भी मिल जायेगा तुम्हे।

जो दूर जाना चाहो
तो शौक से चले जाना
मोहब्बत का कर्ज़ उतारने
करके खुद से नये बहाने
दिल को फिर आज़्माने
ख़ताएं फिर से दोहराने
यादों को फिर से मिटाने
सीने के दरमियाँ समाने।

जो पास आना चाहो
तो दिल से चले आना
जहां कहीं भी हो तुम
लौटकर चले आना।।⁠⁠⁠⁠

“यह उन दिनों की बात है, जब मैं एक टीचर हुआ करता था”

यह उन दिनों की बात है
जब मैं एक टीचर हुआ करता था
ये उस वक़्त के जज़्बात हैं
जब मैं खुद जीना सीख रहा था

हरवक़्त बच्चों पर अपना रौब जमाया करता था
अपने स्टूडेंट्स में अपने आप को ढूँढा करता था

यह उन दिनों की बात है
जब मैं एक टीचर हुआ करता था
ये उस वक़्त के हालात हैं
जब मैं खुद को तलाशा करता था

पढ़ाई के साथ-साथ, हँसी मज़ाक भी किया करता था
लेक्चर पूरा होने पर ही मगर, अटेंडेंस लिया करता था

यह उन दिनों की बात है
जब मैं एक टीचर हुआ करता था
ये उस वक़्त के जज़्बात हैं
जब मैं खुद से ही नाराज़ रहता था

टॉपिक हो चाहे कोई भी, उसे मजेदार बना दिया करता था
प्रिंसिपल प्रॉक्टर या हो एचओडी, किसी से नहीं डरता था

यह उन दिनों की बात है
जब मैं एक टीचर हुआ करता था
ये उस वक़्त के हालात हैं
जब मैं एक मुश्किल दौर से गुज़र रहा था

स्टूडेंट्स पर फाइलों का बोझ लाद दिया करता था
और अपने काॅलेज के वो दिन याद किया करता था

यह उन दिनों की बात है
जब मैं एक टीचर हुआ करता था
ये उस वक़्त की याद हैं
जब मैं खुद से सवाल किया करता था

एजुकेशनल ट्यूर को बहुत इंजॉय किया करता था
बच्चों के साथ मिलकर उनके जैसे जिया करता था

यह उन दिनों की बात है
जब मैं एक टीचर हुआ करता था
ये उस वक़्त के लम्हात हैं
जब मैं खुद में ही उलझा रहता था

गुस्सा होने पर रेगुलर लंबी क्लास लिया करता था
ज़रा-ज़रा सी बात पर, बहुत डाँट दिया करता था

यह उन दिनों की बात है
जब मैं एक टीचर हुआ करता था
ये उस वक़्त के हालात हैं
जब मैं अपने वज़ूद के लिये लड़ रहा था

अब ना वो पहले जैसे हालात हैं
ना वो पहले जैसे जज़्बात
ना वो पहले जैसे मोमेंट हैं
ना वो पहले जैसे स्टूडेंट।

@Irfan Ali Khan⁠⁠⁠⁠

“ज़िंदगी बहुत हसीं है अभी”

जहाँ रखी थी वहीं है अभी
ज़िंदगी बहुत हसीं है अभी।

सवाल पूछकर क्या करोगे
जवाब हमारा नहीं है अभी।

कौन हूँ मैं, क्या कर सकता हूँ
ये एहसास तुम्हे नहीं है अभी।

वक़्त रहते जी लो ज़रा
वक़्त बहुत सही है अभी।

मुलाकात में अब वो बात कहाँ
ये मुलाकात अधूरी है अभी।

तुझसे मिलकर, मैं मैं न रहा
जानाँ तू मुझमें कहीं है अभी।

क्यों मानते हो हार इरफ़ान
पूरी ज़िंदगी बाक़ी है अभी।।

@राॅकशायर

“मेरी राह मत देखना, इस बार लौटकर नहीं आऊँगा”

मेरी राह मत देखना, इस बार लौटकर नहीं आऊँगा
जो लौटकर आयेगा इस पार, वो कोई और ही होगा।

चलते-चलते ये कदम बड़ी दूर निकल आये
वापिस लौटना तो इन्हें बिल्कुल भी न भाये।

दूरियाँ दिल को अच्छी लगने लगी हैं
नज़दीकियाँ दिल को खटकने लगी हैं।

तन्हाई से मोहब्बत हो गई है
तन्हा रहने की आदत हो गई है।

दर्द से दोस्तोंवाली दोस्ती हो गई है
ज़िंदगी ज़िंदगी के शोर में सो गई है।

चाहतों के काले-घने बादल बरसते रहते हैं
हसरतों के झीने-झीने आँचल उड़ते रहते हैं।

हरपल हरघड़ी हरवक़्त याद करता हूँ तुझे
ज्यादा नहीं बस इतना प्यार करता हूँ तुझे।

मेरा इंतज़ार मत करना, इस बार लौटकर नहीं आऊँगा
जो लौटकर आयेगा इस बार, वो तेरा इंतज़ार ही होगा।

@राॅकशायर

“मैं अब भी तुझको चाहता हूँ”

सबसे अब ख़फ़ा होकर
खुद से खुद ज़ुदा होकर
इश्क़ में तेरे फ़ना होकर
आवारा इक हवा होकर
संग तेरे ही अब बहना चाहता हूँ
जानाँ ये तुझसे कहना चाहता हूँ
मैं अब भी तुझको चाहता हूँ
मैं अब भी तुझको चाहता हूँ।

रब की रहमत अता होकर
अपने घर का पता खोकर
दिल से निकली दुआ होकर
दर्द की तदबीर दवा होकर
संग तेरे ही अब जीना चाहता हूँ
जानाँ ये तुझसे कहना चाहता हूँ
मैं अब भी तुझको चाहता हूँ
मैं अब भी तुझको चाहता हूँ।

ख़्वाब में तुझको देखकर
ख़याल में तुझको सोचकर
दिल में हसरतें पालकर
आँखों में आँखें डालकर
जाम तेरा ही अब पीना चाहता हूँ
जानाँ ये तुझसे कहना चाहता हूँ
मैं अब भी तुझको चाहता हूँ
मैं अब भी तुझको चाहता हूँ।

खुद में खुद को खोकर
तुझमें खुद को पाकर
नहीं है दिल ये बेघर
तुझको दिल ये देकर
तुझमें ही अब धड़कना चाहता हूँ
जानाँ ये तुझसे कहना चाहता हूँ
मैं अब भी तुझको चाहता हूँ
मैं अब भी तुझको चाहता हूँ।।

@RockShayar⁠⁠⁠⁠

“तारों की दुनिया”

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तारों की दुनिया देखी है कभी !
तारों की दुनिया देखना चाहोगे !

तो चलो फिर आज हम, तारों की उस दुनिया में चले
हैं जहाँ पे तारें ही तारें, अपनी अलग एक दुनिया लिये।

तारों का अपना एक वज़ूद होता हैं
इन्हें सूरज की ज़रूरत नहीं
सूरज तो खुद इनकी बिरादरी का
एक छोटा सा हिस्सा है।

सूरज की ज़रूरत तो चाँद को है
सूरज से मोहब्बत तो चाँद को है।

सूरज दिनभर खुद को ऐसे जलाता है
जैसे कोई आशिक इश्क़ में खुद को मिटाता है।

और फिर ये रश्क़-ए-क़मर
जिसे चाँद कहो या माहताब
रातभर सूरज की दिनभर की तपिश को
ठंडक में कुछ इस तरह तब्दील करता है
जैसे कोई महबूबा अपने थकेहारे महबूब को
नर्म बाहों के दरमियाँ सुकून और राहत देती है।

सुना है कि तारें ज़मीन से बहुत दूर होते हैं
इतनी दूर
के खुद दूरी को भी अपने पास होने का एहसास होता है।

तारों का अपना कोई घर नहीं
इसलिये तो आँखों में बसते हैं।

चाँद को तो ज़रूर इनसे जलन होती होगी ना!
तभी तो अंदर ही अंदर बस कुढ़ता रहता है
सोच सोचकर देखो !
पेशानी पर कितने गड्ढे पड़ गये हैं।

तारों में मद्धम रौशनी की सरसराहट होती है
कभी टिमटिमाहट तो कभी जगमगाहट होती है।

लोग कहते हैं कि लोग मरकर एक तारा बन जाते हैं
यानी फिर कभी नहीं मरने लोग ही तारा कहलाते हैं।

तारें वो हैं जो खुद रौशनी बिखेरते हैं
तारें वो हैं जो तन्हा स्पेस में तैरते हैं।

तारों का अपना एक वज़ूद होता हैं
इन्हें सूरज की ज़रूरत नहीं
सूरज तो खुद इनकी फैमिली का
एक छोटा सा हिस्सा है।

हालाँकि सूरज ने बहुत कोशिश की
खुद को जलाने की
लेकिन आखिर में वो भी बस एक तारा ही निकला
खुद से दूर, सबसे दूर
इस जहां से मीलों दूर
पूरी कायनात की आँखों का तारा।

तो बताओ फिर
कैसी लगी तारों की दुनिया
अपने जैसी
या कोई और ही दुनिया।।

@राॅकशायर इरफ़ान अली ख़ान⁠⁠⁠⁠