Poem for me by sadda yaar…Ashif

CYMERA_20150824_193451.jpgखुद ही को खुद में इज़ाद करता है वो शख़्स 

खुद ही को खुद से आज़ाद करता है वो शख़्स।

शायरी से यारी, फिर क्या दुनियादारी
तकलीफ़ों को कुछ यूँ निजात करता है वो शख़्स।

दुनिया से तलाक कर
शायरी की दुनिया पर नाज़ करता है वो शख़्स।

कागज़ से यारी, और बस लिखना जारी
हर हद को भूल कर, खुद को क़ुबूल करता है वो शख़्स।

हर नाराज़ से बेपरवाह हो
बस काग़ज़ को हमराज़ करता है वो शख़्स।

आसमां छूने की ज़िद में
सितारों तक जा पहुँचता है वो शख़्स।

अल्फाज़ो में खोकर
वुज़ूद को उन्ही में नुमायाँ कर देता है वो शख़्स।

अश्क़ों से आँखे नम करती दुनिया सारी
पर लफ्ज़ो से कागज़ तर कर, रोता है वो शख़्स।

सीने में दिल को छुपाती दुनिया सारी
पर डायरी में अपना दिल रख कर, सोता है वो शख़्स।।

-Ashif Khan

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s