Happy birthday Shauqat Bhaijaan…

यौम-ए-पैदाइश मुबारक हो प्यारे भाईजानआपकी उम्दा शख़्सियत बेशक हमारी शान।
मौला की नवाज़िश हो, हाँ रहमत की बारिश हो

बहुत चाहता है आपको, भाई आपका इरफ़ान।।

“Koshish”

इतनी कोशिश तू कर के कोशिश भी कहे खुद वाहजहाँ कोई राह नज़र न आए मिलेगी तुझे वहीं राह
मेहनत की परिभाषा ही बदल दे

निराशा को तू आशा में बदल दे
सिर्फ खुद से है मुकाबला तेरा यह जान ले

सहरा में हो गया है तबादला तेरा यह मान ले
अपने अंदर झांक कर तो देख कभी

अपनी कीमत आंक कर तो देख कभी
सारे भरम टूट जाएंगे तेरे एक ही पल में

पायेगा अपने सारे जवाब उसी पल में
जो डराता है उसे जी भरकर डराने दे

मुश्किलों को तू खुलकर सामने आने दे
जिस पल भी हिम्मत टूटने लगे गहरी तू एक साँस ले

नाउम्मीदी की खाँसी को उम्मीद के हाथों में खाँस ले
ऐसी मिसाल पेश कर के मिसाल भी कहे खुद वाह

जिसकी कोई चाह न रखे असल में वही है तेरी चाह।

“Thank you PaPa”

आपके मुँह से अपनी तारीफ़ सुनकर बहुत अच्छा लगा है पापाबाद मुद्दत के अपने ज़िन्दा होने का एहसास फिर जगा है पापा
बरसों पहले जो एहसास लिखा था, आपने मेरी पैदाइश के वक़्त

वो डायरी वो एहसास मैंने आज तक संभाल कर रखा है पापा 
कोशिश पर कोशिश, यूँ करते करते गिरते पड़ते उठते संभलते

जैसा भी बन पाऊं यहाँ मैं जो भी कर पाऊं वह थोड़ा है पापा
आप सोचते हो मैं नादान हूँ, गलतियां बहुत ज्यादा करता हूँ

मगर अपनी उन्हीं गलतियों से मैंने बहुत कुछ सीखा है पापा
एक दूसरे के शिकवे सुने, फिर आपस में बैठकर उन्हें दूर करे

बिखरे परिवार को जोड़ने का बस यही एक तरीका है पापा
मुझसे मिलने आए, मेरी डायरी पढ़ी, और कहा बहुत अच्छे

कैसे लिखू आपके आने से मेरा कितना हौसला बढ़ा है पापा
अपने पापा की नकल करना, उनके नक्शेकदम पर यूँ चलना

एक बच्चे को जितना लगता है उतना ही अच्छा लगा है पापा।

“Thar Desert”

“थार मरुस्थल: The Great Indian Desert”
पश्चिमी राजस्थान में है, महान् भारतीय मरु प्रदेश

थार है नाम जिसका, टेथिस सागर का वो अवशेष
जैव विविधता और जनसंख्या में यह सबसे आगे है

जुरेसिक एवं इयोसिन युग से जुड़े हुए इसके धागे हैं
पंजाब सिंध गुजरात तक, फैला हुआ यह किस्सा है

राजपूताना में यूं तो इसका, इकसठ फीसद हिस्सा है
धोरों की यह धरती, दिन में तपती व रात में ठिठुरती है

रेतीले टीलों पर सूरज की किरणें, सोने जैसी लगती हैं
टर्शियरी चट्टानों के कारण, खनिज भंडार मौजूद हैं

बलुई मिट्टी एवं न्यून वर्षा, इन्हीं से इसका वज़ूद है
राजस्थान के बारह जिलों में, इसका आधिपत्य हैं

जैसलमेर बाड़मेर बीकानेर व श्रीगंगानगर मुख्य हैं
कहीं बालुका स्तूप दिखते हैं, तो कहीं पर फोसिल्स मिलते हैं

राज्य पक्षी गोडावण भी तो, अक्सर यहीं पर विचरण करते हैं
हाफ मून से दिखने वाले, इन टीलों का नाम हैं बरखान

यह बंजर और सूखी ज़मीन, स्टेट ट्यूरिज्म की है जान
रेगिस्तान का जहाज है ऊँट, बड़ी शानदार इसकी सवारी

ड्यूल स्टेप में उठकर जो, कराए फिर खुद अपनी सफारी
Royal म्हारो राजस्थान, रहते जहाँ पर Lion Heart

Land of Sand थार, The Great Indian Desert.
@RockShayar
#ObjectOrientedPoems(OOPs)

“Dangal”

बहुत हो गया मज़ाक, अब तो बस दंगल ही होगाजलती हुई चिता पर, निराशा का जंगल ही होगा
इस बार तो इम्तिहान का भी इम्तिहान लेना है

पूरा होगा हर वादा, खुद को यह ज़ुबान देना है
पैदा किया है जिसने तुझे, पालेगा वही तुझको ऐ बंदे

तौबा करके अपने पराये, धो दे अब तू क़रम सब गंदे
हर वो आदत बदल दे अपनी, जो तुझको तेरे मक़सद से दूर करे

ऐसा कुछ कर जा, जो मंज़िल को खुद पास आने पर मज़बूर करे
किसी के आगे रोना नहीं है, चैन दिल का खोना नहीं है

लक्ष्य न मिल जाए जब तक, तुझको यहाँ सोना नहीं है
जो भी देखे तुझको वही, बस दाँतों तले उंगली दबा ले

सुन ओ राही तू अब अपनी, सोई हुई तक़दीर जगा ले
तोड़ देंगे फोड़ देंगे, लिख देंगे हम एक नई क्रांति

अपने बारे में दूर करेंगे, फैली हुई हर एक भ्रांति
बहुत हो गया टाइमपास, अब तो बस राॅक ही होगा

पॉजिटिव एनर्जी से, नेगेटिव को देना शाॅक ही होगा।
@RockShayar

“Badlaw ka darr”

औरों का नहीं खुद के बदल जाने का डर लगता हैमुझको अपने दिल का एक हिस्सा बेघर लगता है
महफूज़ मुस्तक़बिल मेरा, बदल न दे मुझको कहीं

और किसी बात से नहीं बस इसी बात से डर लगता है
ज़िन्दगी की कड़ी धूप में, सीना ताने हुए बेपरवाह

साया देता हुआ वज़ूद मेरा जैसे कोई शजर लगता है
मिला दे मुझको इलाही, अपनी रूह-ए-हयात से

हिज़्र का हर एक लम्हा तपती हुई दोपहर लगता है
माज़ी ने दिए कई निशान, तू कैसा बन गया इंसान

खुद अपने ही हाथों से पिया हुआ ज़हर लगता है
सरसब्ज़ रहता था कभी जो, हाल अब यह है कि

वीरां जजीरे सा वो तेरी यादों का शहर लगता है
रास्तों की अहमियत, पता चली है जब से मुझको

तब से फ़क़त सफ़र ही अपना हमसफ़र लगता है।