“Tum mere Shahar aayi ho”

कई दिनों के बाद तुम मेरे शहर आई हो

हाँ, ये वहीं शहर है 

जो कभी हमारा हुआ करता था।
याद है वो पार्क 

जहाँ अक्सर हम मिला करते थे

आजकल मैं वहां से गुज़रता तक नहीं हूं

क्या पता तुम्हारी खुशबू 

अब भी वहीं रहती हो

महसूस कर जिसे 

मैं फिर से बैचैन हो जाऊं।
तुमने तो बड़ी आसानी से

रोज़गार के सिलसिले में

अपना शहर बदल लिया था

मगर मैं आज भी 

यादों के इस शहर में

अकेला ही रहता हूं।
आज जब तुम्हारा फोन आया 

कि मैं आई हुई हूं

तो यूं लगा मानो वो दौर 

फिर से ज़िन्दा हो गया है

यादों की बरसती हुई बारिश में।
पता नहीं ! हमारा मिलना होगा भी या नहीं

पर इतना ज़रूर मालूम है मुझे 

कि आज मैं पार्क की उस बेंच पर 

थोड़ा वक्त ज़रूर गुज़ारूंगा

जहाँ अक्सर हम अपना 

वक्त से चुराया हुआ वक्त गुज़ारा करते थे

क्या पता तुम्हारे साथ 

वो एहसास भी फिर लौट आया हो

दूर रहा जिससे मैं इतने दिनों तक।
क्या तुम सच में लौट आई हो

या यह वहम है मेरे दिल का

अगर महसूस कर पाओ इसे

तो बस इतना ही कहूंगा

जाने से पहले 

एक बार मिलते हुए जाना।
कई दिनों के बाद 

तुम मेरे शहर आई हो

हाँ, ये वहीं शहर है 

जो कभी हमारा हुआ करता था।।

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