“ज़िन्दगी के बदलते हुए रंग”

ज़िन्दगी हर रोज नये रंग बदलती है
उन्ही बदलते रंगों के साथ
वक़्त भी बदल जाता है ।
और बदल जाता है वो नज़रिया
जो हमें हर चीज़ का एहसास दिलाता है ।
पहले जो डर डराता है बहुत
वहीं बाद में हँसाता है बहुत ।

अक्सर जिसे हम कल कहते है
दरअसल वो कल नहीं होता है
बल्कि हमारे आज का ही अक्स होता है
मन के शीशों में जो साफ़ नज़र आता है ।

लोग कहते है कि सब कितने बदल गए हैं
मगर वो खुद को नहीं देख पाते हैं कभी
क्योंकि मन के शीशों में
सिर्फ मन का ही अक्स दिखाई देता है
अनगिनत गहराइयों के राज़ छुपे हैं जिसमें
बदलते हुए रंगों की रंगत
चेहरे पर नज़र आ ही जाती है।

कोई खुश होकर भी खुश नहीं है
तो कोई उदास होकर भी खुश है।
पता नहीं खुशी का रंग ग़मों के रंग से
इतना क्यों हमराज़ होता है
कि जब एक आता है तो
दूसरा पीछे पीछे खिंचा चला आता है।

ज़िन्दगी हर रोज नये रंग बदलती है
उन्ही बदलते रंगों के साथ
हम भी बदल जाते हैं ।
कहने को तो बदलाव ही नियम है कुदरत का
पर अगर कोई बदलना ना चाहे
तो उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ती है।

इस बार खुद को इस तरह बदलना चाहता हूँ
कि फिर कभी कोई बदलाव मुमकिन ही ना हो ।।

– RockShayar

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