“आस्तीन के साँपों से ज़रा सावधान रहना”

आस्तीन के साँपों से ज़रा सावधान रहना,
किसी भी मज़हब के हो मगर इंसान रहना ।

पहचान कोई पूछे तो, बताना उसे हिन्दी हैं हम,
वतन पर मर मिटने वाले सदा तुम जवान रहना ।

हो कड़वाहट कितनी भी, दिलों में फैली हुई
उर्दू की तरह मगर तुम मीठी एक ज़बान रहना ।

मिलेंगी कई हैरानियाँ, सफ़र के दौरान तुम्हें
मुश्किलों के भँवर में मज़बूत एक चट्टान रहना ।

ज़िन्दगी जीते हुए, इतना भी याद रख लीजिए
मक़सद हो चाहे जो भी पर साहिबे ईमान रहना ।

दिल-ओ-दिमाग के मसले, हल करने हो अगर
कभी समझदार बन जाना, कभी नादान रहना ।

लाख कहे दुनिया तुम्हें, भला बुरा यहाँ लेकिन
जैसे भी हो तुम हमेशा, वैसे ही इरफ़ान रहना ।।

@RockShayar

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