EICwaley…Rocking Bandey…

यूँ तो स्टूडेंट्स कई मिले हैं, पर इनके जैसा कोई नहीं
पासआउट होते ही चले गए, कोई कहीं तो कोई कहीं

इंजीनियरिंग में लिया प्रवेश, काॅलेज था वो जीसीटी
ईआईसी ब्रांच मिली, दुनियादारी उसी से सीखी

फिफ्थ सेमेस्टर में मुझे, पढ़ाने का अवसर मिला
लाइफ की फिलोसोफी, जानने का अवसर मिला

पूछा करते मुझ से हमेशा, यह कैसी ब्रांच है सर
इंस्ट्रुमेंटेंशन एंड कंट्रोल, नाम से ही लगता है डर

लैब में जाने से, पता नहीं क्यूँ इन्हें बहुत ज़ोर आता
लास्ट बैंच वाला ग्रुप, क्लास में हरदम शोर मचाता

कुल्लू मनाली चंडीगढ़, काॅलेज ट्रिप में गए वो जब
बाद उसके एक अलग ही बाॅन्ड में बंध गए वो सब

मिडटर्म हो या प्रेक्टिकल, ऐन वक्त पर जागते सब
फाइल कम्प्लीट करने को, इधर उधर भागते सब

मैनेजमेंट से ऑलवेज ख़फ़ा, अनबन हुई सौ दफ़ा
फैकल्टी का रेस्पेक्ट करते, निभाते थे हरदम वफ़ा

हो चाहे अटेंडेंस का लफड़ा, या डिबार का चक्कर
अपने हर मैटर पर वो, एचओडी से लेते थे टक्कर

शिकवा यहीं रहता, जीआईटी वाले कितने अच्छे हैं
इस बार तो सर जी आपने, नंबर बहुत कम भेजे हैं

मई 2015 में जब अलविदा की घड़ी नज़दीक आई
गुज़रे लम्हों को याद करके आँख सबकी भर आई

उस दौर की वो तमाम बातें, आज बहुत हँसाती हैं
तन्हाई में यूँ कभी कभी, रह रहकर याद आती हैं

यूँ तो स्टूडेंट्स कई देखे हैं, पर उनके जैसा कोई नहीं
ज़िन्दगी में खूब आगे बढ़े, करता हूँ रब से दुआ यहीं

– Irfan Sir

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