“सवाल सारे गलत थे, जवाब क्या देते”

सवाल सारे गलत थे, जवाब क्या देते
अपनी मोहब्बत का उन्हें हिसाब क्या देते ।

वो इल्ज़ाम लगाते रहे, संगदिल होने का हम पर
काँटों भरा दामन है, उन्हें गुलाब क्या देते ।

रात भर जागकर भी, कम न हुई बेचैनी कभी
वो नींद थी, नींद को अधूरे ख़्वाब क्या देते ।

बेवजह कुछ भी नहीं है, इतना समझ लीजे
जो पढ़ नहीं सकता, उसे किताब क्या देते ।

खुद ही कर बैठे जब बग़ावत अपने आप से,
दुश्मन का किसी और को खिताब क्या देते ।

वो पूछ बैठे हमसे, अपना पता इक रोज यूं
हम खुद लापता थे, भला जवाब क्या देते ।।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s