“म्हारो राजस्थान”

‪#‎ObjectOrientedPoems‬(OOPs)

रंगीलो म्हारो राजस्थान, हैैं रंगीला अडा रा भेस
मेहमान ने सगळा खेवे जडे, पधारो नी म्हारे देस

पन्ना-मीरा री धरती आ, बलिदान सू मांग भरती आ
रणबाँकुरां री जननी आ, वीर रस स्वांग रचती आ

मिसरी सी मीठी बोली, प्रेम री पावन परिभाषा
हर चार कोस के बाद अडे, बदल जावे हैं भाषा

रेतीला धोरा रे बीच, आ ज़िन्दगी मुस्कुरावे है
माटी री खशबू लिए, लोकगीत गुनगुनावे हैं

फौलादी गढ़ा री ज्यान, तगङा हैं जी ईका इरादा
भोळा मनङा री ज्यान, लोग अडा रा सीधा सादा

सहनशीलता और कर्मठता, माटी में ईकी घुली
त्याग ओज़ वचनबद्धता, विरासत में ईने मिली

इतिहास रा पन्ना पर, दरज़ हैं जितरी कहाणियां
वीरां री वा अमर गाथा, शौर्य री सब निशानियां

राजपूताना री आ आन बान, राखे सदा सबका मान
रण हो चाहे करसी विज्ञान, बढ़ावे सदा हिंद री शान

विकास सागे हैरिटेज री, नई डगर पे चाल पङ्यो है
बीमारू प्रदेश री छवि सू, अब जार ओ निकळ्यो है

सतरंगी जय राजस्थान, अतरंगी अंचल परिवेश
मेहमान ने भगवान खेवे जडे, पधारो नी म्हारे देस

सर्वाधिकार सुरक्षित © 2016
राॅकशायर इरफ़ान अली ख़ान
‪#‎विषयवस्तुआधारितकविताएं‬(विआक)

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