जब ओखली में सिर दिया, तो मूसलों से क्या डरना

जब ओखली में सिर दिया, तो मूसलों से क्या डरना
छोङो सब चिंताएं तुम, क्या जीना और क्या मरना
अपने ही साथी बन जाओ, छोङकर सब आहें
राही उन्मादी बन जाओ, मोङकर खुद राहें
पग पग पर मिलेंगे यहां, दमकते हुए दोराहे तुझे
कपट की कङकती धूप में, चमकते हुए चौराहे तुझे
कौन है अपना, कौन पराया ? सब जान ले तू
तुझी में है मनमीत तेरा, अब तो यह मान ले तू
डर को अपने डराना है, और खुद को पाना है
हर हाल में गुनाहों से यहां, खुद को बचाना है
करने वाला तो वो है, बस उसी पर यक़ीन रखो
मांगो जब भी रो रोकर, तर दिल की ज़मीन रखो
ज़िंदगी की तकलीफ़ों से, इतना भी क्या घबराना
कर लो न अपना एहसास, इतना भी क्या शर्माना
जब ओखली में सिर दिया, तो मूसलों से क्या डरना
छोङो सब फिक़्रे तुम, क्या जीना और क्या मरना ।।
RockShayar Irfan Ali Khan

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