“कुछ भी न बचा कहने को हर बात हो गई”

कुछ भी न बचा कहने को हर बात हो गई,
मुझसे मेरी न जाने कब मुलाक़ात हो गई ।

ये कुदरत का कमाल है, कुदरत ही जाने
बिन बादल यूं आज कैसे बरसात हो गई ।

दिल ने कहा अलविदा, जिस रोज शोर को
ख़ामोशी से उस रोज मेरी हर बात हो गई ।

बादशाह वज़ीर प्यादा फक़ीर, सब ने ठगा
वक़्त की चाल पर ज़िन्दगी बिसात हो गई ।

ग़ज़ल लिखने का वो, शऊर न आया कभी
आवारगी को मेरी हर्फ़ की सौगात हो गई ।

हमसे क्या पूछते हो, हाल-ए-दिल इरफ़ान
चलो दर्द सहलाए, आज फिर रात हो गई ।।

:-राॅकशायर इरफ़ान अली ख़ान

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