“रिश्तों में एक दूसरे पर ऐतबार ज़रूरी है”

रिश्तों में एक दूसरे पर ऐतबार ज़रूरी है,
कभी प्यार तो कभी तक़रार ज़रूरी है । 

यूँही तो नहीं बन जाते फ़साने इश्क़ के, 
कभी इंकार तो कभी इक़रार ज़रूरी है ।

ख़्वाहिशों के घर में मनचले इस सफ़र में,
कभी ठहराव तो कभी रफ़्तार ज़रूरी है ।

गर महसूस कर पाओ तो इतना समझ लो,
ख़ामोशियों में भी यहाँ झंकार ज़रूरी है ।

ये ज़िन्दगी है ! वीरान कोई जंगल नहीं,
दोस्त दुनिया दुश्मन घर बार ज़रूरी है ।।

#RockShayar

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