“परिंदो से उनका खुला जहान मत छीनिए”

परिंदो से उनका खुला जहान मत छीनिए,
ज़मीन तो छीन ली आसमान मत छीनिए ।

दिल बहुत रोता है जब कोई बेघर होता है,
कभी किसी से उसका मक़ान मत छीनिए ।

जाने ये कैसी हवा चल पङी है नफ़रत की,
मज़हब का नाम लेकर इंसान मत छीनिए ।

लूटमार जो करनी है शौक से कर लीजिए,
पाया है दिल ने जिसे वो ईमान मत छीनिए ।

तरक्की के इस दौर में यूँ खुद से होकर दूर,
अहसास से वो उसकी ज़बान मत छीनिए ।

सब कुछ छीन लो है फ़क़त इतनी गुज़ारिश,
मुझमें है जो शख़्स वो ‘इरफ़ान’ मत छीनिए ।।

#RockShayar

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s