कौन हूँ मैं ?

कौन हूँ मैं ? कहाँ है मेरा जहां ?
अपनी ही तलाश में हो गया हूँ लापता ।

अनदेखे पहलुओ में, यूँही भटकता रहा
जाने किस अहसास में हो रहा हूँ गुमशुदा ।

परछाई मेरी यहाँ, साथ अब देती नहीं
अजनबी हालात में हो रहा हूँ मुब्तिला ।

गहरे ये सन्नाटे, साथ चलते हर कदम
रूहानी इक ख़लिश में खो रहा हूँ यहाँ ।

अनजानी सब राहें, पास अपने बुलाये
जाने किस गर्दिश में हो रहा हूँ धुँआ ।

मिलता नहीं मेरा, कहीं कोई भी निशां
वक़्त की साज़िश में हो रहा हूँ फ़ना ।

कौन हूँ मैं ? कहाँ है मेरा जहां ?
अपनी ही तलाश में हो गया हूँ लापता ।।

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