“गाँव मेरा है लोडियाना” (My Village: Lodiyana)

#ObjectOrientedPoems(OOPs)

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रंग रंगीले राजस्थान के बीचों बीच एक ठिकाना
जिला है अजमेर, और गाँव मेरा है लोडियाना

ग्राम पंचायत है ये, आबादी नही कोई इसकी ज्यादा
शोरगुल से कोसों दूर, जीते यहाँ सब जीवन सादा

पंचायत समिति मसूदा, तहसील है बिजयनगर
दोनों शहरों से जुङी हैं, प्रगति की एक नई डगर

कहने को तो बिजली यहाँ, चौबीसों घंटे आती है
यूँ कह दीजिए जैसे कोई, दुल्हन नई शर्माती है

चौराहे पर दो पीपल पुराने, याद दिलाये गुज़रे ज़माने
पास उन्ही के धर्मी तालाब, आती जहाँ रोज धूप नहाने

प्राथमिक और माध्यमिक, दोनों विद्यालय हैं आस पास
प्रांगण में जिनके सदा, खिलती आई साक्षरता की आस

गाँव से शहर को हाँ, अब भी जाती है वही सङक
मुहाने पर जिसके यहाँ, मिलती है वो चाय कङक

क़ब्रिस्तान के पास वाले मैदान में, साईकिल चलाना सीखी
उतर आई यूँ काग़ज़ पर आज, वो यादें बचपन सरीखी

कहने वाले यूँही तो नहीं, कहते इसे बम्बई का बच्चा
निकले यहाँ से सूरमा कई, पढ़कर लाइफ़ का पाठ सच्चा

खेतों में लहलहाती फसल, जैसे किसी शायर की ग़ज़ल
इस तरह गुनगुनाती है फिर, बरसे वो सावन की शक़ल

धङकता हुआ दिन, और तारों भरी रात यही मिलती है
कच्चे पक्के आँगन में, मुस्कुराहट भी तो यही खिलती है

खेतों में क्रिकेट खेलना, तालाब में पत्थर फेंकना
याद है सर्दी के मौसम में, तप करके हाथ सेंकना

शहर में रहता हूँ भले, पुरख़े तो आज भी वही रहते हैं
भूल ना जाना मिट्टी को, माँ बाबा हमेशा यही कहते हैं

मातृभूमि का ये मेरी, हैं बस इतना सा फ़साना
जिला है अजमेर, और गाँव मेरा है लोडियाना ।।

Copyright © 2015,
RockShayar Irfan Ali Khan
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