“मुझे कुछ नही होगा पापा”

आपके होते हुए
मुझे कुछ नही होगा पापा
मैं जानता हूँ
हर पल आपको
मेरी कितनी फ़िक्र रहती है
हर दिन सोचता भी हूँ
बहुत इस बारे में
पर शायद कभी समझ नही पाऊंगा इसे ।

फोन पर रोज शाम को
जब आप बात करते हो
तब भी बस जल्दी से हालचाल पूछ कर
अम्मी को थमा देते हो मोबाइल ।

मुझे सब मालूम है पापा
आप उस वक्त कितने परेशान हो जाते है
जब कभी मैं फोन उठाने में देरी करता हूँ
जब कभी मैं बाइक पर होता हूँ
जब कभी मैं कहीं बाहर होता हूँ
जब तक आप मेरी आवाज़ नही सुन लेते है
तब तक चैन से बैठ नही पाते है ।

अम्मी से तो रोज खुलकर बात हो जाती है
जाने क्यूँ आपसे वो सब कह नही पाता हूँ
सीने में दबे हुए जो
मेरे अनछुँवे जज़्बात ।

जब कभी मैं घर आता हूँ
आपके चेहरे पर एक अलग ही खुशी दिखती है
सब कुछ मेरी पसंद का बनवाते है आप
अम्मी को कहते रहते है
हर घड़ी हर पल
आज ये बनाना, कल वो बनाना
जितने दिन भी यहाँ है
इसका ध्यान रखना
देखो बाहर का खाना खा खाकर
कैसा कमज़ोर हो गया है ।

घर से वापस जब रवाना होता हूँ
तब भी आप ख़ुदा हाफिज़ कहकर
नज़रों को यूँ फेर लेते हो
इधर उधर जल्दी से
ताकि मैं उन
गीली होती हुई पलकों को ना देख पाऊ ।

आपके होते हुए
मुझे कुछ नही होगा पापा
मैं जानता हूँ
हर पल आपको
मेरी कितनी फ़िक्र रहती है
हर दिन सोचता भी हूँ
बहुत इस बारे में
पर शायद कभी समझ नही पाऊंगा इसे ।

हाँ इतना ज़रुर जानता हूँ पापा
के मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ
पापा मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ ।।

#इरफ़ान

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