“सोचता तो हूँ मगर, लिख नहीं पाता हूँ मैं”

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चाहकर भी जाने क्यूँ, कह नही पाता हूँ मैं
सोचता तो हूँ मगर, लिख नहीं पाता हूँ मैं

अधजगे अल्फ़ाज़ मेरे
बनाये मुझे मिटाये मुझे
अधजले अहसास मेरे
जलाये मुझे तरसाये मुझे 

खुद से खुद की दूरी ये, सह नहीं पाता हूँ मैं
चाहता तो हूँ मगर, कह नहीं पाता हूँ मैं

देखकर भी जाने क्यूँ, देख नही पाता हूँ मैं
सोचता तो हूँ मगर, लिख नहीं पाता हूँ मैं

उजङे रस्ते छूटा साहिल
मिलाने से कभी मिलते नहीं
बिखरे रिश्तें टूटा ये दिल
जुङाने से कभी जुङते नहीं

तन्हाइयों में अकेला, रह नहीं पाता हूँ मैं
जानता तो हूँ मगर, कह नहीं पाता हूँ मैं

चाहकर भी जाने क्यूँ, कह नही पाता हूँ मैं
सोचता तो हूँ मगर, लिख नहीं पाता हूँ मैं

सोचकर भी जाने क्यूँ, सोच नही पाता हूँ मैं
चाहता तो हूँ मगर, लिख नहीं पाता हूँ मैं ।।
#RockShayar Irfan Ali Khan

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