“महिला आधारित कानूनों का दुरूपयोग” (IPC 498a and Domestic Violence Act)

#ObjectOrientedPoems(OOPs)

498-A and Domestic violence poem.jpg

एक लॉ है जो असंतुष्ट पत्नियों का सबसे फेवरेट,
भारतीय दंड संहिता की धारा फोर नाइंटी ऐट ।

गृहस्थी में हुई जो अनबन, पति पत्नी का फिर बदला मन,
दायर किया मुकदमा फट से, डाउरी का यूँ आनन फानन ।

कहने को तो यह, संविधान की एक महत्वपूर्ण धारा है,
दहेज प्रताङना की आङ में बस, फर्जी केसो का पिटारा है ।

अधिकांश मामलों में देखे तो, झूठमूठ का ये रोग होता है,
हद से ज्यादा आजकल इसका, बेहद दुरूपयोग होता है ।

सास ससुर पति जेठ ननद देवर समेत समूचा ससुराल पक्ष,
पल भर में गिरफ्तार होकर, पहुँच जाते हैं सीधे कारागार कक्ष ।

इतना नहीं तमाशा काफ़ी, घरेलू हिंसा अधिनियम हैं अभी बाक़ी,
परिवादी के सामने जहाँ यूँ, हाथ जोङे नज़र आता है हर वादी ।

गुज़ारा भत्ता एवं भरण पोषण के लिए, फिर जो ऑर्डर देती है कोर्ट,
तारीख़ पे तारीख़, हर तारीख़ पे हाज़िर होने का ऑर्डर देती है कोर्ट ।

महिला के लिए तो सरकार ने, घरेलू हिंसा के नियम बना दिए,
पुरुष को मगर जो मानसिक हिंसा हुई, उसके नियम कहाँ गए ।

दहेज प्रतिषेध कानून का जो, हथियार के रूप में इस्तेमाल करती है,
मर्द की बर्बादी में वो औरत, अपने औरत होने का इस्तेमाल करती है ।

महिला आधारित कानूनों का, इस क़दर मिस यूज़ हो रहा हैं,
के शादी का नाम सुनकर ही, बंदा हर कोई फ्यूज हो रहा हैं ।

एक कानून है जो असंतुष्ट पत्नियों का ऑल टाइम फेवरेट,
भारतीय दंड संहिता की धारा फोर नाइंटी ऐट ।।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s