फिर से वही इतिहास पुराना दोहराये क्यों ?

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फिर से वही इतिहास पुराना दोहराये क्यों ?
दिल के किले पर परचम पुराना फहराये क्यों ?

जब पत्थर की आदत हुई, धूप में राहत हुई
फिर बंजर जमीन पर फसल हम लहराये क्यों ?

दर्द को हमदर्द बनाया, जो चाहा वो सब कराया
फिर बेवजह इस सीने में दर्द वो गहराये क्यों ?

ग़ैरों की बातों में आकर, खुद को खुद में ना पाकर
इस ज़िंदगी को कसूरवार हर बार ठहराये क्यों ?

जानते हुए भी सब, बनकर यूँ अनजान अब
बावफ़ा हाँ हर दफ़ा खुद ही खुद को हराये क्यों ?

#RockShayar

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