“अहसास की अपनी कोई ज़बां नहीं होती”

FB_IMG_1438711270761.jpg

अहसास की अपनी कोई ज़बां नहीं होती,
ज़िंदगी ये कभी हमनवा नहीं होती ।

घूम लो चाहत के इस बाज़ार में तुम भी, 
खुशियों की बेशक कोई दुकां नहीं होती ।

जाने कितने ही दिल बच जाते टूटने से,
ज़माने में गर इश्क़ की हवा नहीं होती ।

उम्रे गुज़र जाती हैं इंतज़ार में यूँ तो, 
ख़्वाहिशें मगर कभी जवां नहीं होती ।

बचके रहना ज़रा दिल की तन्हाई से तुम,
खुद से जो कभी हमज़बां नहीं होती ।

वहम में जीता है, ताउम्र ये दिल ‘इरफ़ान’
दर्दे दिल की यहाँ कोई दवा नहीं होती ।।

#RockShayar

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s