“An Unplugged Memory”

For Pinkcity Poets, Artists n Unplugged….

मचलते हुए माइंड में आज
एक अनप्लग्ड याद उभरी है
यूँही कहीं
दिमाग के किसी कोने में
सुन पङी थी ना जाने कब से
वक्त की हवा के झोंके से आज
वो बिखरी हुई याद
ज़ेहन से यूँ फिसलती हुई
उतर गई इस काग़ज़ पर
ज्यों कि त्यों
किसी कार्बन काॅपी की तरह

अहसास का वो पोर्ट्रेट
उतरा था जो उस दिन
पिंकसिटी के किसी घर में
लम्हों के कैनवास पर
ख़्यालो के पोएटिक ब्रश से कहीं
खो गया है वो अब ना जाने कहीं
बहुत कोशिश की मैंने उसे ढूंढने की
पर मिला नही वो हाँ दुबारा कहीं
गर मिले किसी को तो बताना मुझे

मिस्टीरियस से माइंड में आज
एक अनप्लग्ड याद उभरी है
यूँही कहीं ।।

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