“मेरी कहानी की शुरूआत”

सुबह के नौ बजे है । हर रोज की तरह आज भी वो वर्ग पहेली भरने में लगा हुआ है । आँखों पर मोटा चश्मा, हाथों में पेन और माथे पर खिचीं हुई लकीरें, ये साफ़ बता रही हैं कि आज फिर कोई लफ़्ज़ उसे उलझा रहा है । वैसे तो कई नाम है उसके इरफ़ान, इफ्फ़ी, राॅकशायर, एलियन और सीपू । खुद को मगर आज भी वो गुमनाम ही पाता है ।
जिस दिन अख़बार नहीं आता, उस दिन थोङा परेशान सा लगता है । पता नहीं क्यूँ ? सबकी ख़बर रखने वाला अक्सर खुद से बेख़बर रहता है । बचपन से ही किताबों कहानियों का शौकीन है । जहाँ पर भी बालहंस, चम्पक, चंदामामा, चित्रकथाए मिल जाती थी, बस वहीं चिपक जाया करता था गोंद की तरह ।

पहले पढ़ना अच्छा लगता था, अब लिखना अच्छा लगता है । पिछले दो सालों में जाने कितनी ही कविताएं लिख चुका है । मगर ज्योंही कहानी का नाम सुनता है, क़लम वहीं ठहर जाती है अपने आप ही । मन तो बहुत करता है कहानी लिखने का, पर जाने किस बात से डरता है । यह जानते हुए भी कि वो लिख सकता है, कभी लिखता नहीं ।
शायद डर है उसे इस बात का, कि कहानी लिखते लिखते कहीं वो फिर से वहीं मासूम बच्चा ना बन जाए । जिसे शौक था कभी किस्से कहानियाँ पढ़ने का, बेवजह खिलखिलाने का, शरारतें करने का, हँसने मुस्कुराने का । वो नादान बच्चा खो गया है कहीं । ज़िंदगी की पटरी पर कोई हादसा उसे लील गया । लाल रंग में सनी यादें, गवाह है उस घाव की । जो वक्त ने दिया है बेवक्त ही कभी । आज वर्ग पहेली भरते हुए जब कहानी शब्द नज़र आया तो ये कहानी खुद बखुद बनती चली गई । हिचकिचाहट की धूल हटाते हुए । जमी है जो दिल के पन्नों पर कई बरसों से । दुनिया चाहे कुछ भी कहे मगर मैं इतना जानता हूँ कि,
मेरी कहानी की शुरूआत हो चुकी है । तब से जब मैं पैदा हुआ था । अब देखना यह है कि इस कहानी का अंज़ाम क्या होता है ।।

‪#‎RockShayar‬

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