“संवेदना रहित नही हूँ”

संवेदना रहित नही हूँ, मैं वेदना सहित हूँ
स्वयं को पाना अगर अपराध है तो, हाँ मैं पतित हूँ
छल कपट से दूर होकर, स्वर्ण मुकुट से मुँह मोङकर
स्वयं की सुनना अगर अपराध है तो, हाँ मैं पतित हूँ

रीति रिवाजों की भेंट चढ़कर, मृत्यु को गले लगाया
पल पल की उस मृत्यु ने, हृदय को पाषाण बनाया
राग द्वेष तन मन गलाकर, भावावेश सब कुछ जलाकर
भाव रहित होना अगर अपराध है तो, हाँ मैं पतित हूँ

सहस्र अग्नि जलाती रही, संगीत को भुलाती रही
अतीत के भयावह उस, विचित्र गीत को गाती रही
मोह माया सब छोङकर, देह अनुबंध अब तोङकर
आत्मा से जुङना अगर अपराध है तो, हाँ मैं पतित हूँ

पग पग पर छला गया, पग पग पर ठगा गया
सपना जो टूटा मेरा, नींद से मुझको जगा गया
कसमे वायदे सब छोङकर, नियम क़ायदे सब तोङकर
राह नई चुनना अगर अपराध है तो, हाँ मैं पतित हूँ

संवेदना रहित नही हूँ, मैं वेदना सहित हूँ
दिल में उतरकर देखो, मैं वेदना सहित हूँ
बिखरी सब यादें जोङकर, रिश्तें नाते सब तोङकर
स्वयं को पाना अगर अपराध है तो, हाँ मैं पतित हूँ
हाँ मैं पतित हूँ ।।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s