मैं, मैं हूँ ?

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कहने को तो मैं, मैं हूँ
मगर मुझे अभी तक मुझमें कुछ ऐसा मिला नही है
देखकर जिसे कह सकू कि मैं, मैं हूँ

हालांकि लोग कहते है कि मैं, मैं हूँ
मगर मुझे अभी तक मुझमें कुछ ऐसा दिखा नही है
पाकर जिसे कह सकू कि मैं, मैं हूँ

कई बार कोशिश की है मैंने
दबे पांव एहसास की नदी में उतरने की
बनावट फ़रेब और दिखावे के कपङे उतारकर
जज़्बात की लहरों ने भिगोया तो ख़ूब
मगर मुझे अभी तक मुझमें कुछ ऐसा मिला नही है
छूकर जिसे कह सकू कि मैं, मैं हूँ

वैसे तो आइने कभी झूठ नही बोलते है
जो जैसा है उसे हूबहू वैसा ही तोलते है
नज़रों के तराज़ू दिल के राज़ खोलते है
हर रोज शीशे के सामने खङे होकर
निहारा है जिसे इतने सालों से
वो शख़्स है या फिर अक्स कोई

चलो जो भी हो
एक ना एक दिन तो पता चल ही जायेगा
कि मैं मैं हूँ या कोई और
फिलहाल तो मैं, मैं हूँ
मगर मुझे अभी तक मुझमें कुछ ऐसा मिला नही है
महसूस कर जिसे लिख सकू कि मैं, मैं हूँ
हाँ जीकर जिसे खुद कह सकू कि मैं, मैं हूँ ।।

#RockShayar Irfan Ali Khan

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