“मिसाइलमैन डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम साहब”

(Tribute to Bharat Ratna Dr. A. P. J. Abdul Kalaam Sahab)
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Poem on Kalam sahab

कलाम क्या लिखू मैं उन पर, वो खुद एक कलाम है
मिसाइलमैन कहे दुनिया जिन्हें, उनको मेरा सलाम है

जुनून है जिनकी पहचान, अग्निपंख से भरी उङान
विज्ञान और कला की मूरत, हिंद की निराली शान

सीखने का जज़्बा ऐसा, कि परिंदों से खुद उङना सीखा
समंदर की मचलती हुई, उन लहरों से खुद मुङना सीखा

ख़्वाब देखा ख़याल बुने, मेहनत से साकार किया उन्हें
विस्तृत वृहत् लक्ष्य चुने, हिम्मत से आकार दिया उन्हें

अग्नि त्रिशूल पृथ्वी नाग, आकाश उन्हें नाम दिया
रक्षा क्षेत्र में सबसे बङा, सबसे अनूठा काम किया

भारत को महाशक्ति बनाने की, उम्दा सोच रखते है
चेहरे पर हमेशा अपने, यह ज्ञान का ओज रखते है

छात्रों से जितना लगाव, आध्यात्म से उतना जुङाव
जीवन के रहस्यों से, आत्मा जैसा आत्मिक जुङाव

विकसित भारत के वो दृष्टा, दिया जिन्होंने एक विजन
दो हजार बीस तक हो पूरा, अपना आत्मनिर्भरता मिशन

कलाम क्या लिखू मैं उन पर, वो खुद एक कलाम है
मिसाइलमैन कहे दुनिया जिन्हें, उनको मेरा सलाम है ।।

#The RockShayar Irfan Ali Khan

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