“बिस्मिल्लाह” (शुरू अल्लाह के नाम से)

In the Name of ALLAH, the All-beneficent, the All-merciful.

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शुरू अल्लाह के नाम से, अदब-ओ-एहतराम से
ज़िक्र-ए-रसूल से लबरेज़, रूहानियत के क़याम से

साँसें तेरी जब भी चले, ये पलकें तेरी जब भी ढ़ले
इश्क़-ए-सरवर में ग़ुरूब, सूफ़ियाना चंद कलाम से

ज़िंदगी तेरी कुछ ऐसी हो, हुज़ूर-ए-अक़दस जैसी हो
आयत-ए-कुरआन में बयां, इंसानियत के पयाम से

जो भी करे तू दिल से कर, नेकी न सही बदी न कर
राह-ए-हक़ पर चलते हुए, यूँ सदाक़त के पैग़ाम से

शुरू अल्लाह के नाम से, रूहानी विर्द-ओ-एहतमाम से
नबी-ए-क़रीम के सदका-ए-तुफ़ैल, दुरूद-ओ-सलाम से ।।
———————————————–
— रॉकशायर ‘इरफ़ान’ अली खान

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