“एहसास की फसल”

Nature Beauty

एहसास की वो फसल
उगाई थी जो यादों की बगिया में
बड़ी होने लगी हैं अब वो धीरे धीरे
कल तक जो नन्ही नन्ही कोंपल थी
आज विशाल तना बनने की ओर है
जुनून की खाद ने समय समय पर
उपजाऊपन बनाये रखा है इसमें
हालाँकि कुछ बंजर हिस्से
आज भी खरपतवार के रूप में
आस पास डेरा डाले हुए हैं
मगर अब जड़ें इतनी मज़बूत हो चुकी हैं
कि फ़र्क़ नहीं पड़ता है इन्हें
अपनी जड़ों की छाया में
किसी और के जड़ें जमाने से
मेहनत का सूरज इन्हे
अपनी धूप में पका रहा है
जब फसल कटने की बारी आये
तो ये फसल, बस इतना चाहती है
कि जिसने इसे ज़मीं दी, पानी दिया, खाद दिया
उसी के हाथों ये कटना चाहती है
उसी के घर का अनाज बनना चाहती है
उसी का भोजन बनकर
उसकी भूख शांत करना चाहती है
अल्फ़ाज़ की वो फसल
उगाई थी जो उस छोटी डायरी में
बड़ी होने लगी हैं अब वो धीरे धीरे ।।

#TheRockShayar

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