“वर्किंग वूमन” (Poetic Tribute to all Working Women’s)

#ObjectOrientedPoems(OOPs)

working womens poem1

मशीन नहीं हाँ कोई, वो भी है आख़िर एक ह्यूमन
ड्यूल किरदार निभाती है जो, वो है वर्किंग वूमन

एक तरफ है घर अपना, एक तरफ है जॉब अपना
अपनो की खातिर यहाँ जो, भूले बैठी हर सपना

अर्ली मॉर्निंग उठ जाती, चाय नाश्ता टिफिन बनाती
कामकाज सब निपटाकर, मन ही मन कुछ गुनगुनाती

ऑफिस में हो कितना भी, काम का प्रेशर ऑवरलोड
घर आते ही मगर वो, ऑन कर लेती है पावर मोड

बच्चों को होमवर्क कराये, सोते वक्त कहानी सुनाये
माँ पत्नी बहू और बेटी, रिश्तों में खुद को उलझाये

हो पतिदेव के नखरे, या के बॉस की फटकार
सब सहन करती है ये, विदाउट एनी तक़रार

सास ससुर के ताने सुनती, खुद अपनी राहें चुनती
लाख कहे दुनिया यहाँ, बस अपने दिल की सुनती

मशीन नहीं हाँ कोई, वो भी है आख़िर एक ह्यूमन
दोहरी ज़िंदगी जीती है जो, वो है वर्किंग वूमन ।।

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Irfan Ali Khan
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