“मुक़द्दस पाकीज़ा कुरआन शरीफ”

In the Name of Allah, the All-beneficent, the All-merciful.

Blue-Quran-with-Beads

हर सवाल का जवाब है वो, मुक़द्दस बेहिसाब है वो
माहे रमजान में नाज़िल हुई, अल्लाह की किताब है वो

मर्तबा इस क़दर है हासिल, समझे जो वही हो फ़ाज़िल
तिलावत में तासीर इतनी, रहता नहीं फिर कोई ग़ाफ़िल

हर सूरत में इसकी यहाँ, ज़िंदगी का अहकाम बयां है
हर आयत में इसकी सदा, बंदगी का अहतराम रवां है

ज़मीं पर हिफाज़त जिसकी, यूँ तो खुद ख़ुदा करते है
रूहानी सब अल्फ़ाज़ इसके, गुनाहो से ज़ुदा करते है

राहे हिदायत का ज़रिया है वो, रहमत का दरिया है वो
रहनुमा-ए-कायनात हाँ खुद, ईमान का नज़रिया है वो

गारे हिरा में उतरी जो, नबी-ए-करीम सल्लाहु अलैहि व सल्लम पे
पढ़कर सुनाया था जिसे, हाँ खुद हज़रत जिब्रील अलैहिसलाम ने

पढ़ी जाये जितनी ज्यादा, ठहर ठहर कर बोल बोल कर
दिल में उतरे उतनी ज्यादा, रह रह कर दिल खोल कर

हर हर्फ़ निहायत सवाब है वो, पाकीज़ा बेहिसाब है वो
उम्मत के लिए तोहफा, ख़ुदा की तरफ से लाजवाब है वो

हर सवाल का जवाब है वो, मुक़द्दस बेहिसाब है वो
माहे रमजान में नाज़िल हुई, अल्लाह की किताब है वो ।।
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© रॉकशायर इरफ़ान अली खान

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