“कभी तो प्यार थोड़ा सा हाँ, मुझसे भी जताओ ना पापा”

papa poem

कभी तो सीने से अपने, मुझको भी लगाओ ना पापा
कभी तो प्यार थोड़ा सा हाँ, मुझसे भी जताओ ना पापा
खुद को पाने की यहाँ मैं, कर रहा हूँ जद्दोजहद कब से
कभी तो ऐतबार थोड़ा हाँ, मुझपे भी दिखाओ ना पापा
कभी तो सीने से अपने, मुझको भी लगाओ ना पापा
कभी तो प्यार थोड़ा सा हाँ, मुझसे भी जताओ ना पापा ।

आपके बताए रस्ते पर ही, चलता आया हूँ मैं सदा
आपके दिखाए रस्ते पर ही, बढ़ता आया हूँ मैं यहाँ
मर्ज़ी से जीने की केवल, मांग रहा हूँ मर्ज़ी मैं अब
अपने साथ आपकी भी, चाह रहा हूँ मर्ज़ी मैं अब
मोहब्बत की तलाश में, भटक रहा हूँ कब से यहाँ मैं
कभी तो चाहत का सागर, मुझपे भी लुटाओ ना पापा
कभी तो सीने से अपने, मुझको भी लगाओ ना पापा
कभी तो प्यार थोड़ा सा हाँ, मुझसे भी जताओ ना पापा ।

शिकायत नहीं कोई आपसे, ना कोई शिकवा आपसे
खुश है तमाम कायनात यहाँ, ना कोई रुस्वा आपसे
ख़्वाबों की उड़ान भरने में, मांग रहा हूँ मर्ज़ी आपकी
लोगों की पहचान करने में, चाह रहा हूँ मर्ज़ी आपकी
ज़िंदगी के सुर्ख़ अलाव में, भभक रहा हूँ कब से यहाँ मैं
कभी तो हिम्मत के क़तरे, मुझपे भी गिराओ ना पापा
खुद को पाने की यहाँ मैं, कर रहा हूँ जद्दोजहद कब से
कभी तो ऐतबार थोड़ा हाँ, मुझपे भी दिखाओ ना पापा
कभी तो सीने से अपने, मुझको भी लगाओ ना पापा
कभी तो प्यार थोड़ा सा हाँ, मुझसे भी जताओ ना पापा ।।

Copyright © 2015 RockShayar
Irfan Ali Khan
All rights reserved.

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