“साड्डा यार”

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ज़िन्दगी में जब जब, फेल होता है कोई प्यार
याद आये तभी वो, सबसे पहले साड्डा यार

दोस्ती का ये रिश्ता, यूँ तो है टोटली डिफरेंट
फाॅर्मेलिटीज है जीरो, एंड इमोशन सौ परसेंट

पॉकिट हो चाहे खाली, आँखों में सपने हजार
प्रवचन हो चाहे गाली, बातों में अपने ही यार

नो शुक्रिया नो हिसाब किताब, नो थैंक वैंक
दोस्तों की दोस्ती का, है कुछ अलग ही रैंक

हो वो एग्जाम्स की तैयारी, या कटने की बारी
यार अपने है ना जी, कर्मो पर फेर देंगे बुहारी

ना इनमें कोई राज़दारी, ना इनमें कोई दुनियादारी
फंडा ऑनली देट के, नेवर नकद ऑलवेज उधारी

ऑवरऑल खुल के बोल, है टोटल निष्कर्ष यही
खोखले रिश्तों से बढ़कर, रिश्ता है उत्कर्ष यही

ज़िन्दगी में जब भी, दुःखी हुआ कोई बेशुमार
याद आये तभी वो, सबसे पहले साड्डा यार ।।

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