“क्यां है इश्क़”

kyan hai ishq

कोई भी नहीं समझा अब तक, के क्यां है इश्क़
दर्द से नजात है, या फिर दर्द की दुआ है इश्क़

ना कोई है शर्त इसमें, ना है कोई क़रार इसमें
दिल को जो बैचैन कर दे, हाँ वोह अदा है इश्क़

नज़ीर क्यां पेश की जाए, खुद बेनज़ीर है वोह
शहद की तरह कुछ मीठी, उर्दू ज़ुबाँ है इश्क़

कायनात के हर ज़र्रे में, नुमायाँ है नक़्श जो
इंतिहा से लेकर इब्तिदा, सारा जहाँ है इश्क़

हुए हो चाहे इसके यहाँ, दीवाने कई ‘इरफ़ान’
पाया वोह सबने ही, वफ़ा ज़फ़ा और शफ़ा है इश्क़ ।।
————————————————
#RockShayar ‘Irfan’ Ali Khan

नजात – मुक्तिं
क़रार – अनुबंध
नज़ीर – उदहारण
बेनज़ीर – अनुपम, बेजोड़
ज़ुबाँ – भाषा
कायनात – सृष्टि
ज़र्रा – कण
नुमायाँ – प्रकट
नक़्श – चेहरा
इंतिहा – अंत
इब्तिदा – आरम्भ
वफ़ा – विश्वास भाव
ज़फ़ा – अन्याय
शफ़ा – इलाज

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