“फ़साने मोहब्बत के”

CYMERA_20141230_162427

जमाने से ना रही, यूँ तो मोहब्बत की दरकार
जमाने मोहब्बत के मगर, लिखता है वो हर बार

मुस्कुराहटें और खुशियां, औरों को देकर
हाँ खुद के लिए कुछ दर्द, रखता है वो हर बार

नासाज़ करे है दिल को, दावत-ए-इश्क़ सदा
ज़ायका फिर भी मगर, चखता है वो हर बार

मिली हो ठोकर, जिस दर पे दर दर की यहाँ
दर पे उसी के अपना, सर रखता है वो हर बार

यूँ तो महरूम रहा, ताउम्र मोहब्बत से ‘इरफ़ान’
फ़साने मोहब्बत के मगर, लिखता है वो हर बार ।।
————————————————-
#RockShayar I. A. Khan

“तू ही”

IMG_20150110_124332

हो के भी तू नहीं है शायद
खो के भी तू यहीं है शायद

दिन भी तू ही रात भी तू ही
मुझमें हर जज़्बात भी तू ही

लब पे तू ही शब में तू ही
जो भी है हाँ सब में तू ही

जुनूं में तू ही सुकूं में तू ही
सज़्दे और रूकूअ में तू ही

चाँद में तू ही ख़्वाब में तू ही
जलते हुए आफ़ताब में तू ही

सितारों में तू ही बहारो में तू ही
तक़दीर के सब नज़ारो में तू ही

मौत में तू ही ज़िंदगी में तू ही
बंदे की असल बंदगी में तू ही

बशर में तू ही शज़र में तू ही
कायनात की हर नज़र में तू ही

हो के भी तू नहीं है शायद
खो के भी तू यहीं है शायद ।।

‪#‎RockShayar

“रॉकशायर इन एलियन मोड”

CYMERA_20150412_165728
एलियन वज़ूद पर लगे,
अपने हर लॉक को तू अनलॉक कर दे
रॉक कर कुछ ऐसा के,
फिर हर शॉक को तू खुद ही शॉक कर दे

ई.एम.आई. में जीना छोड़ दे,
और ध्यान से सुन ओ बेख़बर बरखुर्दार
तन्हाई का मटका फोड़ दे,
और ध्यान से चुन वो कनखजूरे किरदार

ज़िंदगी है ये आख़िर,
सेल में मिली कोई डिस्काउंटेड चीज नहीं
फुल ऑन जियो इसे,
मसालेदार है मूवी कोई हॉरर हॉन्टेड नहीं

अलहदा शऊर पर लगे,
अपने हर ब्लॉक को तू अनब्लॉक कर दे
रॉक कर कुछ ऐसा के,
फिर हर शॉक को यूँ खुद ही शॉक कर दे ।।
—————————————–
#RockShayar

“Yes, I’m a casual guy”

golden_gate_afternoon_ultra_hd_wallpapers

It is my first attempt to write a poem in english.
If you find any grammatical error
then don’t be judgemental, be sentimental.
Issued in public interest….

Yes, I’m a casual guy
Simpler, but never shy
Whenever you think so it
Do more and let me try
Life gonna be crazy
Whenever make it easy
Come on, wanna free drive
Problems like children cry
Yes, I’m a rocking guy
Blooming, yet never die
Whenever you touch soul
Do sure and let me fly
Journey gonna much easy
Whenever make you crazy
Come on, wanna free dive
Emotions like chicken fry
Everyday i meet myself
Standing in front of mirror
Say proudly yeah loudly
Yes, I’m a casual guy
Yes, I’m a casual guy.
——————————-

Penned By:- RockShayar I. A. Khan
For more tast just log on:-
http://www.rockshayar.wordpress.com

“नज़रिया”


इस क़दर बदला है नज़रिया
जीवन में बरसी प्रेम बदरिया

धूप भी अब तो लगे है सावन
नदियाँ लगे मुझको मेरा मन

दिशा मुझे नित नई दिखाती
अदा मुझे हर रोज सिखाती

जाने कहाँ से आई वो खुशी
आँचल बनकर छाई वो खुशी

बातें उसकी सच्ची लगती है
आँखें उसकी अच्छी लगती है

हाँ उम्र में भले ही कम है वो
लफ़्ज़ हूँ मैं और कलम है वो

इस क़दर बदला है नज़रिया
आँगन में बरसी प्रेम बदरिया

धूप भी अब तो लगे है सावन
बगिया लगे मुझको मेरा मन ।।

“एग्जाम सेल”

Exam-Dept

पेपर फाइलों की है ये एक अनोखी जेल
कहते है जिसको हम सब एग्जाम सेल

लगे यूँ हर तरफ आंसर शीट्स के ढ़ेर
जंगल में हो सोये जैसे कागज़ के शेर

जोर से बोलना यहाँ नहीं है अलाउड
लास्ट डेट पर तगड़ा मचता है क्राउड

काउंटर पर साक्षात प्रभु नज़र आते
रसीदों पर उंगलिया सर वो खुजाते

नाम से इसके यहाँ घबराते है सब
काम से इसके यहाँ कतराते है सब

रिकॉर्ड में जिसके कोई पास कोई फेल
कहते है उसको हम सब एग्जाम सेल ।।
————————————-
© सर्वाधिकार सुरक्षित
रॉकशायर इरफ़ान अली खान

“विचारो की जलकुम्भी”

मस्तिष्क की आद्र दीवारो पर
विचारो की जलकुम्भी उगी है
खुलकर जब भी सांस लेता हूँ
विस्तारित होने लगती है यह
यादृच्छिक है जिसका स्वरूप
युगों से सूखा गहरा कोई कूप
भिन्न भिन्न से भित्तिचित्र
दृश्य पटल पर उगे चलचित्र
अतीत के वो कटु प्रतिबिम्ब
रक्तरंजित है जिनका बिम्ब
आत्मा के अदृश्य अंगो पर
विचारो की जलकुम्भी उगी है
छूकर जब भी कुछ लिखता हूँ
विस्तारित होने लगती है यह ।।
———————————-
रॉकशायर इरफ़ान अली खान
———————————-

“दिल के दर पर दस्तक”

DSCN5293

बरसो बाद फिर दस्तक दी है
दिल के दर पर किसी ने आज
झिझकते हुए दरवाजा खोला
ठिठकते हुए मन कुछ बोला
इजाज़त नही है तुझको सुन
बहार वफ़ा ना ये खुशबू चुन
झोंका है तू तो एक आवारा
नही खुद तेरा कोई किनारा
रहने दे खुद को तन्हाई में तू
बहने दे रूह को परछाई में तू
खुद में क़ैद हुए जमाना हुआ
ख़ामोशी में गुम फ़साना हुआ
बरसो बाद फिर दस्तक दी है
दिल के दर पर किसी ने आज ।।

“हाँ ईमान को भी झुठलाया उसीने” 

mukadma

लहू किया था वो आदतन जिसने
दायर किया खुद मुकदमा उसीने

गवाह ख़रीदे और अदालत बिठाई
हाँ फैसला भी सुनाया खुद उसीने

जिरह सब फ़रेबी गिरह हो के भी
बिछाए हर दफ़ा खुद जाल उसीने

सबूत मिटाकर यूँ इल्ज़ाम लगाये
और दागी दलीलें वो झूठी उसीने

ताउम्र कहलाया जो शख़्स क़ाज़ी
हाँ ईमान को भी झुठलाया उसीने ।।

‪#‎RockShayar‬

“आबादी जब भी बढ़ी, पेड़ों की तादाद घटी”

save trees green

आबादी जब भी बढ़ी, पेड़ों की तादाद घटी
कुदरत की तबाही में, इंसां की इम्दाद बढ़ी

ख़्वाहिशें हद से ज्यादा, फ़रमाइशें रब से ज्यादा
दीन दुनिया भूलकर, आज़माइशें सब से ज्यादा

तरक्की जब भी बढ़ी, ज़मीं की तादाद घटी
कुदरत की तबाही में, इंसां की इम्दाद बढ़ी ।।

‪#‎RockShayar‬

इम्दाद – मदद, योगदान

“याद रखना मैं इक दिन याद आऊंगा”

yaad aunga

याद रखना मैं इक दिन याद आऊंगा
पढोगे जब भी ग़ज़ल मैं याद आऊंगा

झोंका जब आये कोई यूँ समझ लेना
यक़ीनन फिर उसके ही बाद आऊंगा

लिखे है लफ़्ज़ कई नूर में डूबे फ़साने
छुओगे जब भी ख़त हाँ याद आऊंगा

शायरी वोह मेरी जला देना पूरी तरह
शायद इसी बहाने कुछ याद आऊंगा

डायरी के पन्नो में ज़िंदा है ‘इरफ़ान’
छुआ करोगे जब भी हाँ याद आऊंगा ।।
———————————–

#RockShayar

“मुझमें सुलग रही जाने ये कैसी आग है”

CYMERA_20150328_181741

ज़ेहन की कोंख में पल रहा कोई नाग है
मुझमें सुलग रही जाने ये कैसी आग है

अंगारे है सब ख़याली, राख़ उड़े है काली काली
अधजगी अँखियों से, ख़्वाब जुड़े है ख़ाली ख़ाली

धधक रहा है सीने में कहीं, सदियों से सुर्ख़ लावा
इंतकाम लेने का फिर, करता है हर रोज ये दावा

उड़ाती फिरे धुआँ, लोबान की तरह ये गर्म साँसें
सिखाती फिरे जुआ, ज़िंदगी की ये अनजान राहें

ज़ेहन की ओंख में पल रहा कोई नाग है
मुझमें सुलग रही जाने ये कैसी आग है ।।

#RockShayar

“दर्द तू इतने दे मुझको, कि दर्द ही आदत बन जाए”

intiha

दर्द तू इतने दे मुझको, कि दर्द ही आदत बन जाए
तड़पते हुए यूँ हर पल, जीना भी इबादत बन जाए

क़रम इतना कर मुझ पे, छलनी कर सीना चुप से
लहू कर ऐसा कि, क़त्ल भी मेरी शहादत बन जाए ।।

“खुद पर भी ऐतबार खुद किया नहीं है अब तक”

ab tak

तेरी बेरूख़ी का ज़हर पिया नहीं है अब तक
बाद उसके कोई लम्हा जिया नहीं है अब तक

दिल के किसी हिस्से पर चोट इतनी गहरी लगी 
के खुद से फिर कोई वादा किया नहीं है अब तक

वक़्त की साज़िश के चलते चाक हुआ ये सीना इक दिन
उधड़ा हुआ है तब से हाँ सिया नहीं है अब तक

खुद को ना समझने की सज़ा कुछ ऐसी मिली 
के खुद पर भी ऐतबार खुद किया नहीं है अब तक

नाकाम हुआ है जब से इक काम में ‘इरफ़ान’
खुद को फिर कोई काम दिया नहीं है अब तक ।।
———————————————
#RockShayar ‘IrFaN’ Ali KhaN

“क्या है रोटी”

afsfsf
————————————————
भूखा है कई दिनों से जो, पूछो उससे क्या है रोटी ?
रहता है फुटपाथ पर जो, पूछो उससे क्या है रोटी ?

दिखने लगी है पसलिया, चटकने लगी अंतड़िया
बदन हड्डियो का ढांचा, खटकने लगी अंतड़िया

जान हलक़ में है अटकी, सांस फ़लक पे है पटकी
हालत कुछ ऐसी हुई, के फांस हलक़ में है अटकी

दर पर खड़ा भिखारी जो, पूछो उससे क्या है रोटी ?
बताएगा वही तो ‘इरफ़ान’, असल में क्या है रोटी ?

“जल रहा है ये दिल दिये की तरह”

CYMERA_20150426_185352

रात की तन्हाई पलकों पर लिए हुए
जल रहा है ये दिल दिये की तरह

कभी भभकता भी है, कभी दमकता भी है
शब के उन अंधेरों में, कभी चमकता भी है

कहने को तो ख़्वावों ख़यालों का दरिया है
दिल तो है दिल, आख़िर जीने का ज़रिया है

चोट भी खाई है इसने, दर्द भी झेले है इसने
हर मौसम धूप और सर्द, सब झेले है इसने

फिर भी कभी क्यूँ ये कुछ नहीं कहता है
ज़िंदगी के रंजो ग़म सब खुद ही सहता है

रात की अंगङाई सीने पर लिए हुए
जल रहा है ये दिल दिये की तरह
जल रहा है ये दिल दिये की तरह ।।

‪#‎RockShayar‬ Irfan Ali Khan

“मेरा कोई हमज़बाँ नही”

11068083_1438021276504244_4548973540071414626_n

सियाहरोज़ हूँ मगर सियाहज़बाँ नही
जिगरसोज़ हूँ मेरा कोई हमज़बाँ नही ।।

सियाहरोज़ – जिसका बुरा दौर चल रहा हो
सियाहज़बाँ – शापसिद्द, काली ज़बान वाला
जिगरसोज़ – दुखदायी
हमज़बाँ – एक राय

“क्यां है इश्क़”

kyan hai ishq

कोई भी नहीं समझा अब तक, के क्यां है इश्क़
दर्द से नजात है, या फिर दर्द की दुआ है इश्क़

ना कोई है शर्त इसमें, ना है कोई क़रार इसमें
दिल को जो बैचैन कर दे, हाँ वोह अदा है इश्क़

नज़ीर क्यां पेश की जाए, खुद बेनज़ीर है वोह
शहद की तरह कुछ मीठी, उर्दू ज़ुबाँ है इश्क़

कायनात के हर ज़र्रे में, नुमायाँ है नक़्श जो
इंतिहा से लेकर इब्तिदा, सारा जहाँ है इश्क़

हुए हो चाहे इसके यहाँ, दीवाने कई ‘इरफ़ान’
पाया वोह सबने ही, वफ़ा ज़फ़ा और शफ़ा है इश्क़ ।।
————————————————
#RockShayar ‘Irfan’ Ali Khan

नजात – मुक्तिं
क़रार – अनुबंध
नज़ीर – उदहारण
बेनज़ीर – अनुपम, बेजोड़
ज़ुबाँ – भाषा
कायनात – सृष्टि
ज़र्रा – कण
नुमायाँ – प्रकट
नक़्श – चेहरा
इंतिहा – अंत
इब्तिदा – आरम्भ
वफ़ा – विश्वास भाव
ज़फ़ा – अन्याय
शफ़ा – इलाज

“दो अज़ीज दोस्त: जिनके नाम ये कलाम”

For you guys….you both are amazing…

ना जाने क्याँ किस्सा है उन दोनों का उनसे
ना जाने क्याँ हिस्सा है उन दोनों का मुझमें

कभी कभी मैं जब सोचता हूँ उनके बारे में
लफ़्ज़ कभी ख़याल ना मिलते उनके बारे में

दोनों ही वोह मुझको बेइंतहा प्यारे लगते है
देखकर जिन्हें माँगू दुआ वोह तारे लगते है

लङते झगङते है बनते बिगङते है हँसते रोते है
सो जाये चाहे रात मगर खुद कभी नही सोते है

इक दूजे की कमी पकङ इक दूजे पर झल्लाते
लाख रूठे फोन टूटे बात करे बिन ना रह पाते

कैसा अजब ये रिश्ता है कैसा अजब ये नाता है
पसंद जो चाहे मैं कर लू दोनों ही को वोह भाता है

ना जाने क्याँ किस्सा है उन दोनों का मुझसे
ना जाने क्याँ हिस्सा है उन दोनों का मुझमें

कभी कभी मैं जब लिखता हूँ उनके के बारे में
कलम कभी अल्फ़ाज़ ना मिलते उनके बारे में ।।

© RockShayar

“ग़ज़ल हो मेरी मुकम्मल तभी ये ‘इरफ़ान”

35

ज़ुल्फ़ों के घने पहरे यूँ आहिस्ता आहिस्ता
पलकों पे तेरी ठहरे यूँ आहिस्ता आहिस्ता

लबों के दरमियान आये जब नाम तुम्हारा
मन में उठे है लहरे यूँ आहिस्ता आहिस्ता

मासूम चेहरे ने बना दिया मुझको शैदाई
जिये है पल सुनहरे यूँ आहिस्ता आहिस्ता

आँखों ने आँखों पर लिखा है सूफ़ी कलाम
दरिया के जैसे गहरे यूँ आहिस्ता आहिस्ता

ग़ज़ल हो मेरी मुकम्मल तभी ये ‘इरफ़ान’
नज़रो से तेरी गुज़रे यूँ आहिस्ता आहिस्ता ।।
————————————————

“फ़क़त लम्हों की गुज़ारिश है तू”

32

गुलमोहर सी घनी गुज़ारिश है तू
साँसों की सतरंगी सिफ़ारिश है तू

बता के बिन तेरे कैसे जिया जाए
नसीब की नायाब निगारिश है तू

ज़िंदा होकर भी ना रही ये ज़िंदगी
बंजर हूँ मैं और मेरी बारिश है तू

मुहब्बत ना सही तो ना ‘इरफ़ान’
फ़क़त लम्हों की गुज़ारिश है तू ।।

#RockShayar Irfan Ali Khan

निगारिश – लिखित वर्णन

“खुद ही से हर घड़ी भागता है तू”

30

खुद ही से हर घड़ी भागता है तू
ज़िंदगी से ज़िंदगी मांगता है तू

ख़्वाब नहीं आते हर शब फिर भी
ख़्वाबों के दरमियां जागता है तू

खुदी से इश्क़ के करता है दावे हजार
और अंगारे रूह पर दागता है तू

जानता है ये फ़ना हो जाएगी इक दिन
फिर भी छूने इसको भागता है तू ।।

“देखा ना किसी ने वोह देखा करता है”

29

देखकर भी खुद को अनदेखा करता है
वज़ूद को तू अपने अनदेखा करता है

सोच भी पड़ जाए खुद सोच में यहाँ
आईने में खुद को ऐसे देखा करता है

पलकों पर सजाकर लफ़्ज़ सुनहरे
बंद आँखों से ये जहाँ देखा करता है

खुद में खुद को तलाशते हुए ‘इरफ़ान’
देखा ना किसी ने वोह देखा करता है ।।

“कहना मैं चाहूँ बाय रे गर्मी”

hot-weather

गर्मी गर्मी पङे हाय रे गर्मी
कहना मैं चाहूँ बाय रे गर्मी

ऐ.सी. कूलर हुए सब फेल
रूम बन गये तिहाङ जेल

बिजली पानी की कटौती
लगने लगा मौसम पनौती

उगल रहा सूरज यूँ शोले
नयन हो जैसे तीजा खोले

रात दिन सनसनाती है लू
हाङ मांस ये जलाती है लू

गर्मी गर्मी पङे हाय रे गर्मी
कहना मैं चाहूँ बाय रे गर्मी ।।

“खुद को पाना है तो खुद को मिटाना है”

11218966_1435658226740549_604959276839156168_n

ना कोई उन्वान है ना कोई फ़साना है
ग़ज़ल की गिरह में खुद को छुपाना है

फ़रामोश हूँ यूँ तो सदियों से यहाँ मैं
ना कोई पहचान है ना कोई ठिकाना है

परवाह नही करता मैं ग़ैरों की कभी
अपनों से पर मुझे खुद को बचाना है

रेज़ा रेज़ा ये मंज़र कहता फिरे हर सू
तन्हाई में हर शब रूह को जलाना है

सुर्ख़ निगाहों पर लिखा है ये ‘इरफ़ान’
खुद को पाना है तो खुद को मिटाना है ।।

उन्वान – शीर्षक
फ़साना – कहानी
गिरह – बंधन
फ़रामोश – विस्मृत
रेज़ा रेज़ा – कण कण
मंज़र – दृश्य
सू – तरफ
शब – रात

“मदद तुम्हारी वोह करेगा” (On Nepal Disaster)

मदद करो गर दुखियों की
मदद तुम्हारी वोह करेगा

आँसू पोंछो गर बेबसो के
आँसू तुम्हारे वोह पोंछेगा

बिना उसके धूल हो तुम
फिर भी यूँ मशगूल हो तुम

इंसां हो तुम ये याद रखो
दुआ में अपने हाथ रखो

जब भी तू ग़ाफ़िल हुआ
क़हर तभी नाज़िल हुआ

कर ले तौबा अब भी तू
है इक मौका अब भी यूँ

मदद करो गर ज़ईफो की
मदद तुम्हारी वोह करेगा

आँसू पोंछो गर बेकसो के
आँसू तुम्हारे वोह पोंछेगा ।।

“गीली हवा का झोंका”

सूखे सूखे बदन पर, गीली हवा का झोंका
छूकर आया है तुझे, गीली हवा का झोंका

तन से चिपटता हुआ, मन में सिमटता हुआ
आवारा लगे है फिर, गीली हवा का झोंका

बारिश की ख़्वाहिश में, अधजगी नींद लिए
रूह को करता है तर, गीली हवा का झोंका

बादलों की सारंगी पर, बूंदो के है तार खिंचे
गाये राग मल्हार वोह, गीली हवा का झोंका

बंजर ज़मीन को, कर दे सरसब्ज़ ‘इरफ़ान’
लगे सावन का ख़ुमार, गीली हवा का झोंका ।।

“ख़्याल में भी तेरा ख़्याल इक ख़्याल लगता है”

13499_1435216183451420_5556460530469248463_n

ख़्याल में भी तेरा ख़्याल इक ख़्याल लगता है
सदियो से फ़क़त अधूरा कोई सवाल लगता है

ख़्वाब में भी ख़्वाब नज़र आता है जो ‘इरफ़ान’
नक्श तेरा वो ज़िंदगी का ज़िंदा कमाल लगता है ।।

“खुद को पाना ही इस दिल की हसरत हो गई”

11266451_1435177040122001_4883852974907678341_n

नफ़रत को भी नफ़रत से इतनी नफ़रत हो गई
कि आग में खुद को जलाना भी मसर्रत हो गई

ख़ताओ के साये में पली है ये मुहब्बत जब से
ज़िंदगी वोह तब से हाँ बेइरादा फ़ितरत हो गई

वक्त लगता है बहुत इक पल में नहीं होता ये सब
दर्द सहते सहते यूँ बेदर्द सी ये कुदरत हो गई

पढ़ो कभी तुम भी वक्त से कुछ वक्त निकालकर
कहूँ मैं क्याँ दास्तां ही मेरी इक इबरत हो गई

खुद को खोया है जब से एक हादसे में ‘इरफ़ान’
खुद को पाना ही इस दिल की हसरत हो गई ।।

मसर्रत -खुशी
ख़ता – गलती
दास्तां – कहानी
इबरत – दुर्घटना जिससे कोई सीख मिले

“दिल में तेरे हो नाम अली”

11090956_1434317443541294_8764044625020311131_o

दिल में तेरे हो नाम अली
निकल चल तू अपनी गली
राहें वोह सब पहन ले तू
आहें वोह अब रहन दे तू
खिलने लगे मन की कली
निकल चल तू अपनी गली
दिल में तेरे हो नाम अली

फिकर विकर सब छोङ दे तू
ज़िन्दगी को नया मोङ दे तू
रास्ते तू अपने खुद बना ले
इरादे तू अपने खुद सजा ले
मचलने लगे मन की कली
निकल चल तू अपनी गली
दिल में तेरे हो नाम अली

मुश्किलें आये तो आने दे
दर्द को भी बेदर्द हो जाने दे
बाद उसके सवेरा मिलेगा
थके तन को बसेरा मिलेगा
खिलने लगे मन की कली
निकल चल तू अपनी गली
दिल में तेरे हो नाम अली ।।

‪#‎RockShayar‬

“कहाँ गुम है तू ओ मेरे रहबर”

10861074_1433877296918642_3304062412254969608_o

पयाम ना कोई ना कोई खबर
कहाँ गुम है तू ओ मेरे रहबर

आकर देख मैं कैसे जी रहा हूँ
छूकर देख दर्द कैसे पी रहा हूँ

सदियाँ गुज़र गई ना आया तू
मरहम ना कुछ सपने लाया तू

देख कैसे सूज गई है ये आँखें
पलकों पर लिए हुए ताक़ रातें

जल रहा हूँ कई बरसो से यहाँ
पिघल रहा कई अरसो से यहाँ

मक़ाम ना कोई ना कोई घर
कहाँ गुम है तू ओ मेरे रहबर ।।