“दिलवालों का शहर हैं ये”

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दिलवालों का शहर हैं ये
मतवालों का महर हैं ये

तारीफ इसकी क्याँ करू
खुशहालों का पहर हैं ये

नाज़-ओ-अंदाज़ लिए यूँ
ग़ज़लों का बहर हैं ये

मुख़्तलिफ़ नज़ारे यहाँ  
तहज़ीब की सहर हैं ये

शाहों ने था लूटा जिसे
सुनहरा वो दहर हैं ये

बयां करू मैं क्याँ ‘इरफ़ान’
ख़्यालों की नहर हैं ये

# रॉकशायर ‘इरफ़ान’

महर – सूर्य, सूरज, आफ़ताब
पहर – समय का छोटा अंश
नाज़ – गर्व, फख्र
अंदाज़ – लहजा, शैली
ग़ज़ल – उर्दू कविता का एक रूप
बहर – वृत, छंद, शेर का वज़्न
मुख़्तलिफ़ नज़ारे – विभिन्न दृश्य
तहज़ीब – संस्कृति, सभ्यता
सहर – सुबह, प्रातः काल
शाह – राजा, शासक
दहर – युग, दौर

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